भारत

लखीमपुर हिंसा: केंद्रीय मंत्री के बेटे समेत 13 पर हत्या के प्रयास का मुक़दमा चलाने का अनुरोध

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले में बीते तीन अक्टूबर को हुई हिंसा मामले में आरोप है कि केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा ने इस दौरान किसानों को अपनी गाड़ी से कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी. मामले की जांच कर रही एसआईटी ने आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों के ख़िलाफ़ हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के तहत चार और आपराधिक आरोप लगाने की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की है.

लखीमपुर खीरी के तिकोनिया इलाके में 3 अक्टूबर 2021 को हुई हिंसा में क्षतिग्रस्त हुआ एक वाहन. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में बीते अक्टूबर माह में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब तक की छानबीन और साक्ष्यों के आधार पर दावा किया है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और उसके सहयोगियों ने इस घटना को जान-बूझकर, सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया था.

उत्तर प्रदेश पुलिस की एसआईटी ने सोमवार को इस संबंध में अदालत में याचिका दायर कर मामले में गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों के खिलाफ नई धाराएं लगाने की मांग की.

एसआईटी ने अदालत से हिंसा के दौरान चार किसानों और एक पत्रकार की मौत के मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के तहत चार और आपराधिक आरोप लगाने की मांग की है.

नई धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का अनुरोध के साथ ये याचिका एसआईटी के मुख्य जांच निरीक्षक विद्याराम दिवाकर ने मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट (सीजेएम) की अदालत दाखिल की है.

आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों द्वारा लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहे किसानों को जीप से कुचलने का आरोप है. इस घटना में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई थी.

एसपीओ के मुताबिक, जांच अधिकारी ने सीजेएम को भेजे गए आवेदन में कहा है कि अब तक की गई जांच और इकट्ठा किए गए सबूतों से यह पता चला है कि आरोपियों द्वारा इस आपराधिक कृत्य को लापरवाही से नहीं बल्कि जान-बूझकर सुनियोजित साजिश के तहत जान से मारने की नीयत से किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) एसपी यादव ने बताया कि लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच कर रहे विशेष जांचकर्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को आईपीसी की धारा 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाने), 338 (गंभीर चोट पहुंचाना), 304ए (लापरवाही से मौत का कारण) को हटाने की मांग की है.

एसआईटी की ओर से कहा गया है कि जांच के दौरान उसे नए सबूत मिले और जांच दल ने आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 326 (जान-बूझकर खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाना) और 34 (समान इरादों से कई व्यक्तियों द्वारा किया गया कृत्य) के तहत चार किसानों और एक पत्रकार की हत्या के मामले में इन आरोपों के तहत केस दर्ज करने की मांग की.

एसआईटी ने इस मामले में आईपीसी की अन्‍य धाराओं को भी बरकरार रखा है.

वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी यादव ने कहा, ‘मुख्य जांच अधिकारी ने अदालत से 13 आरोपियों के वॉरंट में सुधार करने का भी अनुरोध किया, जो मौजूदा समय में न्यायिक हिरासत में हैं.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि एसआईटी को पता चला है कि एसयूवी के काफिले द्वारा किसानों और पत्रकार को जान-बूझकर कुचला गया था.

बता दें कि तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा से संबंधित महिंद्रा थॉर सहित तीन एसयूवी के एक काफिले ने तिकोनिया क्रॉसिंग पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंद दिया था, जिसमें चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी और लगभग आधा दर्जन लोग घायल हुए थे.

इस दौरान किसान उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की यात्रा का विरोध कर रहे थे. इस संबंध में दो एफआईआर तिकुनिया थाने में दर्ज की गई.

पहली एफआईआर एक किसान जगजीत सिंह ने चार किसानों और एक पत्रकार की मौत के मामले में दर्ज कराई थी जिसमें उसने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा और 15 से 20 अन्य को आरोपी बनाया था.

दूसरी एफआईआर भाजपा के कार्यकर्ता सुमित जायसवाल द्वारा किसानों को गाड़ी से कुचले जाने के बाद हुई हिंसा के दौरान भाजपा के दो कार्यकर्ताओं और एक चालक की मौत के मामले में दर्ज कराई गई थी, जिसमें उन्होंने अज्ञात बदमाशों को आरोपी बनाया था. इसके बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था.