नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरी: ‘नगा मुद्दे पर ऐसा समझौता स्वीकार नहीं जिससे मणिपुर के हितों को चोट पहुंचे’

इस हफ़्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मिज़ोरम और त्रिपुरा के प्रमुख समाचार.

N Biren Singh PTI

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह. (फोटो: पीटीआई)

इम्फाल: मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा कि केंद्र और नगा विद्रोही गुट एनएससीएन आईएम (नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल आॅफ नगालैंड आइजक-मुइवा) के बीच जारी शांति वार्ता का जल्द समाधान समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र के हित में है लेकिन नगा मुद्दे से उनके प्रदेश की शांति प्रभावित नहीं होनी चाहिए.

सिंह ने कहा कि नगा मुद्दे पर ऐसा कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है जिससे मणिपुर के हितों को चोट पहुंचता हो. उन्होंने कहा कि राज्य के बड़े हिस्से में नगा लोग रहते हैं और इस मुद्दे पर वह झुकने वाले नहीं हैं.

उन्होंने कहा, हम हर उस मुद्दे का जल्द समाधान चाहते हैं जिससे लोग प्रभावित होते हैं. यही बात केंद्र और एनएससीएन आईएम के बीच हो रही बातचीत पर भी लागू होती है. सिंह केंद्र सरकार और एनएससीएन आईएम के बीच अगस्त 2015 में हुए प्रारूप समझौते पर राज्य सरकार की स्थिति पर जवाब दे रहे थे. अभी तक यह बातचीत किसी अंजाम पर नहीं पहुंची है.

अरुणाचल प्रदेश: वायुसेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, सात की मौत

नई दिल्ली: बीते छह अक्टूबर को भारतीय वायुसेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश के तवांग के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे उसमें सवार सात सैन्यकर्मियों की मौत हो गई. वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी.

अधिकारी ने बताया कि हादसा छह अक्टूबर की सुबह लगभग छह बजे चीन की सीमा के पास तवांग में हुआ. इसमें भारतीय वायुसेना के दो पायलट सहित पांचकर्मी और सेना के दो जवान मारे गए हैं.

रूस में बने परिवहन हेलीकॉप्टर एमआई-17 वी5 पर्वतीय क्षेत्र में भारतीय सेना की चौकी तक सामान की आपूर्ति करने जा रहा था. बहरहाल दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दे दिया गया है.

असम: डायन बताकर हत्या करने जैसी सामाजिक बुराई के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ती फिल्म

गुवाहाटी: डायन या चुड़ैल बताकर महिलाओं के साथ मार-पीट करने जैसी सामाजिक बुराई पर बनी असमी फीचर फिल्म को सिनेमा प्रेमियों से चौतरफा प्रशंसा मिल रही है. इस बुराई ने ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों महिलाओं की जानें ली हैं.

प्रख्यात नाटककार सीतानाथ लहकर ने फिल्म एई मातिते का निर्देशन किया है. प्रशंसकों को उम्मीद है कि इस मुद्दे को सुलझाने में यह फिल्म सकारात्मक भूमिका निभाएगी.

लहकर ने बताया, असम में डायन बताकर मार-पीट की जाने वाली घटनाओं में सैकड़ों लोगों ने जानें गंवाई हैं और यही कारण है कि मैंने अपनी पहली फीचर फिल्म के लिए यह विषय इस उम्मीद में चुना कि लोग इस समस्या के प्रति जागरूक होंगे.

फिल्म एई मातिते लहकर के प्रशंसित नाटक तमासा का रूपांतरण है. इस फिल्म की कहानी, पटकथा, संवाद और गीत के बोल उन्होंने ख़ुद लिखे हैं.
यह फिल्म छह अक्तूबर को रिलीज़ हुई थी.

गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज के प्रिंसिपल रहे चुके लहकर ने बताया कि फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने साथ ही फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला था, इससे हमें काफी बल मिला था. उन्होंने कहा कि इस विषय पर बनने वाली यह पहली फीचर फिल्म है.

