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साल 2020 में यूएपीए के तहत 1,321 लोगों को गिरफ़्तार किया गया: केंद्र

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बताया कि गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम क़ानून (यूएपीए) के तहत 80 लोगों को दोषी ठहराया गया, जबकि 2019 में 34 लोगों को दोषी ठहराया गया था. यूएपीए के तहत ज़मानत पाना बहुत ही मुश्किल होता है और जांच एजेंसी के पास चार्जशीट दाख़िल करने के लिए 180 दिन का समय होता है.

(इलस्ट्रेशनः द वायर)

नई दिल्ली: सरकार ने बुधवार को कहा कि 2020 में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत 1,321 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 2019 में इस कानून के तहत 1,948 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी.

उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2018 में इस कानून के तहत 1,421 और 2017 में 1554 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. साल 2016 में इसके तहत 999 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, नित्यानंद राय ने कहा कि 2020 में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत 80 लोगों को दोषी ठहराया गया, जबकि 2019 में 34 लोगों को दोषी ठहराया गया था.

उन्होंने बताया कि 2020 के अंत तक यूएपीए के तहत गिरफ्तार 1,317 लोग न्यायिक हिरासत में थे, जबकि 2019 के अंत तक 1,091 लोग न्यायिक हिरासत में थे.

इस बीच, गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि 31 दिसंबर, 2019 की स्थिति के अनुसार देश भर की विभिन्न जेलों में 3,30,487 विचाराधीन कैदी थे.

उन्होंने कहा कि कारागार एवं कैदियों का प्रशासन एवं प्रबंधन संबंधित राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होती है.

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने विचाराधीन कैदियों के मामलों का निराकरण करने और जेलों में भीड़ का कम करने के लिए राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श जारी किए हैं.

बीते मार्च महीने में केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया था कि साल 2015 से 2019 के बीच यूएपीए के तहत गिफ्तारियों में 72 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया था कि यूएपीए के तहत 2019 में देशभर में दर्ज किए गए 1,226 मामलों में 1,948 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. जिसमें वर्ष 2015 और 2018 के बीच 897, 922, 901 और 1,182 मामले दर्ज किए गए थे और 1,128, 999, 1,554 और 1,421 लोग गिरफ्तार किए गए थे.

आंकड़ों के अनुसार, साल 2019 में सबसे अधिक मामले मणिपुर में दर्ज किए गए. इसके बाद तमिलनाडु में 270, जम्मू कश्मीर में 255, झारखंड में 105 और असम में 87 मामले दर्ज किए गए.

मालूम हो कि यूएपीए के तहत जमानत पाना बहुत ही मुश्किल होता है और जांच एजेंसी के पास चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का समय होता है.

यूएपीए की धारा 43-डी (5) में यह कहा गया है कि एक अभियुक्त को जमानत पर रिहा नहीं किया जाएगा, यदि न्यायालय केस डायरी के अवलोकन या सीआरपीसी की धारा 173 के तहत बनाई गई रिपोर्ट पर विचार व्यक्त करता है कि यह मानने के लिए उचित आधार है कि इस तरह के व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाना प्रथम दृष्टया सही है.

इसी तरह बीते अगस्त महीने में जारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 से जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत 1,200 से अधिक मामलों में 2,300 से अधिक लोगों और सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत 954 लोगों पर मामला दर्ज किया था.

हालांकि, सरकार ने बताया था कि देशभर में 2019 में गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) कानून (यूएपीए) के तहत 1,948 लोगों को गिरफ्तार किया गया. वहीं, 34 आरोपियों को दोषी ठहराया गया.

2020 में अनुसूचित जाति के लोगों के ख़िलाफ़ अपराध के 50,291 मामले दर्ज किए गए

अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के खिलाफ अपराध के मामलों में वर्ष 2020 में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई और 50,291 मामले दर्ज किए गए वहीं 2019 में ऐसे अपराधों की संख्या 45,961 थी.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी. उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि 2020 में अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के खिलाफ अपराध के 50,291 मामले दर्ज किए जबकि 2019 में 45,961 मामले सामने आए थे.

उन्होंने कहा कि 2018 में 42,793 और 2017 में 43,203 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)