राजनीति

सरकारी नौकरी ही नहीं है, कब तक सब्र करे देश का नौजवान: वरुण गांधी

पीलीभीत से भाजपा सांसद वरुण गांधी ने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में पहले के मुकाबले कम सरकारी नौकरियां हैं, लिहाज़ा युवाओं में कुंठा के भाव पैदा हो रहे हैं. पिछले दो वर्षों में सिर्फ उत्तर प्रदेश में पेपर लीक होने की वजह से 17 परीक्षाएं स्थगित की जा चुकी हैं और अभी तक इसमें शामिल किसी बड़े सिंडिकेट की पहचान नहीं की जा सकी है.

Ahmedabad: BJP MP Feroze Varun Gandhi addresses at IIMA during a talk show on 'A rural manifesto: Realising India's future through villages', in Ahmedabad, Friday, Nov. 30, 2018. (PTI Photo/Santosh Hirlekar)(PTI11_30_2018_000189B)

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से भाजपा सासंद वरुण गांधी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: किसानों के मुद्दों पर लगातार अपनी ही पार्टी की सरकार को कटघरे में खड़ा करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद वरुण गांधी ने बृहस्पतिवार को सरकारी नौकरियों की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि देश के नौजवान कब तक सब्र करेंगे.

उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘पहले तो सरकारी नौकरी ही नहीं है, फिर भी कुछ मौका आए तो पेपर लीक हो, परीक्षा दे दी तो सालों साल रिजल्ट नहीं, फिर किसी घोटाले में रद्द हो. रेलवे ग्रुप डी के सवा करोड़ नौजवान दो साल से परिणामों के इंतजार में हैं. सेना में भर्ती का भी वही हाल है. आखिर कब तक सब्र करे भारत का नौजवान?’

बाद में एक बयान में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से भाजपा सांसद गांधी ने कहा कि ग्रामीण भारत में औसत युवाओं के लिए रोजगार के अवसर मुख्यत: सरकारी नौकरियों तक ही सीमित रहते हैं, चाहे वह रक्षा क्षेत्र हो या पुलिस, रेलवे या फिर शिक्षा.

उन्होंने कहा, ‘प्रत्येक क्षेत्र में पहले के मुकाबले कम सरकारी नौकरियां हैं, लिहाजा युवाओं में कुंठा के भाव पैदा हो रहे हैं. पिछले दो वर्षों में सिर्फ उत्तर प्रदेश में पेपर लीक होने की वजह से 17 परीक्षाएं स्थगित की जा चुकी हैं और अभी तक इसमें शामिल किसी बड़े सिंडिकेट की पहचान नहीं की जा सकी है. युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार से जोड़ने का भी कोई तंत्र नहीं है. इसलिए रोजगार संबंधी दिशानिर्देशों और निर्धारित समय-सारणी का पालन किया जाना आवश्यक है.’

वरुण गांधी अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार के प्रबंधन की भी आलोचना करते रहे हैं. हालांकि इस दौरान उन्होंने अभी तक सीधे केंद्र सरकार को निशाना नहीं बनाया है.

केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों की आवाज में भी वह आवाज मिलाते रहे हैं.

तीन कानूनों को निरस्त किए जाने की घोषणा के एक दिन बाद भी उन्होंने आंदोलनरत किसानों के सुर में सुर मिलाते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानून बनाने की मांग की थी और आगाह किया था कि राष्ट्रहित में सरकार को ‘तत्काल’ यह मांग मान लेनी चाहिए अन्यथा आंदोलन समाप्त नहीं होगा.

बता दें कि वरुण गांधी उन कुछ भाजपा नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने किसानों के लिए खासकर लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद से आवाज उठाई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिख कर उन्होंने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की थी और कहा था कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने का यह निर्णय यदि पहले ही ले लिया जाता तो 700 से अधिक किसानों की जान नहीं जाती.

बीते कुछ समय से वरुण गांधी किसानों के मुद्दे पर लगातार अपनी राय रख रहे हैं और किसान आंदोलन को लेकर उन्होंने किसानों की मांगों का समर्थन भी किया था.

उन्होंने लखीमपुर खीरी में बीते तीन अक्टूबर को हुई हिंसा को लेकर भी वीडियो साझा किए थे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. इसके बाद भाजपा की नवगठित राष्ट्रीय कार्यसमिति से वरुण और उनकी मां मेनका गांधी को बाहर कर दिया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)