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आईटीबीपी की चौकी के ख़राब निर्माण पर मंत्रालयों के बीच गतिरोध, सीवीसी ने जांच शुरू की

आईटीबीपी की शिकायत के बाद केंद्रीय सतर्कता आयोग ने लद्दाख में पैंगोग त्सो नदी के पश्चिमी तट पर उनकी चौकी के ख़राब निर्माण को लेकर गृह और जल संसाधन मंत्रालय के बीच तनातनी पर संज्ञान लिया है. बताया गया है कि राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से हुआ यह निर्माण कसौटी पर ख़रा नहीं उतरा है.

लद्दाख की ओर जाने वाला राजमार्ग (फोटोः रॉयटर्स)

नई दिल्लीः केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने लद्दाख में पैंगोग त्सो नदी के पश्चिमी तट पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की चौकी के खराब निर्माण को लेकर गृह और जल संसाधन मंत्रालयों के बीच तनातनी पर संज्ञान लिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि आईटीबीपी की शिकायत के बाद सीवीसी ने इस महत्वाकांक्षी सीमा संरचना परियोजना की जांच शुरू कर दी है.

दरअसल इस परियोजना पर लगभग 20 करोड़ रुपये के खर्च के बावजूद इसे बनाने वाला राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम लिमिटेड (एनपीसीसी) कसौटी पर खरा नहीं उतरा और यह परियोजना विवाद में आ गई.

बता दें कि देश की पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिसबलों में से एक आईटीबीपी हैं, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत है. वहीं, एनपीसीसी जल संसाधन मंत्रालय के तहत आने वाला सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) है.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सीवीसी की तकनीकी ऑडिट टीम ने कुछ महीने पहले लद्दाख में संबंधित सीमा चौकी (बीओपी) का दौरा किया था. परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया गया था और मौजूदा समय में इनकी जांच चल रही है.’

एनपीसीसी से जुड़े सूत्रों ने पुष्टि की कि सीवीसी टीम ने इस परियोजना का निरीक्षण करने के लिए लद्दाख का दौरा किया था.

एनपीसीसी अधिकारी ने कहा, ‘वे जो कुछ भी चाहते थे, हमने उन्हें सौंप दिया है. हम इस परियोजना की सीवीसी जांच चाहते हैं. दोनों मंत्रालयों के बीच हुई कई बैठकों के बावजूद यह गतिरोध सुलझा नहीं है.’

सूत्रों ने बताया है कि एनपीसीसी ने गृह मंत्रालय को सलाह दी थी कि अगर वह इस काम से संतुष्ट नहीं है तो वह परियोजना को पूरा करने के लिए किसी अन्य एजेंसी को हायर कर सकते हैं.

बता दें कि पैगोंग झील के पश्चिमी तट के लुकुंग पर बना यह बीओपी सवालों के घेरे में है. इस अखबार ने 19 सितंबर को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि यह परियोजना 2015 में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत-तिब्बत सीमा पर जवानों के लिए रहने योग्य बेहतर स्थिति प्रदान कराना है.

बीओपी क्षेत्र की अपनी तरह की पहली संरचना मानी जा रही है, जिसमें कई सुविधाएं हैं.

इस परियोजना को ऐसे समय में सीमावर्ती जवानों के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जब चीन की तरफ से बुनियादी ढांचा भारत की तुलना में कई वर्ष आगे है.

यह परियोजना एनपीसीसी को दी गई थी लेकिन पांच साल बाद इस पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद आईटीबीपी ने इसे असफल घोषित कर दिया.

आईटीबीपी और गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बीओपी 10-11 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान बनाए रखने में असमर्थ है और निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब है कि बीओपी में रहे 40 जवानों को उन संरचनाओं की याद आने लगी, जहां वे पहले रहते थे.

सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्रालय इससे इतना नाखुश है कि उसने न सिर्फ इस परियोजना के लिए एनपीसीसी को आंशिक भुगतान दिया है बल्कि इस परियोजना को ही छोड़ने पर विचार कर रहा है.

वहीं, एनपीसीसी ने इस परियोजना की असफलता के लिए आईटीबीपी और गृह मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि भुगतान रोकने से सब-कॉन्ट्रै्क्टर हीटिंग सिस्टम को बनाए नहीं रख सके, जिससे बीओपी की क्षमता प्रभावित हुई है.