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देश की 48,969 ग्रामीण बस्तियां जल प्रदूषण से प्रभावित हैं: संसदीय समिति

जल संसाधन पर संसदीय समिति ने चिंता ज़ाहिर की है कि इस स्थिति के बावजूद जल संसाधन विभाग ‘चुप’ बैठा हुआ है, जबकि यह सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने की आवश्यकता है कि स्वच्छ पेयजल इन घरों तक पहुंचाया जाए. समिति की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन, नाइट्रेट, भारी धातुओं और उच्च खारापन के कारण जल आपूर्ति प्रदूषित हुई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: संसद की एक समिति ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में बताया है कि 48,969 ग्रामीण बस्तियां जल प्रदूषण से प्रभावित हैं.

इसने यह भी चिंता जाहिर की है कि इस स्थिति के बावजूद जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ‘चुप’ बैठा हुआ है, जबकि यह सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने की आवश्यकता है कि स्वच्छ पेयजल इन घरों तक पहुंचाया जाए.

लोकसभा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति, जिसमें लोकसभा के 20 अन्य सांसद और राज्यसभा के आठ सदस्य शामिल हैं, ने अपनी रिपोर्ट में ये टिप्पणियां की हैं, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा इसकी 11वीं रिपोर्ट की टिप्पणियों और सिफारिशों पर की गई कार्रवाई का विश्लेषण किया गया है.

छह प्रमुख प्रदूषण तत्व

जल संसाधन पर स्थायी समिति की 14वीं रिपोर्ट, जिसे पिछले सप्ताह प्रस्तुत किया गया था, में यह भी बताया गया है कि आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन, नाइट्रेट, भारी धातुओं और उच्च खारापन के कारण जल आपूर्ति प्रदूषित हुई है.

उन्होंने कहा कि जल संदूषण से प्रभावित ग्रामीण बस्तियों में ‘3,112 बस्तियां आर्सेनिक के कारण प्रभावित हैं, 2,972 फ्लोराइड के कारण, 31,142 आयरन के कारण, 866 नाइट्रेट के कारण, 300 भारी धातुओं और 10,575 बस्तियां पानी में उच्च खारापन के कारण प्रभावित हैं.’

समिति ने आगे कहा कि राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उप मिशन (एनडब्ल्यूक्यूएसएम), जिसे पूर्ववर्ती राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के एक भाग के रूप में मार्च, 2017 में शुरू किया गया था, के तहत आर्सेनिक या फ्लोराइड से प्रभावित 27,544 ग्रामीण बस्तियों को मार्च, 2021 तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक योजना तैयार की गई थी.

उन्होंने कहा कि 15 फरवरी, 2021 तक इसमें से 78 बस्तियों को छोड़कर बाकी सभी बस्तियों को योजना के तहत लाया जा चुका है.

हालांकि, समिति ने कहा कि पानी में आयरन और खारापन अभी भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘आयरन और खारापन जैसे अन्य दूषित पदार्थों से प्रभावित बस्तियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए की गई कार्रवाई के संबंध में विभाग चुप है.’

इसलिए संसदीय समिति ने सिफारिश की कि विभाग को इन बस्तियों पर अपना ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है.

समिति ने यह भी कहा, ‘पानी की गुणवत्ता की समस्याओं से निपटने के लिए पाइप से पानी की आपूर्ति ही एकमात्र समाधान है, इसलिए हर ग्रामीण घर/बस्ती में पाइप से पानी की आपूर्ति की व्यवस्था करने तक देश के प्रत्येक ग्राम पंचायत/बस्ती में सामुदायिक जल शोधन संयंत्रों (सीडब्ल्यूपीपी) को स्थापित करके स्वच्छ पानी की आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए.’

समिति ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि विभिन्न राज्यों द्वारा देश में 32,277 सीडब्ल्यूपीपी स्थापित किया गया है. हालांकि इसे लेकर संसदीय समिति ने संदेह जताते हुए कहा कि क्या इतने सीडब्ल्यूपीपी जल प्रदूषण से प्रभावित गांवों का समाधान करने के लिए पर्याप्त हैं.

इसलिए इसने विभाग से कहा है कि वे राज्यों के साथ मिलकर जरूरी सीडब्ल्यूपीपी का आकलन करें और इसको स्थापित करने की योजना बनाए.