भारत

एफ़आईआर और एसआईटी जांच के विरोध में ‘​हरिद्वार धर्म संसद’ के आयोजक ‘प्रतिकार सभा’ करेंगे

बीते दिसंबर महीने में हरिद्वार में आयोजित ‘धर्म संसद’ में कथित तौर मुस्लिमों के खिलाफ नफरत भरे बयान देने के अलावा उनके नरसंहार का आह्वान किया था. इस मामले में क​ट्टर हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद समेत कई अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर मामले की एसआईटी जांच के आदेश दिए गए हैं. इस बीच यूपी के अलीगढ़ में प्रस्तावित ‘धर्म संसद’ पर रोक लगाने की मांग की गई है.

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया. (फोटो साभार: फेसबुक)

देहरादून/अलीगढ़: बीते दिसंबर महीने में उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में कट्टर हिंदुत्ववादी संगठनों की ओर से आयोजित ‘धर्म संसद’ में कथित तौर मुस्लिमों के खिलाफ नफरत भरे बयान देने के अलावा उनका नरसंहार किए जाने का आह्वान किया था.

इस संबंध में उत्तराखंड की हरिद्वार पुलिस ने केस दर्ज किया था और मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है. इस जांच और एफआईआर के विरोध में ‘धर्म संसद’ के आयोजकों ने आगामी 16 जनवरी को एक ‘प्रतिकार सभा’ का आयोजन करने की घोषणा की है.

इस बीच उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में 22 जनवरी को प्रस्तावित ‘धर्म संसद’ का मामला गर्म होता जा रहा है और कुछ स्थानीय नागरिकों ने सरकार से इसके आयोजन पर रोक लगाने की मांग की है.

हरिद्वार धर्म संसद के आयोजकों ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ एफआईआर इसलिए दर्ज की गई, क्योंकि उत्तराखंड सरकार ‘जिहादियों’ से डरी हुई है.

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा इस ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया, जिसमें मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ खुलकर नफरत भरे भाषण (हेट स्पीच) दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया था.

कार्यक्रम के आयोजकों में से एक यति नरसिंहानंद ने मुस्लिम समाज के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए कहा था कि वह ‘हिंदू प्रभाकरण’ बनने वाले व्यक्ति को एक करोड़ रुपये देंगे.

इस आयोजन का वीडियो वायरल होने पर मचे विवाद के ​बाद 23 दिसंबर 2021 को इस संबंध में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें सिर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था. इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने से पहले त्यागी का नाम वसीम रिजवी था.

प्राथमिकी में 25 दिसंबर 2021 को बिहार निवासी स्वामी धरमदास और साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ पूजा शकुन पांडेय के नाम जोड़े गए. पूजा शकुन पांडेय निरंजिनी अखाड़े की महामंडलेश्वर और हिंदू महासभा के महासचिव हैं.

इसके बाद बीते एक जनवरी को इस एफआईआर में यति नरसिंहानंद और रूड़की के सागर सिंधुराज महाराज का नाम शामिल किया गया था.

बीती दो जनवरी को राज्य के पुलिस महानिदेशक ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया था. उसके बाद बीते तीन जनवरी को धर्म संसद के संबंध में 10 लोगों के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की गई थी.

दूसरी एफआईआर में कार्यक्रम के आयोजक यति नरसिंहानंद गिरि, जितेंद्र नारायण त्यागी (जिन्हें पहले वसीम रिज़वी के नाम से जाना जाता था), सागर सिंधुराज महाराज, धरमदास, परमानंद, साध्वी अन्नपूर्णा, आनंद स्वरूप, अश्विनी उपाध्याय, सुरेश चव्हाण और प्रबोधानंद गिरि को नामजद किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इन मामलों के संबंध में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया.

पहली और दूसरी एफआईआर में नामित लोगों में से एक साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ ​​​​पूजा शकुन पांडेय ने कहा, ‘हमने सभी हिंदुओं और संतों से 16 जनवरी को सभा में शामिल होने का आह्वान किया है. हमने अपनी आत्मरक्षा के लिए काम करने के लिए धर्म संसद का आयोजन किया था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘केवल हरिद्वार में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में भीड़ है. वे हमें और हिंदुओं को धमकाते रहते हैं. वे हमारी गिरफ्तारी और फांसी की मांग कर रहे हैं. ‘प्रतिकार सभा’ ​​हमारे खिलाफ दर्ज एफआईआर का विरोध है. उत्तराखंड सरकार दबाव में काम कर रही है. वे पक्षपाती हैं. एफआईआर और एसआईटी की कोई आवश्यकता नहीं थी, जैसे हम आतंकवादी हैं.’

पांडेय ने कहा कि प्रतिकार सभा का आयोजन हरिद्वार के बैरागी कैंप में किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘दिसंबर में धर्म संसद में भाग लेने वाले और 21 लोगों की हमारी कोर कमेटी के इस सभा में मौजूद रहने की उम्मीद है.’

