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आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया अधूरी, नई सोच की ज़रूरत: मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विश्लेषण को येचुरी ने बताया जुमलानॉमिक्स. ग़ुलाम नबी आज़ाद बोले, मोदी टीवी के प्रधानमंत्री, हमारे प्रधानमंत्री ज़मीनी थे.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो: रॉयटर्स)

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली/बेंगलुरु: गिरती विकास दर और खराब अर्थव्यवस्था के आंकड़ों के बीच केंद्र सरकार और विपक्ष में घमासान छिड़ा हुआ है. एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को यह बताने की कोशिश की कि अर्थव्यवस्था सही ढंग से चल रही है, नकारात्मक सोच के लोग आलोचना कर रहे हैं तो दूसरी तरफ विपक्ष ने अपने हमले तेज कर दिए हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा कि आर्थिक सुधारों की जिस प्रक्रिया से वे जुड़े हुए थे वह अब भी अधूरी है और देश की सामाजिक व आर्थिक नीति के नए डिजाइन के लिए नई सोच की जरूरत है.

वे बेंगलुरु में डॉ बीआर अंबेडकर स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधारों की जिस प्रक्रिया से वह जुड़े थे वह सामाजिक व आर्थिक तौर पर वंचित लोगों के लिए नए अवसर प्रदान करने पर केंद्रित थी. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी अधूरी है और हमें नई सोच की जरूरत है.

सिंह को भारत में आर्थिक उदारीकरण प्रक्रिया का प्रणेता माना जाता है, जिसकी शुरुआत 1991 में हुई थी. उन्होंने कहा कि नीति ऊंची आर्थिक वृद्धि दर तथा आर्थिक असमानता पर काबू पाने के दोहरे लक्ष्यों का समुचित मिश्रण होना चाहिए.

भाजपा के प्रधानमंत्री टेलीविजन वाले हैं: आजाद

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष ग़ुलाम नबी आजाद ने बुधवार को मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के प्रधानमंत्री टेलीविजन वाले हैं, जबकि हमारे प्रधानमंत्री जमीन से जुड़े थे.

आजाद ने कहा कि आपके प्रधानमंत्री टीवी पर आते हैं और कहते हैं कि हमने 70 साल में क्या किया. वर्तमान में हम 120 करोड़ आबादी के लिए अनाज पैदा करते हैं जबकि आजादी से पहले 20 करोड़ लोगों के लिए भी अनाज नहीं था. चालीस के दशक में आये बंगाल के अकाल में 10 लाख लोग मारे गए थे, जबकि आज देश में कोई भूखा नहीं मरता है.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा विदेश को चावल आदि चीजें बेचते हैं. यह हमने 70 सालों में किया है. आप तो केवल टीवी के प्रधानमंत्री हैं. हमारे प्रधानमंत्री तो जमीन के प्रधानमंत्री थे.

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्मशताब्दी पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इंदिरा जी ने 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीकरण किया. आप ऋण देश के किसानों और युवाओं को दें, तब किसान और युवा आगे बढ़ेगा. इससे पहले यह बैंक केवल पूंजीपतियों को ऋण देते थे.

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने दस करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था. लेकिन 10 करोड़ युवाओं का रोजगार तो देश में आया नहीं. उसके उल्टा 15 करोड़ लोगों का रोजगार चला गया. जो कपड़े बदन पर थे वह भी उतर गए. इसलिए आज पूरे देश में त्राहि-त्राहि हो रही है.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी एवं जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि प्रधानमंत्री गरीब आदमी बना, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति गरीब आदमी बना. यह अच्छी बात है. लेकिन गरीब से अमीर होना बड़ी बात नहीं है. अमीर से गरीब होना बड़ी बात है. महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरु के पास गाड़ी, बंगला, पैसा सब कुछ था लेकिन फिर भी उन्होंने देश के लिए सब कुछ त्याग दिया. महात्मा गांधी शायद देश के पहले और आखिरी हिंदुस्तानी होंगे जिसने अमीर आदमी होते हुए भी सबसे कम कपड़े पहने.