उन्होंने कहा कि किसी महिला को डायन बताने का मामला समाज में फैले अंधविश्वास, लालच और कुछ आपराधिक तत्वों के निजी दुश्मनी की वजह से तूल पकड़ता है. एई मातिते महिलाओं को डायन बताकर उनकी हत्या करने के ख़िलाफ़ वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय ज़िंदगी के लिहाज़ से कड़ा संदेश देती है.

फिल्म में मोनीषा गोस्वामी मुख्य भूमिका निभा रही हैं. जॉन नारज़री मुख्य खलनायक की भूमिका में हैं. इसके अलावा रूपम चेतिया मुख्य भूमिका में हैं. इस फिल्म में 100 से ज़्यादा कलाकार हैं, जिनमें से अधिकांश नए हैं. साथ ही फिल्म में राज्य के चार छात्रनेता भी नज़र आएंगे.

आॅल असम स्टूडेंट यूनियन के नेता लूरिंज्योति गोगोई, आॅल बोडो स्टूडेंट यूनियन के नेता प्रमोद बोरो, स्टूडेंट फेडरेशन आॅफ इंडिया के नेता निरंगकुश नाथ छात्र मुक्ति संगठन के नेता बिट्टू सोनोवाल ने फिल्म में अभिनय किया है.

फिल्म की शूटिंग रानी के जॉयपुर गांव, गुवाहाटी, दिमोरिया, पानिखैती, मयॉन्ग और राज्य के कुछ ग्रामीण इलाकों में हुई है. फिल्म का संगीत सीताराम लहकर और बिभुरंजन चौधरी ने तैयार किया है.

असम: आठ नवजातों की मौत

गुवाहाटी: बीते पांच अक्तूबर को असम के बारपेटा ज़िले के फखरूद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले 24 घंटे में कम से कम आठ नवजात शिशुओं की मौत हो गई.

इनमें से पांच बच्चे दो और चार दिन के थे. हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में अस्पताल के प्रिंसिपल और मुख्य अधीक्षक प्रो. दिलीप कुमार दत्ता ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि बच्चों की मौत कम वज़न की वजह से हुई है. उन्होंने स्थानीय समाचार चैनलों पर चिकित्सकीय लापरवाही की ख़बरों को ख़ारिज किया है.

असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा ने बताया कि शिशुओं की मौत गंभीर नवजात चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई हैं न कि मानवीय लापरवाही की वजह से.

मंत्री ने कहा कि डॉक्टरों नें नवजातों को बचाने की अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश की और अस्पताल में पर्याप्त दवाइयां मौजूद थीं. उन्होंने कहा, मैंने संबंधित डॉक्टरों से बातचीत की और उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी हरसंभव सर्वश्रेष्ठ देखभाल के बावजूद शिशुओं को बचाया नहीं जा सका.

शर्मा ने कहा कि ये मौतें पूरी तरह से नाज़ुक प्रकृति के मामलों से संबंधित थी जैसे मां की आयु या शिशु का वजन. मंत्री ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं. इस बीच, असम के चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी यूनिसेफ के सलाहकारों के साथ मौतों का ऑडिट करने के लिए अस्पताल रवाना हो गए हैं.

मिज़ोरम: सर्दी खांसी की दवा की तस्करी में पूर्व सीआईसी गिरफ्तार

Pseudoephedrine

शूडोफेड्रिन से बनी एक दवा. (प्रतीकात्मक फोटो साभार: फार्मासुटिकल डायरेक्टरी)

आइजोल: चार अक्टूबर को मिजोरम के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) रॉबर्ट हरांगडावला को सर्दी-खांसी की एक दवा की म्यांमार में कथित तस्करी करने के मामले में गिरफ्तार किया गया.

