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एमएसपी की क़ानूनी गारंटी समेत छह मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन: संयुक्त किसान मोर्चा

तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे 40 यूनियनों के प्रधान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा की मांगों में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को पद से हटाना और गिरफ़्तारी भी शामिल है, जिनका बेटा गत तीन अक्टूबर को हुई लखीमपुर खीरी हिंसा का आरोपी है. उक्त घटना में कई किसान मारे गए थे. मोर्चा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है.

ग़ाज़ीपुर सीमा पर कृषि कानून वापस लिए जाने के निर्णय पर जश्न मनाते किसान. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत सरकार के समक्ष उठाई गई अपनी छह मांगें दोहराते हुए सोमवार को कहा कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वह आंदोलन जारी रखेगा.

किसान मोर्चा ने यह भी कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर इसका आंदोलन तब तक समाप्त नहीं किया जाएगा, जब तक तीनों संबंधित कृषि कानूनों को संसद में औपचारिक तौर पर निरस्त नहीं कर दिया जाता.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 19 नवंबर को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कानूनों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले की घोषणा की थी.

एक बयान में कहा गया है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने सिंघू सीमा पर अपनी बैठक के बाद कल (रविवार) देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा था.

उसने कहा कि इस पत्र में किसान मोर्चा ने लिखा है कि प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय समाधान के बजाय सरकार के फैसले की एकतरफा घोषणा का रास्ता चुना है, हालांकि वह इसका स्वागत भी करता है.

मोर्चा ने किसानों के खिलाफ मामले वापस लेने और तीन विवादास्पद केंद्रीय कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले प्रदर्शनकारियों के लिए स्मारक बनाने की भी मांग की है.

तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की बीते 19 नवंबर की प्रधानमंत्री की आश्चर्यजनक घोषणा के बावजूद किसान नेताओं ने कहा है कि वे तब तक नहीं झुकेंगे, जब तक कि संसद में औपचारिक रूप से कानूनों को निरस्त नहीं कर दिया जाता.

उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैधानिक गारंटी और बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा.

इस फैसले के लिए मोदी को धन्यवाद देते हुए मोर्चा ने अपने पत्र में कहा था, ‘11 दौर की बातचीत के बाद आपने द्विपक्षीय समाधान के बजाय एकतरफा घोषणा का रास्ता चुना.’

मोर्चा ने ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021’ में किसानों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों को हटाने की भी मांग की.

संयुक्त किसान मोर्चा की मांगों में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को पद से हटाना और गिरफ्तारी भी शामिल है, जिनका बेटा गत तीन अक्टूबर को हुई लखीमपुर खीरी हिंसा का आरोपी है. उक्त घटना में कई किसान मारे गए थे.

हिंसा मामले में अब तक मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा समेत एक दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

पत्र के अनुसार, ‘उत्पादन की व्यापक लागत के आधार पर एमएसपी को सभी कृषि उत्पादों के लिए किसानों का कानूनी अधिकार बनाया जाना चाहिए, ताकि देश के प्रत्येक किसान को उनकी पूरी फसल के लिए सरकार द्वारा घोषित एमएसपी की गारंटी दी जा सके. बिजली संशोधन विधेयक 2020-21 के मसौदे को वापस लें.’

इसमें कहा गया है, ‘दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में इस आंदोलन (जून 2020 से अब तक) के दौरान हजारों किसानों को सैकड़ों मामलों में फंसाया गया है. इन मामलों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए.’

बयान के मुताबिक, ‘इस आंदोलन के दौरान करीब 700 किसानों की मौत हुई है. उनके परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास सहायता दी जानी चाहिए. सिंघू सीमा पर मृतक किसानों का स्मारक बनाने के लिए जमीन आवंटित की जानी चाहिए.’

संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार पत्र में सूचीबद्ध छह मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं करती तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

मोर्चा ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, आपने किसानों से अपील की है कि अब हमें घर वापस जाना चाहिए. हम आपको आश्वस्त करना चाहते हैं कि हमें सड़कों पर बैठने का शौक नहीं है. हम भी इन मुद्दों को हल करके जितनी जल्दी हो सके अपने घर, परिवार और खेती की ओर लौटना चाहते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘अगर आंदोलन को समाप्त करना है, तो सरकार को तुरंत छह मुद्दों पर संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बातचीत फिर से शुरू करनी चाहिए. तब तक एसकेएम इस आंदोलन को जारी रखेगा.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)