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‘द वायर’ के सवालों पर जय अमित शाह के वकील का जवाब

पत्रकार रोहिणी सिंह द्वारा जय अमित शाह को भेजे गए सवालों पर उनके वकील मानिक डोगरा का जवाब.

(फाइल फोटो, साभार: BJP)

(फाइल फोटो, साभार: BJP)

6 अक्टूबर, 2017

प्रिय सुश्री रोहिणी सिंह,

मेरे क्लाइंट श्री जय शाह को आपके द्वारा भेजी गई एक प्रश्नावली मिली है, जिसमें पूछे गए सवालों का जवाब देने के लिए उन्होंने मुझे अधिकृत किया है.

टेंपल एंटरप्राइज़ लिमिटेड

यह कंपनी रैप्सीड (कैनोला), डीओसी, कैस्टर डीओसी मील, देसी चना, सोयाबीन, धनिया, चावल, गेहूं, मक्का जैसे कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात का कारोबार करती है. इसका व्यापारिक स्वामित्व और प्रबंधन मुख्य तौर पर श्री जय शाह और श्री जितेंद्र शाह (एक पुराने पारिवारिक मित्र) और सहयोगियों के पास था. श्री जय शाह एक योग्य इंजीनियर हैं, जिन्होंने प्रसिद्ध निरमा यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई की है. श्री जितेंद्र शाह पिछले कई वर्षों से कमोडिटी के कारोबार में लगे हुए थे और उनकी कंपनियां 100 करोड़ से ज़्यादा का वार्षिक टर्नओवर दे रही थीं.

श्री जय शाह, श्री जितेंद्र शाह और उनके सहयोगियों ने इस कंपनी (टेंपल एंटरप्राइज़) में शेयर पूंजी और असुरक्षित कर्जों का निवेश किया है. चूंकि नए करोबार/कंपनी को कामकाजी पूंजी उपलब्ध नहीं थी, इसलिए व्यापार को चलाने के लिए समय-समय पर केआईएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड, जो कि एक रजिस्टर्ड गैर बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है, से ब्याज वाले इंटर कॉरपोरेट डिपॉजिट्स (आईसीडी) लिए गए थे. चुकाए गए ब्याज पर टैक्स (टीडीएस) भी नियमित तौर पर काटा गया है और मूलधन सहित ब्याज की राशि का पूरा भुगतान कर दिया गया है.

केआईएफएस के प्रमोटर श्री राजेश खंडवाला, पिछले कई वर्षों से श्री जय शाह के परिवार के लिए शेयर ब्रोकर का काम कर रहे हैं. इस गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी ने श्री जय शाह और श्री जितेंद्र शाह के दूसरे कारोबारों को पिछले कई सालों से नियमित तौर पर कर्ज उपलब्ध कराया है. श्री जय शाह का श्री राजेश खंडवाला के साथ पारिवारिक रिश्ता, चार साल पहले श्री नाथवानी के बेटे के साथ श्री खंडवाला की बेटी की शादी से भी काफी पहले का है.

यहां यह दर्ज किया जाना चाहिए कि कमोडिटी के कारोबार में करीब 80 करोड़ रुपये का टर्नओवर कोई असामान्य ढंग से ज़्यादा नहीं है, क्योंकि यह एक ज़्यादा जोखिम, ज़्यादा मात्रा और कम मुनाफे का कारोबार है. यह बात खासतौर पर इसलिए भी कही जा सकती है क्योंकि श्री जितेंद्र शाह की कंपनियों का वार्षिक टर्नओवर पहले ही 100 करोड़ से अधिक का था. दुर्भाग्य से टेंपल एंटरप्राइज़ लिमिटेड की कारोबारी गतिविधियों से घाटा हुआ, जिसके कारण अक्टूबर, 2016 में किसी वक्त कारोबारी गतिविधियों को रोक दिया गया.

ऊपर के सारे लेन-देन बैंकिंग चैनलों के जरिए हुए हैं और नियमपूर्वक कंपनी के बही-खातों और टैक्स रिकॉर्डों में दर्ज हैं.

सत्व ट्रेडलिंक

हालांकि, इस एलएलपी (लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप) का गठन श्री जय शाह और श्री खंडवाला द्वारा किया गया था, लेकिन बाजार के विपरीत हालातों के मद्देनजर इसने कोई कारोबार नहीं किया और इस एलएलपी को खत्म कर दिया गया. इसे पहले ही रजिस्ट्रार के रिकॉर्डों से भी हटा दिया गया है.

कुसुम फिनसर्व

यह कंपनी मुख्य तौर पर स्टॉकों और शेयरों की ट्रेडिंग, आयात-निर्यात गतिविधियों और डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग कंसल्टेंसी सर्विसेज का काम करती है. यह कंपनी पिछले कई सालों से केआईएफएस से नियमित तौर पर आईसीडी/कर्जे लेती रही है और 4.9 करोड़ की रकम उनकी तरफ से बकाया क्लोजिंग बैलेंस थी. इस रकम का इस्तेमाल नियमित कामकाजी पूंजी के तौर पर किया गया. चुकाए गए ब्याज पर टैक्स (टीडीएस) भी काटा गया है और मूलधन और ब्याज की राशि पूरी तरह से अदा कर दी गई है.

इस एलएलपी ने कालूपुर कमर्शियल कोऑपरेटिव बैंक से कोई फंडिंग या कर्ज नहीं लिया है. इसकी जगह केवल एक 25 करोड़ रुपये तक की सीमा का लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी),  गैर फंड आधारित कामकाजी पूंजी की सुविधा (नॉन फंड बेस्ड वर्किंग कैपिटल फैसिलिटी) के रूप में मंजूर किया गया है, जिसका इस्तेमाल समय-समय पर किया गया है.

