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राष्ट्रपति भवन का सीबीआई, ईडी प्रमुखों के कार्यकाल विस्तार से जुड़ी जानकारी देने से इनकार

राष्ट्रपति ने सीबीआई और ईडी प्रमुखों का कार्यकाल विस्तार दो साल से बढ़ाकर पांच साल करने वाले अध्यादेशों  को 14 नवंबर को मंज़ूरी दी थी. राष्ट्रपति सचिवालय ने आरटीआई के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी मुहैया कराने से इनकार कर दिया कि आख़िर ये अध्यादेश किस आधार पर लाए गए थे.

राष्ट्रपति भवन. (फोटो: राष्ट्रपति सचिवालय वेबसाइट)

नई दिल्लीः राष्ट्रपति भवन (राष्ट्रपति सचिवालय) ने आरटीआई के जरिये मांगी गई यह जानकारी मुहैया कराने से इनकार कर दिया है कि आखिर किस आधार पर अध्यादेश लाए गए, जिनके जरिये केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के प्रमुखों का कार्यकाल विस्तार किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज द्वारा दायर सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में राष्ट्रपति भवन ने कहा, ‘उक्त मांगी गई जानकारी मुहैया नहीं कराई जा सकती क्योंकि इसमें कैबिनेट नोट शामिल हैं, जिसे आरटीआई अधिनियम की धारा आठ (1Xi) के तहत जानकारी के खुलासे से छूट दी गई है.’

भारद्वाज ने यह आरटीआई याचिका दोनों अध्यादेश केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) अध्यादेश 2021 और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (संशोधन) अध्यादेश 2021 को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के सिर्फ 12 दिन बाद 26 नवंबर को दायर की थी.

इन अध्यादेशों के जरिये सीबीआई और ईडी निदेशकों का कार्यकाल बढ़ाकर पांच साल तक कर दिया गया है.

भारद्वाज ने अपनी याचिका में कहा, ‘भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123(1) के अनुसार संसद को दोनों सदनों के सत्र को छोड़कर अगर किसी भी समय में राष्ट्रपति संतुष्ट है कि मौजूदा परिस्थितियां इस तरह की हैं, जिसके लिए तत्काल कोई कदम उठाना जरूरी है तो वह (राष्ट्रपति) इस तरह के अध्यादेशों को मंजूरी दे सकते हैं.’

भारद्वाज ने इस संबंध में सभी रिकॉर्डों, सामग्री, सूचना और तथ्यों की कॉपी की मांग की थी, जिनके आधार पर राष्ट्रपति ने इन अध्यादेशों को मंजूरी दी.

भारद्वाज द्वारा पूछे गए सवाल पर राष्ट्रपति सचिवालय के सीपीआईओ ने 20 दिसंबर को दिए जवाब में कहा कि यह जानकारी मुहैया नहीं कराई जा सकती क्योंकि इसमें कैबिनेट नोट भी शामिल है, जो आरटीआई अधिनियम की धारा आठ (1Xi)  के तहत जानकारी को उजागर करने से छूट है.

ईडी निदेशक का कार्यकाल विस्तार

इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारद्वाज ने कहा कि उनके द्वारा मांगी गई जानकारी विशेष रूप से प्रासंगिक और जनहित में है क्योंकि ऐसा लगता हैकि सीवीसी अधिनियमें संशोधन कर लाए गए अध्याधेश को ईडी के निवर्तमान निदेशक एसके मिश्रा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले बढ़ाने के लिए लाया गया.

दरसअल मिश्रा का कार्यकाल 18 नवंबर 2021 को समाप्त हो रहा था.

ईडी निदेशक के कार्यकाल में विस्तार को मंजूरी देने के लिए सीवीसी अधिनियम में संशोधन कर 14 नवंबर को इस अध्यादेश को मंजूरी देने के बाद भारद्वाज ने इस अधिनियम को मंजूरी देने के तीन दिन बाद ईडी निदेशक का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया.

यह सुप्रीम कोर्ट के हाल के एक आदेश की अवहेलना है, जिसमें अदालत ने कहा था कि मिश्रा का कार्यकाल विस्तार नहीं किया जाना चाहिए.
भारद्वाज ने इसका उल्लेख कर कहा कि यह ध्यान देने योग्य है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद यह अध्यादेश और आदेश दिए गए.

जानकारी का खुलासा नहीं करने के खिलाफ अपील

आरटीआई के तहत जानकारी मुहैया नहीं कराने पर भारद्वाज ने कहा कि वह इस फैसले को चुनौती देंगी.

उन्होंने कहा, ‘आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) के तहत मंत्रिपरिषद, सचिवों और अन्य अधिकारियों के विचार-विमर्श के रिकॉर्ड सहित कैबिनेट नोट की जानकारी मुहैया कराने से छूट है लेकिन सिर्फ तब तक जब तक यह मामला विचाराधीन हो या पूरा नहीं हुआ हो. हालांकि, अध्यादेशों का मामला पूरा होने के बाद इससे जुड़ी जानकारी मांगी गई थी. इन अध्यादेशों को मंजूरी मिल गई थी और ये आधिकारिक गजट में प्रकाशित हो गए थे और 14 नवंबर 2021 से प्रभावी भी हो गए थे.’

भारद्वाज ने कहा, ‘किसी भी मामले में आरटीआई अधिनियम के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत रिकॉर्ड को सिर्फ इसलिए उजागर नहीं किया जाता कि इसमें कुछ हिस्सा ऐसा है, जिसे लेकर लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) का मानना है इसे अधिनियम की धारा आठ के तहत छूट प्राप्त है. इस तरह के मामलों में पीआईओ को गैर छूट वाले हिस्से को उजागर करना चाहिए.’