मंदी का दौर सिर्फ एक तिमाही से नहीं है: येचुरी

माकपा ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विश्लेषण को जुमलानॉमिक्स करार देते हुए उनके द्वारा पेश आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं.

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने देश की अर्थव्यवस्था के बारे में बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी के विस्तृत वक्तव्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनके दावों को सवालों के घेरे में खड़ा किया. आर्थिक मंदी के बारे में मोदी के दावे को गलत बताते हुए उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में मंदी का दौर सिर्फ एक तिमाही से नहीं है बल्कि यह दौर पिछली छमाही से जारी है.

येचुरी ने ट्वीट कर कहा पीएम के जुमलानॉमिक्स भाषण में आरबीआई के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) अनुमान को 6.7 प्रतिशत से उन्होंने बदल कर 7.7 प्रतिशत कर दिया. भाषण में उनके द्वारा पेश आंकड़ों पर आप कैसे विश्वास कर सकते हैं.

उन्होंने अर्थव्यवस्था के हर मोर्चे पर सब कुछ ठीक होने के मोदी के दावों पर सवाल पूछा कि नोटबंदी से हुई तबाही तथा जीएसटी के कुप्रबंधन या अप्रत्यक्ष कर की ऊंची दर से हुए नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है.

येचुरी ने मोदी को बेरोजगारी के मामले में भी घेरते हुए पूछा कि आपने रोजगार के 10 करोड़ नये अवसर मुहैया कराने का वादा किया था जबकि भारत में लोग अपनी नौकरियां गंवा रहे हैं.

किसानों की बदहाली का जिक्र करते हुए येचुरी ने कहा कि अपना वाजिब हक मांगने वाले किसानों को गोली मारी जा रही है जबकि सांठगांठ करने वाले पूंजीपतियों का कर्ज आसानी से माफ हो जाता है.

हम छह महीने में कर देंगे किसान और रोजगार का समाधान: राहुल

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर किसान और रोजगार जैसे दो बडे़ मुद्दों का समाधान नहीं कर सकते तो कह दें, हम ये काम छह महीने में करके दिखा देंगे.

राहुल अपने लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र अमेठी के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं. प्रशासन ने पहले उनके दौरे की अनुमति नहीं दी थी लेकिन बाद में मंजूरी दे दी.

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने दौरे के पहले दिन जगदीशपुर के कठौरा गांव में चौपाल लगायी. राहुल ने कहा, दो मुद्दे हैं हिन्दुस्तान में, किसान और रोजगार का मसला. इनका समाधान सरकार को करना चाहिए. मोदी जी नहीं कर सकते तो कह दें कि वह नहीं कर सकते. कहें कांग्रेस पार्टी आ जाए और वो मेरा काम कर दे तो हम वो काम छह महीने के अंदर करके दिखा देंगे.

बेरोजगारी पर पीएम जवाब दें

उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देना सबसे अहम मुद्दा है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी रोजगार नहीं दे पाए. ये सच्चाई है और इसका पूरे देश को पता है कि मोदी ने कहा था कि दो करोड़ युवाओं को हर साल रोजगार मिलेगा. गुस्सा बढ़ता जा रहा है. युवा देश के लिए काम करना चाहते हैं लेकिन मौका ही नहीं है. किसान आत्महत्या कर रहे हैं तो इससे देश को फायदा नहीं है.

राहुल ने कहा कि मोदी ने स्वयं अमेठी में कहा कि दो करोड़ युवाओं को हर साल रोजगार देंगे. हिन्दुस्तान में हर रोज 30 हजार युवा रोजगार ढूंढने निकलते हैं लेकिन इनमें से केवल 450 लोगों को ही रोजगार मिलता है. भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग पहले इसका जवाब दें.

उन्होंने कहा कि हमारा मुकाबला चीन के साथ है. चीन और भारत की आबादी में ज्यादा फर्क नहीं है और दोनों ही बडे़ देश हैं. चीन में हर रोज 50 हजार नये युवाओं को रोजगार मिलते हैं लेकिन हिंदुस्तान में रोज केवल 450 युवा रोजगार पाते हैं. मोदी जी को देश का समय बर्बाद करना बंद करना चाहिए और युवाओं को रोजगार देना शुरू करना चाहिए.

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