समाज

शकीला नहीं रहीं, लेकिन अपने गीतों से वे लोगों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेंगी

अभिनेत्री शकीला ने देवानंद की सीआईडी और गुरुदत्त की आर पार में यादगार अभिनय किया है.

Shakila Nasirr Khan

अभिनेत्री शकीला. (फोटो साभार: फेसबुक/नासिर ख़ान)

मुंबई: गुज़रे ज़माने की अदाकारा शकीला का 82 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वह कई बीमारियों से पीड़ित थीं. बुधवार रात मुंबई के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली.

फेसबुक पर उनके भतीजे नासिर ख़ान ने ये जानकारी दी. उन्होंने लिखा, ‘बड़े दुख के साथ मुझे बताना पड़ रहा है कि मेरी आंटी, मां की बड़ी बहन शकीला आंटी का निधन हो गया है. वह 50 और 60 के दशक की स्टार थीं. बाबू जी धीरे चलना, प्यार में जरा संभलना… कृपया अपनी दुआओं में उन्हें याद करिएगा. अल्लाह उन्हें जन्नत नसीब करे… आमीन.’

शकीला को गुरुदत्त की फिल्म आर पार (1954) और देवानंद की फिल्म सीआईडी (1956) में यादगार अभिनय के लिए जाना जाता है. फिल्म आर पार में उन पर फिल्माया गया गाना बाबू जी धीरे चलना, प्यार में ज़रा संभलना… आज भी लोगों की ज़ेहन में ताज़ा हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बादशाह बेग़म के रूप में उनका जन्म एक जनवरी 1935 को हुआ. साल 1949 में शकीला के रूप में उन्होंने फिल्म दुनिया से बॉलीवुड में क़दम रखा.

इस फिल्म में उन्होंने उस ज़माने की मशहूर अदाकार सुरैया के साथ काम किया. शकीला ने सिंदबाद द सेलर (1952), लाल परी (1954), अली बाबा चालीस चोर (1954) और हातिम ताई (1956) जैसी फिल्मों में काम किया है.

अपनी मौसी और अभिनेता शकीला के साथ अभिनेता नासिर ख़ान. (फोटो साभार: फेसबुक)

अपनी मौसी और अभिनेता शकीला के साथ अभिनेता नासिर ख़ान. (फोटो साभार: फेसबुक)

रिपोर्ट के अनुसार, 14 साल के अपने करिअर में शकील ने शक्ति सामंत जैसे मशहूर निर्देशकों के अलावा शम्मी कपूर (फिल्म चाइना टाउन) और राज कपूर (फिल्म श्रीमान सत्यवादी), मनोज कुमार, देव आनंद, सुनील दत्त और जॉनी वॉकर जैसे अभिनेताओं के साथ काम किया था.

इसके अलावा उन्होंने पोस्ट बॉक्स 999, दास्तान, राजरानी दमयंती, आगोश, शहंशाह, राजमहल, अरमान, रूप कुमारी और अल-हिलाल जैसी फिल्मों में काम किया था.

गुरुदत्त की फिल्म आर पार में शकीला ने एक गैंगस्टर की प्रेमिका का किरदार निभाया था. इसके अलावा दो यादगार गीत उन पर फिल्माए गए थे. ये गाने- बाबू जी धीरे चलना, प्यार में ज़रा संभलना… और हूं अभी मैं जवां… हैं.

ओपी नैयर के संगीत से सजे बाबू जी धीरे चलना… गीत में शकीला ने आपने डांस और भावों से चार चांद लगा दिया था. दर्शकों पर ओपी नैयर और शकीला का जादू एक बार और सीआईडी के गीत आंखों ही आंखों में इशारा हो गया… से चला. इस फिल्म के एक अन्य क्लासिक गाने लेके पहला पहला प्यार, भर के आंखों में ख़ुमार… को भी भुलाया नहीं जा सकता. इन गीतों के माध्यम से शकीला हमेशा लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेंगी.

इसके बाद बतौर प्रोड्यूसर गुरुदत्त ने एक बार फिर शकीला को देवानंद के साथ फिल्म सीआईडी के लिए कास्ट किया था. इस फिल्म में उन्होंने एक अमीर घराने की लड़की का किरदार निभाया था जो देवानंद के प्यार में पड़ जाती है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, साल 1963 में शादी के बाद वह ब्रिटेन चली गई और फिल्मों में काम करना बंद कर दिया. बाद में हम इंतज़ार करेंगे (1989) और राजद्रोही (1993) में वह छोटी भूमिकाओं में नज़र आई थीं.

अभिनेत्री शकीला के भतीजे और प्रख्यात अभिनेता जॉनी वाकर के बेटे नासिर ख़ान ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया, ‘बढ़ती उम्र की वजह से उन्हें किडनी से जुड़ी समस्याएं थीं. यही उनकी मौत की वजह बनी. गुरुवार को माहिम में उन्हें दफ़नाया गया.’

उन्होंने बताया, ‘वह बहुत ही खुशमिजाज़ व्यक्ति थीं और क्योंकि उन्होंने व मेरे पिता जॉनी वॉकर ने फिल्म आर पार में साथ का किया था इसलिए हमारे बीच सिनेमा को लेकर बहुत सारी बातचीत हुआ करती थी. एक फिल्म की शूटिंग के दौरान मेरे पिता उनकी छोटी बहन नूरजहां से मिले और आगे चलकर दोनों ने शादी कर ली. शकीला मौसी अपने काम से बेहद खुश थीं. हम उन्हें मिस करेंगे.’