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कैराना पलायन सरकारी प्लान है, इसके बहकावे में मत आना: राकेश टिकैत

कृषि आंदोलन की सफलता को लेकर उत्तर प्रदेश के कैराना में आयोजित महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में लोगों से कहा कि वह कैराना पलायन जैसे मुद्दों से सतर्क रहें, क्योंकि यह उनके बीच में दरार पैदा करने की कोशिश है.

राकेश टिकैत. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत, जिनका संगठन केंद्र के खिलाफ चले 13 महीने लंबे कृषि विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था, ने लोगों को साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान शामली जिले में कैराना के लोगों के कथित पलायन के मामले को लेकर भाजपा के प्रयासों से प्रभावित नहीं होने की चेतावनी दी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उन्होंने बीते रविवार को कैराना में हुए महापंचायत में कहा, ‘कैराना पलायन सरकारी प्लान है, पलायन नहीं. इसके बहकावे में मत आयो.’

इस कार्यक्रम का आयोजन किसानों को धन्यवाद देने के लिए किया गया था, जिन्होंने तीन विवादास्पद केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में एक साल से भी अधिक समय तक प्रदर्शन किया, जिसके कारण सरकार को इन कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे भाजपा नेताओं ने हाल की जनसभाओं के दौरान कैराना से कथित पलायन का मुद्दा उठाया था.

इस महीने की शुरुआत में सहारनपुर में एक रैली में दोनों ने इस मामले को उठाया और शाह ने कहा था कि साल 2017 के राज्य चुनावों में उन्होंने इस क्षेत्र के लोगों को आश्वासन दिया था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो ‘आपके पलायन के लिए जिम्मेदार लोगों को’ यूपी से बाहर निकलेंगे.

नवंबर महीने में शामली के जिला मजिस्ट्रेट ने वर्ष 2013-14 में कैराना से कथित रूप से बाहर निकाले गए लोगों की सूची तैयार करने का आदेश दिया था. आदित्यनाथ द्वारा कथित रूप से प्रभावित परिवारों का दौरा करने और उन्हें मुआवजे और सुरक्षा का वादा करने के एक हफ्ते बाद यह आदेश जारी किया गया था.

साल 2016 में भाजपा के पूर्व सांसद हुकुम सिंह ने दावा किया था कि अपराधियों की धमकियों के कारण करीब 350 हिंदुओं को शहर छोड़ना पड़ा था. उस समय शामली जिला प्रशासन ने एक सर्वेक्षण कराया था, जिसमें यह पाया गया कि कथित जबरन वसूली की धमकी मिलने के बाद केवल तीन परिवार शहर को छोड़ कर गए थे.

इसी संदर्भ में बीते 12 दिसंबर को अपने भाषण में महापंचायत में टिकैत ने लोगों से कहा कि वह कैराना जैसे मुद्दों से सतर्क रहें, क्योंकि यह उनके बीच में दरार पैदा करने की कोशिश है.

उन्होंने जनता से रोजगार और उनकी आजीविका जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया.

किसान नेता ने कहा, ‘हजारों लोग प्रतिदिन कैराना और आसपास के शहरों से कमाने के लिए हरियाणा के पानीपत जाते हैं और रात में अपने गृह राज्य वापस आ जाते हैं. सरकार इस क्षेत्र में उद्योग क्यों नहीं लगाती, ताकि इन लोगों को रोजाना राज्य की सीमा पार न करनी पड़े.’

टिकैत ने कहा कि 13 महीनों के दौरान किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन किया, जो कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर सरकार के खिलाफ इस तरह के गतिरोध के लिए उन्हें तैयार करने के लिए एक तरह का प्रशिक्षण था.

टिकैत ने कहा, ‘हमारा आंदोलन समाप्त हो गया है, लेकिन लड़ाई जारी है और सरकार (यूपी) के पास अभी भी आदर्श आचार संहिता लागू होने में कम से कम दो महीने का समय है. सरकार के पास फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, गन्ने के दाम बढ़ाने और बिजली की कम दरों पर कानून लाने के लिए पर्याप्त समय है. हम इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे, लेकिन केवल लोगों को विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने के बाद सरकार द्वारा उनके कल्याण के लिए किए जा रहे उपायों के बारे में बताएंगे.’

भाकियू नेता ने कहा कि किसी को भी संदेह नहीं होना चाहिए कि नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ किसानों का विरोध सफल रहा है.