यह सुविधा सामान्य बैंकिंग शर्तों पर हासिल की गई है, जिसके तहत एलसी के तहत सामान की खरीदारी का अनुमान, 10 फीसदी का नकद मुनाफा (कैश मार्जिन) और श्री जय शाह के पिता के स्वामित्व वाली एक संपत्ति और कुसुम फिनसर्व की एक दूसरी संपत्ति (जिसे 5 अप्रैल, 2014 को एक कानूनी बैनामे/पर्चेज डीड के जरिए खरीदा गया) की जमानत शामिल है. इसे अप्रैल 2014 से मार्च, 2015 तक की वित्तीय घोषणा में भी देखा जा सकता है.

वास्तव में एलसी के तहत खरीदे गए सामानों को सीएम (कोलैटरल मैनेजर) की निगरानी में गोदाम/पोर्ट में स्टोर करके रखा जाता है और यहां से सामान को उठाने की इजाज़त सिर्फ भुगतान के बाद (पे एंड पिक के तहत) ही दी जाती है. जिसका मतलब है कि जितना सामान उठाना है, उसके बराबर मूल्य को फिक्स्ड डिपॉजिट के तौर पर जमा करने के बाद ही सामान उठाने की इजाज़त मिलती है.

बैंक पूरा भुगतान मिल जाने के बाद ही डिलीवरी ऑर्डर जारी करता है और उसके बाद ही सीएम (कोलैटरल मैनेजर) सामान को उठाने की इजाज़त देता है. बैंक को एलसी के समाप्त होने से पहले ही भुगतान मिल जाता है. जिसके कारण यह बैंकों के लिए एक नॉन फंडेड (पैसा न देने वाली) और बगैर जोखिम वाली सुविधा बन जाती है.

2.1 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने के लिए आईआरईडीए से लिया गया कर्ज उस समय इंडस्ट्री मानकों के हिसाब से उपकरणों की कीमत (करीब 14.3 करोड़ रुपये) पर आधारित है. इसका नियमपूर्वक मूल्यांकन किया गया था और साधारण व्यापारिक तरीके से इसे मंजूर किया गया था. 30-06-17 को कुल बकाया कर्ज 8.52 करोड़ है और ब्याज और कर्ज की पुनर्अदायगी नियमित तौर पर की जा रही है.

यहां यह दर्ज किया जाना चाहिए कि 21.2 करोड़ की रकम कंपनी का कुल राजस्व है, न कि उसका मुनाफा. इसमें शेयरों की बिक्री से मिलने वाला 16.2 करोड़ का ट्रेडिंग टर्नओवर शामिल है, जो मुनाफा नहीं है. इस कंपनी को हुआ मुनाफा सिर्फ करीब 15,000 रुपये का था. ऊपर वर्णित सारे लेन-देन बैंकिंग चैनल के जरिए किए गए हैं और कंपनी के खातों और टैक्स रिकॉर्डों में बाकायदा दर्ज हैं.

यहां यह दर्ज किया जाना चाहिए कि एलएलपी का जेएसडब्ल्यू या श्री सज्जन जिंदल के नियंत्रण वाली किसी कंपनी के साथ कोई संबंध नहीं है.

आखिर में, यह बताना मुनासिब होगा कि किसी कर्जे पर कोई मूलधन या ब्याज की अदायगी बाकी नहीं है.

ऊपर ब्यौरेवार तरीके से दिए गए जवाबों और स्पष्टीकरणों की रोशनी में सारे तथ्य पूरी तरह से साफ हैं और आपसे यह गुजारिश है कि आप इस बारे में कोई ख़बर प्रकाशित न करें, जो न केवल मेरे क्लाइंट की निजता पर हमला होगा, बल्कि जो निंदा करनेवाला और/या मानहानि करनेवाला भी होगा.’

श्री जय शाह कानून के तहत अपना कारोबार करनेवाले एक प्राइवेट सिटिजन हैं. उनके कारोबारी लेन-देन ईमानदार, कानूनी और प्रामाणिक हैं. आपकी प्रश्नावली से ऐसा लगता है कि आपका इरादा उन्हें एक झूठे और मनगढंत विवाद में घसीटना है.

कोई ऐसा आरोप जिससे उनके द्वारा कोई गलत काम करने का हल्का सा भी आभास जाएगा, वह न सिर्फ झूठा बल्कि दुर्भावना से प्रेरित और बदनाम करने वाला भी होगा. यह निजता के उनके मौलिक अधिकार का हनन भी होगा. ऐसी स्थिति में उनके पास आपके खिलाफ मानहानि और गलत आचरण करने का मुकदमा दायर करने का अधिकार होगा.

इन सब बातों के अलावा, अगर आप या प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मीडिया में कोई भी, मेरे क्लाइंट के खिलाफ कोई बदनाम करने वाला और या झूठा आरोप छापता या प्रसारित करता है, या कोई ऐसा आरोप लगाता है जो निजता के उनके मौलिक अधिकार का हनन करता है या उन्हें बदनाम करता है, तो शाह के पास ऐसे बदनाम/मानहानि करने वाले आरोपों को फिर से छापने या प्रसारित करने वाले के खिलाफ मुकदमा करने और उसे अदालत में ले जाने का पूरा अधिकार होगा.

मानिक डोगरा, एडवोकेट

A-27, डिफेंस कॉलोनी
नई दिल्ली – 110024

 

(भूल सुधार: इस लेख की पिछली कॉपी की एक लाइन में कंपनी का मुनाफ़ा गलती से 15,000 करोड़ रुपये लिख दिया गया था जो कि सिर्फ 15,000 रुपये है. इस भूल के लिए हमें खेद है.)

 

रोहिणी सिंह की रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

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