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चीन ने लद्दाख के पास सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना शुरू किया: रिपोर्ट

जीओस्पेशियल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट क्रिस बिगर्स ने सैटेलाइट इमेजरी का अध्यनन करके बताया है कि चीन सीमा अपनी सैन्य गतिविधियां तेज़ कर रहा है और संभवत: ऐसा अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त कर लद्दाख को अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाने के चलते हो रहा है.

सैटेलाइट तस्वीर दर्शाते हैं कि चीन अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर रहा है. (फोटो: द इंडिया केबल)

नई दिल्ली: चीन ने लद्दाख में अपनी सेनाओं को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है. यही एक बड़ी वजह रही है, जिसके कारण अगस्त, 2019 की शुरुआत से भारत के साथ सैन्य गतिरोध जारी है.

एक शीर्ष वैश्विक विशेषज्ञ ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के सैटेलाइट चित्रों का अध्ययन कर ये जानकारी दी है.

द इंडिया केबल के लिए सुशांत सिंह को दिए एक इंटरव्यू में जीओस्पेशियल (geospatial) इंटेलिजेंस फर्म हॉकआई 360 में मिशन एप्लीकेशंस के निदेशक क्रिस बिगर्स ने कहा कि गलवान, गोगरा और पैंगोंग झील क्षेत्र से सैन्य वापसी की आधिकारिक घोषणा के बावजूद चीनी सेना सीमा पर पीछे नहीं हटी है.

मई 2020 से भारत और चीन के बीच एलएसी पर पूर्वी लद्दाख में कई बिंदुओं पर तनावपूर्ण सैन्य गतिरोध चल रहा है.

भारत ने दावा किया है कि चीन ने सीमा समझौतों का उल्लंघन करते हुए सीमा के पास सैन्य बल और उपकरण जमा किए हैं. भारत ने यह भी कहा है कि चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सेना को उसके नियमित गश्त स्थान पर जाने से रोका जा रहा है.

लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून 2020 को हुई झड़प के दौरान भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे. बाद में चीन ने भी स्वीकार किया था कि इस घटना में उसके पांच सैन्य अधिकारियों और जवानों की मौत हुई थी. करीब 45 सालों में भारत-चीन सीमा पर हुई यह सबसे हिंसक झड़प थी.

तब से, राजनयिक और सैन्य स्तर की कई वार्ताएं हुई हैं, जिसके कारण दोनों ओर की सेना अपने-अपने स्थान पर लौटी है. हालांकि एक प्रमुख क्षेत्र- देपसांग मैदान को लेकर अभी भी गतिरोध जारी है. यहां पर चीन ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है.

बिगर्स, जो पहले यूएस नेशनल जिओस्पेशियल-इंटेलिजेंस एजेंसी में खुफिया अधिकारी थे, ने कहा कि ऐसे कई साक्ष्य सामने आए हैं, जो ये दर्शाते हैं कि चीन सीमा पर तैयारी कर रहा है.

उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी सेना के लिए सीमा पर निर्माण गतिविधियों में अगस्त, 2019 से तेजी लाई है. यह वही समय है जब भारत सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रवाधानों को निरस्त कर पूर्व राज्य जम्मू और कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था.

बिगर्स ने कहा कि इस बात की संभावना है कि चीन ने इसी फैसले को बाद अपनी आक्रामता में तेजी लाई है.

अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने के बाद से चीन इस बात को लेकर विरोध कर रहा है कि लद्दाख को एक अलग केंद्रशासित प्रदेश में बनाना उसे ‘अस्वीकार्य’ है और यह सीधे तौर पर उसकी संप्रभुता के लिए खतरा है.

बिगर्स ने कहा कि इस बात की पूरी तरह से पुष्टि नहीं की जा सकती है कि पूर्वी लद्दाख में चीन की गतिविधियां अनुच्छेद 370 की वजह से हो रही हैं.

उन्होंने कहा, ‘हालांकि, गतिरोध के दौरान चीनी अधिकारियों द्वारा दिए गए बयानों में चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता की सुरक्षा पर जोर दिया गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के चलते उन्हें खतरा है.’

कैलाश रेंज, पैंगोंग त्सो और गोगरा में सेनाओं द्वारा पीछे हटने के बारे में पूछे जाने पर बिगर्स ने कहा कि इसके ठीक-ठाक परिणाम देखने को मिले हैं.

उन्होंने कहा इन क्षेत्रों में भारत और चीनी सेनाओं के बीच 100 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन सिरजाप, खुर्नाक फोर्ट और न्याग्जू में चीन की पिपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) है.

विशेषज्ञ ने कहा कि इन क्षेत्रों में निर्माण का यह भी मतलब है कि चीनी सेना उस स्थान पर तेजी से वापस लौट सकती है, जहां उसने पहले कब्जा किया था.

उन्होंने कहा कि सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि श्रमिकों ने रुतोग के दो नए गैरीसन और प्रीफ़ैब हाउसिंग क्षेत्र के पास सैन्य उपकरणों को कवर करने के लिए शेल्टर्स बनाए हैं, जहां चीनी सेना पूरी सर्दियों भर रह सकती है.

बिगर्स ने कहा कि जी219-एस520 जंक्शन के पास पूर्वोत्तर में भी नई गतिविधियां हुई हैं, जहां सड़क बनाने और डुओमा (रुतोग के उत्तर-पूर्व) में नए हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य देखा गया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)