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हैदरपोरा मुठभेड़: आमिर की मां ने ख़ुदकुशी की धमकी दी, परिवार ने पुलिस जांच को ख़ारिज किया

बीते 15 नवंबर को हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में से एक आमिर मागरे के माता-पिता ने पुलिस की उस जांच को ख़ारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उनके बेटे आतंकी थे. इसके अलावा इस गोलीबारी में एक आतंकी सहित जिन लोगों की मौत हुई उनमें शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मालिक मोहम्मद अल्ताफ़ भट और दंत चिकित्सक डॉ. मुदसिर गुल शामिल हैं.

हैदरपोरा एनकाउंटर में मारे गए आमिर मागरे की मां (बीच में). (फोटो: आदिल अब्बास/द वायर)

रामबन/जम्मू: जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में से एक आमिर मागरे के माता-पिता ने बीते बुधवार को पुलिस की उस जांच को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उनका बेटा आतंकवादी था.

आमिर की मां ने अपनी जान लेने की धमकी दी, जबकि परिवार ने उनका शव पाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है.

हैदरपोरा मुठभेड़ की जांच कर रहे जम्मू कश्मीर पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बीते 28 दिसंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा था कि एक विदेशी आतंकवादी ने एक नागरिक को मार डाला, जबकि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का मालिक और एक स्थानीय आतंकवादी (आमिर मागरे) की गोलीबारी में मौत हो गई.

इसके अलावा इस गोलीबारी में मारे गए लोगों में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मालिक मोहम्मद अल्ताफ भट और दूसरे दंत चिकित्सक डॉ. मुदसिर गुल शामिल हैं. गुल जमीन दिलाने वाले ब्रोकर के रूप में भी काम करते थे और उनका ऑफिस भट के कॉम्प्लेक्स में ही था.

मालूम हो कि हैदरपोरा इलाके में बीते 15 नवंबर को मुठभेड़ में एक पाकिस्तानी आतंकवादी एवं तीन अन्य व्यक्ति मारे गए थे. पुलिस ने दावा किया था कि मारे गए सभी व्यक्तियों का आतंकवाद से संबंध था.

हालांकि इन तीन व्यक्तियों के परिवारों ने दावा किया था कि वे बेगुनाह थे और उन्होंने इस मुठभेड़ में गड़बड़ी का आरोप लगाया था. उसके बाद पुलिस ने जांच का आदेश दिया था. उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा भी मामले में अलग से एक मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं.

आमिर की मां मुबीना ने अपने 3.42 मिनट के वीडियो में एसआईटी के बयान को पूरी तरह निराधार करार दिया और कहा कि परिवार को पांच दिन में दफनाने के लिए उसका शव नहीं दिया गया तो वह अपनी जिंदगी खत्म करने के लिए जहर खा लेंगी.

मुबीना ने कहा, ‘उन्होंने मेरे मासूम बेटे को मार डाला है जो मजदूरी करके जीवनयापन कर रहा था और उन्होंने उस पर झूठे आरोप लगाए हैं. वे अपने प्रचार के लिए ऐसा कर रहे हैं. पांच दिनों के भीतर शव नहीं लौटाने पर मैंने जहर खाकर अपनी जान देने का फैसला किया है. सरकार और मेरे बेटे पर आरोप लगाने वाले मेरी मौत के लिए जिम्मेदार होंगे.’

उन्होंने कहा, ‘मैं अपने बेटे को जानती हूं, क्योंकि मैंने उसे घोर गरीबी में पाला है. वह एक विनम्र लड़का था और पूरा गांव उसकी मौत का शोक मना रहा है. वे हमें पुलिसकर्मियों को तैनात करके विरोध करने की भी अनुमति नहीं दे रहे हैं.’

मुबीना ने कहा कि वह मुठभेड़ के बाद से शव की वापसी का इंतजार कर रही हैं और अपने बेटे को आखिरी बार देखना चाहती हैं.

आमिर के पिता मोहम्मद लतीफ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय का रुख कर अपने पुत्र का शव लौटाने का अनुरोध करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘मैं पुलिस जांच को पूरी तरह से खारिज करता हूं, क्योंकि मेरा बेटा कभी भी आतंकवादी या उसका समर्थक नहीं हो सकता.’

लतीफ को 2007 में लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकवादी को मारने के लिए राज्य पुरस्कार मिला है. इसके अलावा अपने गूल-संगलदान ब्लॉक से आतंकवाद के सफाए के लिए सुरक्षा बलों की मदद को लेकर भी उन्हें कई प्रशंसा पत्र मिले हैं.

लतीफ ने कहा कि वह अपने बेटे का शव लौटाए जाने के लिए वकील दीपिका सिंह राजावत के जरिये उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर रहे हैं.

