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उत्तर प्रदेशः इलाहाबाद में दलित परिवार की हत्या के मामले में दो पुलिसकर्मी निलंबित

25 नवंबर को इलाहाबाद के फाफामऊ के मोहनगंज गोहरी गांव में दो महिलाओं व एक बच्चे समेत दलित परिवार के चार सदस्यों की नृशंस हत्या की गई थी. आरोप है कि परिवार की नाबालिग लड़की की हत्या से पहले उससे गैंगरेप भी किया गया. आरोपियों में कथित उच्च जाति के कई लोग शामिल हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

लखनऊः उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में एक दलित परिवार के चार सदस्यों की हत्या को लेकर विपक्षी पार्टियों द्वारा योगी आदित्यनाथ सरकारपर दबाव डालने के बीच पुलिस ने दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार की एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार भी किया गया.

इन पुलिसकर्मियों पर परिवार को एक जमीन सौदे को लेकर आरोपी के साथ समझौता करने के लिए मजबूर करने का आरोप है.

आरोपियों में कथित उच्च जाति के कई लोग शामिल हैं, जिनमें आकाश सिंह, बबली सिंह, अमित सिंह, रवि, मनीष, अभय, राजा, रांचू, कुलदीप, कान्हा ठाकुर और अशोक हैं.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने यह आरोप लगाकर लीपापोती करने की कोशिश की कि परिवार पर पहले भी हमला हुआ था लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बावजूद भी कोई मदद मुहैया नहीं कराई गई.

बता दें कि दलित परिवार के चार लोगों (दो बच्चों सहित) के शव 25 नवंबर की सुबह उनके घर से बरामद किए गए थे.

सामूहिक बलात्कार और हत्या के लिए आईपीसी की धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति एक्ट के तहत भी 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है जिनमें से आठ को गिरफ्तार किया जा चुका है.

पुलिस इस मामले की जांच कर रही है कि क्या नाबालिग लड़की का यौन शोषण किया गया क्योंकि उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे.

पीड़ित परिवार के एक सदस्य ने अपनी शिकायत में थाने के प्रभारी को नामित किया है, जिसके पास दलित परिवार सुरक्षा के लिए पहुंचा था.

परिवार के संबंधियों का कहना है कि थाना प्रभारी राम केवल पटेल और कॉन्स्टेबल सुशील कुमार सिंह ने समझौता करने के लिए परिवार पर दबाव बनाया था और आरोपियों की मदद की थी.

पुलिस अधिकारी का कहना है कि पटेल और कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है.

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) की सचिव प्रियंका गांधी शुक्रवार को पीड़ित परिवार से मिली. विपक्षी समाजवादी पार्टी, बसपा और आम आदमी पार्टी ने भी इस घटना को लेकर योगी आदित्यनाथ परिवार पर निशाना साधा है.

समाजवादी पार्टी ने भाजपा को दलित विरोधी पार्टी कहा जबकि मायावती ने दावा किया कि बाबूलाल भंवरा के नेतृत्व में बसपा प्रतिनिधिमंडल ने घटनास्थल का दौरा किया और पाया कि इलाहाबाद में दबंग लोगों को आतंकित कर रहे हैं.

आम आदमी पार्टी ने कहा कि वे रविवार को यूपी के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन करेंगे और इस घटना को राज्य सरकार की लापरवाही और पुलिस-अपराधियों की सांठगांठ का नतीजा बताया.

आप नेता संजय सिंह ने कहा, ‘यह हाथरस घटना से बड़ा मामला है. भाजपा सरकार जातिवादी घृणा से प्रेरित है.’

इलाहाबाद के डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने कहा, ’11 लोगों में से आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है. बाकी के दो मुंबई में हैं और टीम उनका पता लगाकर गिरफ्तार करने के लिए टीम को तैनात किया गया है. एक आरोपी अस्पताल में भर्ती हैं और वह चलने में सक्षम नहीं हैं. हम उससे भी पूछताछ करेंगे. हम हर संभव एंगल से मामले की जांच करेंगे.’

त्रिपाठी ने कहा कि परिवार की सुरक्षा की मांग को स्वीकार कर लिया गया था. उन्होंने जैसे ही सुरक्षा के लिए आवेदन दिया, उन्हें हथियार के लिए लाइसेंस देने की प्रक्रिया पूरी की गई. जिला प्रशासन ने परिवार के लिए मुआवजे का भी ऐलान किया.

परिवार के सदस्यों का कहना है कि पीड़ितों ने कुछ महीने पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और आरोपियों के भू माफियों का हिस्सा बताते हुए कहा था कि उन्होंने उन्हें मारने की धमकी दी थी लेकिन एफआईआर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

यह घटना 25 नवंबर को इलाहाबाद के फाफामऊ के मोहनगंज गोहरी गांव में हुई. दलित परिवार के मुखिया जिनकी उम्र 50 साल थी, उनकी 45 वर्षीय पत्नी, 16 साल की बेटी और 10 साल के बेटे के मृत शव पाए गए. शवों के पास खून से सनी कुल्हाड़ी भी पाई गई थी.