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गुजरात: मीडिया कवरेज के लिए दलित युवक ने ख़ुद को ब्लेड से किया था घायल

मूंछ रखने को लेकर दलित युवक ने की थी हमले की बात. पुलिस और परिवार वालों सहित युवक ने ख़ुद माना है कि उसने मीडिया कवरेज के लिए यह हरकत की.

(कई दलितों ने इस तस्वीर को अपनी वॉट्सऐप प्रोफाइल पिक्चर बनाई थी)

(कई दलितों ने इस तस्वीर को अपनी वॉट्सऐप प्रोफाइल पिक्चर बनाई थी)

गुजरात के गांधीनगर जिले में बीते मंगलवार को लिंबोदरा गांव में एक 17 वर्षीय दलित युवक ने आरोप लगाया था कि मूंछ रखने के कारण कुछ अज्ञात लोगों ने उसकी पिटाई कर दी थी लेकिन अब पुलिस द्वारा दावा किया गया है कि दलित युवक ने झूठा आरोप लगाया था. 

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार एक प्रेस नोट में पुलिस ने दावा किया है कि दलित युवक ने खुद माना है कि उसने मीडिया कवरेज के लिए यह हरकत की. उसने यह भी माना कि ब्लेड से उस पर कोई हमला नहीं किया गया बल्कि यह हरकत उसने अपने दो नाबालिग दोस्तों के साथ मिलकर खुद की.

द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में गांधीनगर जिले के पुलिस अधीक्षक, वीरेंद्र सिंह यादव ने कहा, ‘हमनें तीन टीमें बनाकर जांच की. फोरेंसिक टीम को मौके से कोई ब्‍लेड नहीं मिला और जांचकर्ताओं को हमलावरों या वाहन का भी पता नहीं लगा. इलाके के लोगों ने हमें बताया कि उन्‍होंने कोई अपराध नहीं देखा, न ही चीखने की आवाज सुनी.’

इससे पहले भी इसी गांव में 25 सितंबर और 29 सितंबर को दो दलित युवकों की मूंछ रखने के चलते उच्च जाति के लोगों द्वारा कथित पिटाई की घटना सामने आई थी.

बीते मंगलवार को स्कूल से लौटने के वक्त हमले के आरोप के साथ इस नाबालिग लड़के ने यह भी बताया था कि पिछले महीने 25 सितंबर को भी उस पर इसी कारण से हमला हुआ था, जब वह अपने चचेरे भाई पीयूष परमार (24 वर्ष) के साथ था.

बीते 29 तिसंबर को इसी गांव में, 24 वर्षीय दलित युवक क्रुणाल महेरिया को कथित तौर पर मूंछ रखने के लिए पीटे जाने का मामला सामने आया था. दोनों मामलों में पीड़‍ितों का कहना था कि हमलावर ऊंची जाति के थे.

मामले में दो एफआईआर दर्ज हुईं और आरोपी जमानत पर बाहर हैं. 25 सितंबर को हुई घटना में परिवार वालों ने अपने बेटे का नाम नहीं दिया क्योंकि उन्हें उसके भविष्य के लिए डर था.

इस मामले में हुई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में किशोर के पिता भी पुलिस टीम के साथ मौजूद थे. पुलिस के प्रेस नोट में कहा गया है कि पिता ने माना है कि उनके बेटे से गलती हुई. एसपी यादव ने कहा, ‘इस मामले में एफआईआर फर्जी है… ये सब अभी बच्‍चे हैं और हम मामले को आगे बढ़ाकर उनका भविष्‍य नहीं बिगाड़ना चाहते.’

इंडियन एक्‍सप्रेस की खबर बताती है कि जब पत्रकार उस किशोर से मिलना चाहा तो उसकी मां उसे रसोई में खींच ले गई. मां ने कहा, ‘हम उसकी पढ़ाई बंद करा रहे हैं. उसने हमें शर्मिंदा किया है. हम उसे बाहर से परीक्षा दिलवाएंगे.’

उस नाबालिग लड़के ने भी कबूल किया कि ‘मैं किसी के दबाव में नहीं हूं. मैंने अपने दोस्‍तों की मदद से ऐसा किया. पता नहीं क्‍यों.’

घर की बैठक में बैठे किशोर के पिता ने कहा उनका बेटा 25 सितंबर को हुए मामले में गवाही जरूर देगा. उसने अपनी उम्र के चलते ये हरकत की है. जिन लड़कों ने इस मामले में उसकी मदद की वो यहीं घर के सामने ही रहते हैं. लेकिन जो दूसरा लड़का पीटा गया वह उसका चचेरा भाई है.

किशोर के पिता ने कहा, ‘हो सकता है कि ब्‍लेड वाला मामला फर्जी हो मगर बाकी दोनों मामले सच हैं. यहां तक कि मेरे बेटे को भी उसके चचेरे भाई के साथ पीटा गया.’