राज्य स्वास्थ्य विभाग के खाद्य एवं दवा प्रशासन (एफडीए) के अधिकारियों ने सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी को गिरफ्तार किया और उन्हें आइजोल जिला एवं सत्र न्यायाधीश लूसी लालरिंथारी के सामने पेश किया जिन्होंने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

एफडीए अधिकारियों ने आइजोल के पास लेंगपुई हवाई अड्डे से इस साल 22 फरवरी को 10 लाख गोलियां बरामद की थीं जिसके शुडोफेड्रिन होने की आशंका है. ये गोलियां हरांगडावला की मालिकाना आर एंड आर मेडिकेयर के लिए थीं.

त्रिपुरा: चकमा जनजातीय समुदाय ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू करने की मांग की

कंचनपुर: बीते तीन अक्टूबर को चकमा नेशनल काउंसिल ऑफ इंडिया (सीएनसीआई) ने अरुणाचल प्रदेश में बसे चकमा और हाजोंग समुदाय के लोगों को स्थायी नागरिकता देने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश को तुरंत लागू करने का आह्वान किया है .

तीन अक्टूबर को संपन्न हुए दो दिवसीय सीएनसीआई सम्मेलन में स्वीकार किए गए एक प्रस्ताव में कहा गया, हमेशा नागरिकताविहीन स्थिति में रहकर चकमा समुदाय के लोग अरुणाचल प्रदेश में कैसे रह सकते हैं.

सीएनसीआई ने सरकार से ऐसे स्वार्थी तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग की जो शीर्ष न्यायालय के फैसले पर अमल की राह में रोड़े अटका रहे हैं.

चकमा जनजातीय समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रही सीएनसीआई ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में चकमा समुदाय के लोगों को उनके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाए.

त्रिपुरा, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में चकमा समुदाय की जनसंख्या अच्छी-खासी है. त्रिपुरा में चकमा समुदाय की जनसंख्या 79,813 है.

प्रस्ताव में मांग की गई कि मिज़ोरम में चकमा ज़िला स्वायत्त परिषद को मज़बूत किया जाए.

असम: नागरिकता साबित करने के लिए जेसीओ को दिया गया नोटिस गलत पहचान का मामला

गुवाहाटी: सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को अपनी नागरिकता साबित करने का नोटिस देने पर फजीहत झेलने के बाद असम पुलिस ने बीते तीन अक्टूबर को इसे गलत पहचान का मामला बताया.

असम के पुलिस महानिदेशक मुकेश सहाय ने तीन अक्टूबर की शाम संवाददाताओं बात करते हुए कहा कि शुरुआती जांच के बाद ऐसा लगता है कि यह गलत पहचान का मामला है क्योंकि जेसीओ और संदिग्ध विदेशी नागरिक के नाम में काफी समानता है, जिस वजह से उन्हें नोटिस चला गया.

सेना से जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) के तौर पर सेवानिवृत्त हुए असम के रहने वाले मोहम्मद अजमल हक़ को पिछले महीने एक विदेशी अधिकरण ने नोटिस भेजकर कहा था कि साबित करें कि वह भारतीय नागरिक हैं, न कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासी.

सिक्किम: रक्षा मंत्री ने सड़क मार्ग से नाथुला का दौरा किया

Gangktok: Union Defence Minister Nirmala Sitharaman with Chief Minister of Sikkim, Pawan Kumar Chamling during their meeting in Gangktok on Saturday. PTI Photo(PTI10 7 2017 000111B)

शनिवार को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में मुख्यमंत्री पवन चामलिंग के साथ रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण. (फोटो: पीटीआई)

गंगटोक: रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने चीन-भारत सीमा पर नाथुला इलाके का सात अक्टूबर को दौरा किया और सेना व भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के अधिकारियों से बातचीत की.

सिक्किम सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी बयान के मुताबिक, सिक्किम के सीमावर्ती इलाके में डोकलाम और अग्रिम चौकियों के हवाई सर्वेक्षण का उनका कार्यक्रम ख़राब मौसम के कारण रद्द कर दिया गया.

