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छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों पर​ फिर लगा बर्बरता का आरोप

राज्य के बीजापुर जिले के गमपुर गांव में हुए एक मुठभेड़ को फर्ज़ी ठहरा रहे ग्रामीणों को बेरहमी से पीटने का आरोप सुरक्षा बलों पर लगा है.

प्रतीकात्मक फोटो (रॉयटर्स)

ग्रामीणों का आरोप है कि कथित मुठभेड़ के बाद बीती 17 फरवरी को आम आदमी पार्टी की नेता सोनी सोरी गांव में आई थीं. उनके जाने के बाद सुरक्षा बल के जवानों ने गांव पर हमला बोल दिया. उन्होंने 20 महिलाओं और पुरुषों की बेरहमी से पिटाई की. गांववालों का कहना है कि फर्ज़ी मुठभेड़ के खिलाफ आवाज़ उठाने की वज़ह से उन्हें ये सज़ा मिली.

पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ‘गांववालों ने बताया कि पिटाई करने आए सुरक्षा बलों के साथ आत्मसमर्पित माओवादी भी थे, जो डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप) में शामिल हो गए हैं. ये लोग सक्रिय माओवादी रहे हैं. इसलिए गांववाले उन्हें अच्छे से जानते हैं. पीड़ितों ने तकरीबन आठ लोगों के नाम भी बताए हैं और सभी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है.’

गमपुर में 28 जनवरी को सुरक्षाबलों ने दावा किया कि उन्होंने मुठभेड़ में दो माओवादी भीमा कड़ती और सुखमती को मार गिराया है. गांववालों का कहना है कि ये दोनों माओवादी नहीं थे. जवानों ने उन्हें फर्जी मुठभेड़ में मार डाला. आम आदमी पार्टी की नेता सोनी सोरी ने भी इस मुठभेड़ को फर्जी बताया है.

नईदुनिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भीमा और सुखमती भाई बहन थे और उस दिन किरदुंल बाज़ार से लौट रहे थे. अख़बार को दिए बयान में बस्तर के प्रभारी आईजी सुंदरराज पी. ने कहा, ‘भीमा और सुखमती माओवादी थे. दोनों के पास हथियार मिला था. भीमा के खिलाफ किरंदुल थाने में पांच और कुआकोंडा थाने में दो मामले दर्ज हैं. उसके खिलाफ स्थायी वारंट भी जारी हुआ था. ऐसे ही सुखमती के खिलाफ कुआकोंडा थाने में एक केस दर्ज है.’

क्या हुआ था 17 फरवरी को
पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, हेमला हिड़मे ने बताया, उस दिन शुक्रवार का दिन था. खाना खाने के बाद घर में आराम कर रही थी. दोपहर बाद तकरीबन दो बजे गांववालों के चिल्लाने की आवाज़ सुनी. घर से बाहर निकलकर देखा तो जवान गांववालों को बुरी तरह से पीट रहे थे. इस बीच जवानों में मुझे भी पकड़ लिया और मुझ पर भी लाठी-डंडे बरसाने लगे. पूरे गांव में अफरातफरी का माहौल था. जवानों में बिना किसी लिहाज़ के लोगों की बेरहमी से पिटाई की.