देवप्रयाग (टिहरी गढ़वाल जिले) और रूड़की में श्री कृष्ण प्रणामी कल्याण आश्रम चलाने वाले और दोनों एफआईआर में नामजद सागर सिंधुराज महाराज ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार दबाव में काम कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘यह सभा हरिद्वार में एक विशाल रैली के रूप में होगी. यह जिहादियों के आतंक के तहत उत्तराखंड और अन्य सरकारों द्वारा किए गए कार्यों के खिलाफ है. वे नियमित रूप से संतों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रहे हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘उन लोगों ने अकारण हमारे खिलाफ एसआईटी का गठन किया. हालांकि, जिहाद फैलाने के लिए कुरान और मुसलमानों के खिलाफ हमारी शिकायत पर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री (पुष्कर सिंह धामी) जिहादियों से डरे हुए हैं.’

हरिद्वार में उनके खिलाफ एफआईआर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें केस दर्ज ​किए जाने के संबंध में कोई जानकारी या नोटिस नहीं दिया गया है.

उन्होंने कहा, ‘मुझे अपने खिलाफ दर्ज मामले की जानकारी भी नहीं है. पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी ने मुझे एफआईआर के बारे में सूचित नहीं किया और न ही कोई नोटिस दिया है. मेरे पास केवल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी आई है.’

प्रतिकार सभा के आयोजन के संबंध में डीआईजी हरिद्वार योगेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उन्हें अब तक 16 जनवरी के कार्यक्रम के बारे में सूचित नहीं किया गया है.

रावत ने कहा, ‘मुझे मीडिया के माध्यम से इसके बारे में पता चला. यदि वे सभी कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन करते हैं, तो उन्हें पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, कोविड-19 के संबंध में हर दिन नए निर्देश आ रहे हैं और तब तक नियम और दिशा-निर्देश बदल सकते हैं.’

अलीगढ़ में ‘धर्म संसद’ के आयोजन को रोकने की मांग की

इधर, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में आगामी 22 जनवरी को प्रस्तावित ‘धर्म संसद’ का मामला सरगर्म होता जा रहा है और कुछ स्थानीय नागरिकों ने सरकार से इसके आयोजन को रोकने की मांग की है.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सलमान इम्तियाज ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हाल में हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में हुए ‘धर्म संसद’ में हुए कथित घृणा भाषणों से माहौल खराब हुआ है और अब अलीगढ़ में 22 और 23 जनवरी को ‘धर्म संसद’ के आयोजन की तैयारियां हो रही हैं.

उन्होंने कहा कि यह चुनाव के समय माहौल खराब करने की सोची-समझी साजिश है और प्रशासन को इस पर रोक लगानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि अलीगढ़ में होने वाले ‘धर्म संसद’ में भी कथित भड़काऊ भाषण होने की पूरी आशंका है. इससे सांप्रदायिक लिहाज से संवेदनशील अलीगढ़ में माहौल खराब होगा.

इम्तियाज ने दावा किया कि वह इस मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें घर में नजरबंद कर दिया. उन्होंने कहा कि यह उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है.

गौरतलब है कि अलीगढ़ स्थित सनातन हिंदू सेवा संस्थान ने आगामी 22-23 जनवरी को नौरंगाबाद स्थित सनातन भवन में ‘सनातन धर्म संसद’ के आयोजन का ऐलान किया है. हालांकि, जिला प्रशासन ने ऐसे किसी भी कार्यक्रम की जानकारी होने से इनकार किया है.

आयोजक संस्था के व्यवस्थापक अशोक पांडे ने बताया कि उनका संगठन ‘वर्तमान राजनीति में संतों की भूमिका’ विषय पर ‘सनातन धर्म संसद’ आयोजित करेगा और इसके लिए समय आने पर प्रशासन से अनुमति ली जाएगी.

संस्थान में कार्यक्रम के सिलसिले में जारी पोस्टर में मुख्य वक्ताओं के तौर पर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि, भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती की तस्वीरें लगाई गई हैं.

इस बारे में जब अलीगढ़ के अपर जिला अधिकारी नगर राकेश कुमार पटेल से संपर्क किया गया तो उन्होंने ऐसे किसी भी कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया. उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में अभी तक कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया है.

इससे पहले इम्तियाज की अगुवाई में नागरिकों के एक समूह ने पुराने शहर के अपर कोट इलाके में सिटी मजिस्ट्रेट को दिए गए ज्ञापन में राष्ट्रपति से पिछले महीने हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में मुसलमानों का संहार करने के आह्वान पर चिंता जाहिर करते हुए आरोप लगाया था कि केंद्र और राज्य सरकारें इस मामले पर जरूरी संज्ञान नहीं ले रही हैं.

ज्ञापन में कहा गया था कि धर्म संसद में हुई बयानबाजी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और सरकारों का इस मामले पर रुख बेहद निराशाजनक है, लिहाजा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस मामले में हस्तक्षेप करें.

ज्ञापन में कहा गया कि अगर धर्म संसद में आपत्तिजनक बयानबाजी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इससे देश की शांति खतरे में पड़ जाएगी.

हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए इम्तियाज ने पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से अलीगढ़ में ‘धर्म संसद’ के आयोजन की तैयारियों का खुलकर विरोध करने और इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का आह्वान करते हुए यह भी कहा कि सभी शांतिप्रिय लोग एकजुट होकर धर्म संसद के आयोजन को रोकें.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)