इससे पहले राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा था कि रक्षा मंत्री ने डोकलाम-नाथुला इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया. सिक्किम के एक दिवसीय दौरे पर आईं सीतारमण गंगटोक से 52 किलोमीटर दूर नाथुला सड़क मार्ग से पहुंचीं और उन्होंने वहां तैनात सेना तथा आईटीबीपी अधिकारियों से बातचीत की.

बयान में कहा गया है, केंद्रीय मंत्री का सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर डोकलाम और अग्रिम चौकियों का हवाई सर्वेक्षण करने का कार्यक्रम ख़राब मौसम के कारण रद्द कर दिया गया.

हालांकि उन्होंने दोपहर में नाथुला सीमा से लौटने के बाद पूर्वी सिक्किम में नए ग्रीनफील्ड पाक्योंग हवाईअड्डे से गंगटोक और आसपास के इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया. रक्षा मंत्री का सीमावर्ती इलाके का दौरा डोकलाम में करीब 70 दिनों के गतिरोध के बाद भारत और चीनी सेना को वहां से हटे हुए एक महीने से ज्यादा का समय बीतने के बाद हुआ है.

सीतारमण ने अपने ट्विटर हैंडल पर कहा कि सीमा पर जब वह नाथुला पहुंचीं तो चीनी सैनिकों ने उनकी तस्वीरें ली. उन्होंने ट्वीट कर कहा, मैंने बाड़ के दूसरी ओर कई चीनी सैनिकों को देखा जो नाथुला पहुंचने पर मेरी तस्वीरें ले रहे थे.

उन्होंने बाद में सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की और सेना तथा राज्य के वन विभाग के बीच भूमि मुद्दे समेत विभिन्न मुद्दों पर राज्य सरकार से हस्तक्षेप करने के लिए कहा.

विज्ञप्ति में कहा गया है कि चामलिंग ने सरकार की ओर से पूरा हस्तक्षेप करने का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के पड़ोसी दार्जीलिंग पर्वतीय क्षेत्र में चल रहे आंदोलन के कारण सिक्किम के लोगों को हो रही परेशानियों के बारे में बताया.

उन्होंने बताया कि सिक्किम को देश के शेष हिस्से से जोड़ने वाला एकमात्र राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-10 अवरुद्ध होने के कारण उसे काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है. उन्होंने केंद्र से सिक्किम के लिए नया राजमार्ग बनाने के काम में तेज़ी लाने का आग्रह किया.

अरुणाचल प्रदेश: चीन ने सीमा के पास तिब्बत में नया राजमार्ग खोला

बीजिंग: चीन ने तिब्बत की प्रांतीय राजधानी ल्हासा को निंगची को जोड़ने के लिए करीब 5.8 अरब डॉलर की लागत वाला 409 किमी लंबा एक्सप्रेसवे खोला है. निंगची अरुणाचल प्रदेश की सीमा के नज़दीक है.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की ख़बर के मुताबिक 409 किलोमीटर लंबे टोल फ्री एक्सप्रेसवे ने दो बड़े शहरों को जोड़ा है, जो तिब्बत में पर्यटकों के आकर्षण केंद्र भी हैं. यह एक्सप्रेसवे ल्हासा और निंगची के बीच यात्रा की अवधि आठ घंटे से घटा कर पांच घंटे करता है. इस मार्ग पर वाहनों की गति सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा होगी.

गौरतलब है कि तिब्बत में ज़्यादातर एक्सप्रेसवे सैन्य साज़ो-सामान ढोने में सक्षम हैं, जिससे चीनी सेना को अपने सैनिकों और हथियारों को तेज़ी से लाने ले जाने में सुविधा होती है.

तिब्बत में बुनियादी ढांचे के भारी विकास ने भारत को भी अपनी सीमा के अंदर बुनियादी ढांचा का विकास तेज़ करने के लिए प्रेरित किया है. भारत-चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सीमा विवाद है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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