राजावत ने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और वे शव की वापसी के लिए बृहस्पतिवार सुबह रजिस्ट्री को याचिका देंगे.

मालूम हो कि बीते नवंबर माह में व्यापारी मोहम्मद अल्ताफ भट (शॉपिंग कॉम्प्लेक्स मालिक), दंत चिकित्सक डॉ. मुदसिर गुल (किरायेदार) और आमिर मागरे (गुल के साथ कथित तौर पर काम करने वाला लड़का) के परिवार के सदस्य पुलिस मुठभेड़ में उनकी मौत के खिलाफ प्रदर्शन किया था.

पुलिस ने मुठभेड़ में मारे गए तीनों लोगों को कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा इलाके में दफना दिया था, लेकिन भट और गुल के शव तीन दिन बाद उनके परिवारों को वापस कर दिए गए थे.

कुछ दिन पहले ही नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और इस मुठभेड़ में मारे गए तीन व्यक्तियों के रिश्तेदारों ने जम्मू कश्मीर प्रशासन से घटना की मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था.

इस एनकाउंटर की जांच कर रहे एसआईटी प्रमुख डीआईजी सुजीत के. सिंह ने बीते 28 दिसंबर को सुरक्षा बलों को वस्तुत: क्लीन चिट दे दी, लेकिन कहा कि अगर कोई अन्य सबूत सामने आता है तो टीम अपने निष्कर्षों की समीक्षा करने के लिए तैयार है.

सिंह ने श्रीनगर में पत्रकारों से कहा था, ‘हमारी अब तक की जांच से पता चला है कि डॉ. मुदसिर गुल को इमारत के अंदर छिपे विदेशी आतंकवादी ने मार दिया था, क्योंकि उनका शव छत से बरामद किया गया था. सुरक्षा बल तलाशी या उसके बाद के छत पर नहीं गए थे.’

जांच का विवरण देते हुए सिंह ने कहा था कि जांच से पता चला है कि डॉ. गुल के कर्मचारी आमिर मागरे का विदेशी आतंकवादी बिलाल भाई के साथ घनिष्ठ संबंध था, जो भागने की कोशिश में मारा गया था.

उन्होंने कहा था, ‘मोहम्मद अल्ताफ भट (शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मालिक) और आमिर सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में फंस जाने से मारे गए, क्योंकि उन्हें विदेशी आतंकवादी ने मानव ढाल (Human Shield) के रूप में इस्तेमाल किया. यह इस बात से पुष्ट होती है कि अल्ताफ का शव दरवाजे के बाहर मिला (उसे गोलियां लगी थीं) तथा आमिर कुछ और कदम तक जा पाया था. विदेशी आतंकवादी का शव 83 फुट दूर मिला था.’

मकान मालिक की बेटी सहित गवाहों ने हालांकि विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर दावा किया था कि उसके पिता और अन्य लोगों को सेना और पुलिस कर्मियों ने घर में धकेल दिया था और इसे एक हत्या करार दिया.

‘कयास आधारित’ टिप्पणी को लेकर एसआईटी ने क़ानूनी कार्रवाई की धमकी दी

हैदरपोरा मुठभेड़ की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जम्मू कश्मीर में उन राजनेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो जांच के बारे में कयास आधारित टिप्पणी कर रहे हैं.

पुलिस द्वारा जारी एक बयान में एसआईटी अध्यक्ष ने कहा कि जांच दल को सोशल मीडिया पर कुछ राजनीतिक नेताओं और परिवार के सदस्यों द्वारा एसआईटी द्वारा अब तक हासिल किए गए सबूतों पर संदेह जताने वाले पोस्ट मिले हैं.

इसमें कहा गया, ‘इन लोगों ने इसे ‘मनगढ़ंत बनावटी कहानी’, ‘सजावटी जांच’, ‘हत्यारों को क्लीन चिट’, ‘पुलिस की कल्पना’ आदि कहने की कोशिश की है.’

बयान में अध्यक्ष ने कहा, ‘राजनीतिक नेताओं के इस तरह के कयास आधारित बयानों से आम जनता या समाज के वर्ग विशेष के बीच उत्तेजना, अफवाह, भय और खतरा पैदा करने की प्रवृत्ति होती है. इस तरह का दृष्टिकोण कानून के शासन के खिलाफ है और कानून के तहत परिकल्पित उचित दंड प्रावधानों को आकर्षित कर सकता है.’

बयान में कहा गया कि सरकार ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं और बयान देने वाले ऐसे सभी लोगों को पुष्टि या विरोधाभास के लिए अपने पास मौजूद वास्तविक सबूतों के साथ जांच अधिकारी से संपर्क करना चाहिए था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)