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महाराष्ट्र सरकार ने परमबीर सिंह को निलंबित किया, अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के निलंबन आदेश में कहा गया है कि सरकार ने उनके ख़िलाफ़ कुछ अनियमितताओं और चूक को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है, जिसमें ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति भी शामिल है. परमबीर सिंह पिछले छह महीने में महाराष्ट्र होमगार्ड प्रमुख नियुक्त किए जाने के बाद पेश नहीं हुए हैं.

मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह. (फाइल फोटो: पीटीआई)

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने बृहस्पतिवार को मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ कुछ अनियमितताओं और खामियों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

जिस दिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को रीढ़ की सर्जरी के बाद 12 नवंबर को मुंबई के एक निजी अस्पताल से छुट्टी मिली थी, उसी दिन निलंबन आदेश को मंजूरी दी गई थी.

एक अधिकारी ने कहा कि निलंबन आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकार ने उनके खिलाफ कुछ अनियमितताओं और चूक को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है, जिसमें ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति भी शामिल है.

सूत्रों ने कहा कि सिंह पिछले छह महीने में महाराष्ट्र होमगार्ड प्रमुख नियुक्त किए जाने के बाद पेश नहीं हुए.

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें 29 अगस्त तक की छुट्टी दी गई थी, लेकिन उसके बाद भी वह ड्यूटी पर नहीं आए.

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर महीने की शुरुआत में मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त के देश छोड़कर फरार होने की खबरों के बीच उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, निलंबन आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि के दौरान परमबीर सिंह को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम 4 के तहत स्वीकार्य निर्वाह भत्ता, महंगाई भत्ता और अन्य भत्ते का भुगतान किया जाएगा, लेकिन इसके लिए उनको प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वह किसी अन्य रोजगार, व्यवसाय या पेशे में लगे हुए नहीं हैं.

आदेश में यह भी कहा गया है कि इस अवधि के दौरान वह राज्य के पुलिस महानिदेशक की अनुमति के बिना अपने मुख्यालय, डीजी होमगार्ड के कार्यालय को नहीं छोड़ेंगे.

अधिकारी ने बताया कि पुलिस उपायुक्त पराग मनेरे को भी निलंबित कर दिया गया है. मानेरे के निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय नागपुर एसपी कार्यालय होगा और वे इसे बिना अनुमति के नहीं छोड़ पाएंगे.

सूत्रों ने कहा कि हाल ही में डीजीपी के कार्यालय से महाराष्ट्र के गृह विभाग को प्रत्येक अधिकारी के खिलाफ विशिष्ट आरोपों के विवरण वाली एक रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसके बाद निलंबन की प्रक्रिया शुरू हुई.

परमबीर सिंह और पराग मनेरे को जबरन वसूली के आरोपों के संबंध में रिपोर्ट में कुछ स्थानों पर उनके नाम आने के बाद निलंबित करने का निर्णय लिया गया था.

सूत्रों ने कहा कि चूंकि वे वरिष्ठ अधिकारी हैं, इसलिए प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास गया, जिन्होंने अंतिम फैसला किया.

महाराष्ट्र के डीजीपी संजय पांडे ने सितंबर में राज्य के गृह विभाग को प्रस्ताव दिया था कि पांच प्राथमिकी में जबरन वसूली के आरोप में परमबीर सिंह, चार डीसीपी रैंक के अधिकारियों और कई एसीपी रैंक के अधिकारियों सहित 25 अधिकारियों को निलंबित किया जाए.

अधिकारी ने कहा कि परमबीर सिंह जबरन वसूली और अत्याचार के मामलों में नामजद थे और उनके खिलाफ कम से कम चार प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

अधिकारी ने बताया कि उनका निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इस साल 12 अगस्त और 3 नवंबर को डीजीपी संजय पांडे के पत्रों के आधार पर किया गया है.

उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम 1969 के तहत की गई है.

गौरतलब है कि इस साल मार्च महीने में मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने राज्य के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे, जब उन्हें एंटीलिया विस्फोटक सामग्री घटना के बाद मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से हटा दिया गया था.

उन्होंने देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुंबई में रेस्तरां और बार से एक महीने में 100 करोड़ रुपये लेने के लिए कहा था. अदालत ने जांच एजेंसी को इन आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था.

हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता देशमुख ने इस आरोप से इनकार किया था.

देशमुख ने इन आरोपों के बाद अप्रैल में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया था. वर्तमान में वे मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में न्यायिक हिरासत में हैं.

इन आरोपों की जांच कर रहे आयोग ने परमबीर सिंह को अपना बयान दर्ज करने के लिए पेश होने का निर्देश दिया था, लेकिन आईपीएस अधिकारी पिछले महीने ही उसके समक्ष पेश हुए थे.

उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के बाहर एक एसयूवी से विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले की जांच के दौरान सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वझे की भूमिका सामने आने के बाद सिंह को उनके पद से हटा दिया गया था. वझे को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है.

वहीं, देशमुख ने अपने खिलाफ जांच के विरोध में अदालत का रुख किया था और इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था. राज्य सरकार ने परमबीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त जज केयू चांदीवाल की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था.

इस आयोग ने कई बार परमबीर सिंह को तलब किया और यहां तक कि एक बार उनके खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किया गया, लेकिन वह आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)