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बिहार में मोतियाबिंद की सर्जरी संक्रमित ऑपरेशन थियेटर में की गई थी: जांच रिपोर्ट

मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 22 नवंबर को 65 लोगों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया था, जिसके बाद कई लोगों की दृष्टि चली गई थी या संक्रमण फैलने से रोकने के लिए आंखे निकालनी पड़ी. माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट के लिए भेजे गए नमूनों से पुष्टि हुई है कि ऑपरेशन थियेटर संक्रमित था.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

मुजफ्फरपुर/पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर शहर स्थित आंख के एक अस्पताल के जिस ऑपरेशन थियेटर में निशुल्क शिविर के तहत 65 लोगों का मोतियाबंद का ऑपरेशन किया गया था, वह ऑपरेशन थियेटर संक्रमित था. यह खुलासा मामले की जांच में हुआ है.

उल्लेखनीय है कि इस शिविर में ऑपरेशन करने वाले करीब आधे लोगों को दृष्टिहानि का सामना करना पड़ा था.

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन विनय कुमार शर्मा ने मंगलवार को बताया कि उक्त अस्पताल जहां पिछले 22 नवंबर को 65 लोगों का ऑपरेशन किया गया था, वहां के ऑपरेशन थियेटर से जो स्वैब के नमूने एकत्र किए गए थे उनमें जीवाणु संक्रमण की पुष्टि हुई है.

उन्होंने बताया कि ये नमूने जांच के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को भेजे गए थे.

शर्मा ने बताया कि जांच निष्कर्षों को स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ राज्य के स्वास्थ्य विभाग के साथ उपयुक्त कार्रवाई के लिए साझा किया गया है.

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते प्रशासन उक्त अस्पताल को सील कर दिया था और सर्जरी करने वाले सर्जन, उनकी सहायता करने वाले तकनीशियनों और पैरामेडिक्स, नेत्र केंद्र से जुड़े लोगों सहित कुल 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी.

यह मामला उस समय प्रकाश में आया था जब गंभीर लक्षणों की शिकायत के साथ ऑपरेशन कराने वाले रोगी उक्त अस्पताल पहुंचे. आंख और शरीर के अन्य हिस्सों में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए नेत्र अस्पताल द्वारा चार लोगों की आंखें निकाल दी गईं. एसकेएमसीएच रेफर किए गए अन्य 11 रोगियों की भी आंख निकालनी पड़ी थी.

एसकेएमसीएच नेत्र विभाग के प्रमुख आरके सिंह ने बताया कि उनके अस्पताल में ऐसे कुल 22 रोगियों को भर्ती कराया गया था जिनमें से 11 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ी और वर्तमान में इलाजरत हैं. जबकि शेष को तथा कुछ अन्य मरीजों जो मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में भर्ती थे, को बेहतर इलाज के लिए पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) रेफर करना पड़ा.

आईजीआईएमएस के नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष बिभूति पी. सिन्हा ने बताया कि कुल 20 रोगियों जिन्हें मोतियाबिंद के असफल ऑपरेशन के बाद मुजफ्फरपुर से रेफर किया गया था, उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है.

उन्होंने बताया, ‘तीन मरीजों की सर्जरी की गई है जबकि एक अन्य मरीज का ऑपरेशन किया जाना है. हमारे यहां किसी की आंख नहीं निकाली गई है. सर्जरी का उद्देशय संक्रमण फैलने से रोकना और जहां तक संभव हो दृष्टि बहाली कोशिश करनी है.’

हालांकि, सिन्हा ने अफसोस जताते हुए कहा कि उनके अस्पताल में भर्ती इन 20 रोगियों में से शेष 16 रोगियों जिन्हें दृष्टिहानि का सामना करना पड़ रहा है और उनमें संक्रमण और न बढ़े इस दिशा में हमारा प्रयास जारी है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए स्वास्थ्य विभाग के मंत्री मंगल पांडे ने मंगलवार को मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में किए गए माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट की रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की.

उन्होंने कहा, ‘माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी. जिस अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी हुई थी उसे सील कर दिया गया है और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.’

माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट की रिपोर्ट की एक कॉपी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बिहार विभाग को भी भेजी गई है, जिसने जांच पूरी होने से पहले डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज एक पुलिस केस पर नाराजगी जताई थी.

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि अस्पताल बिना वैध लाइसेंस के चल रहा था.

जांच दल के एक सदस्य ने कहा कि लाइसेंस की अवधि इस साल की शुरुआत में समाप्त हो गई थी, फिर भी यह चालू था. स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट पहले ही भेजी जा चुकी है.

राज्य सरकार ने कहा कि वह संक्रमित मरीजों के इलाज पर होने वाले खर्च को वहन करेगी. स्वास्थ्य मंत्री पांडे ने कहा, ‘जब मामला हमारे संज्ञान में आया, तो हमने खामियों की जांच के लिए डॉक्टरों की चार सदस्यीय टीम का गठन किया.’

मालूम हो कि इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक दिसंबर को बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण को नोटिस जारी किया था.

नोटिस में कहा गया था, ‘डॉक्टरों को सर्जरी के बाद संक्रमण की वजह से लगभग दर्जनभर से अधिक मरीजों की आंखें निकालने की जरूरत पड़ सकती है. कथित तौर पर मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुरूप एक डॉक्टर 12 सर्जरी तक कर सकता है लेकिन इस मामले में एक डॉक्टर ने 65 सर्जरी तक की है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)