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गुजरात में भाजपा की डूबती नाव को चुनाव आयोग के तिनके का सहारा: विपक्ष

गुजरात चुनाव का ऐलान नहीं करने पर माकपा ने कहा, ‘अगर गुजरात में 18 दिसंबर से पहले चुनाव होना है तो आचार संहिता लागू होनी चाहिए’

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शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में चुनाव की घोषणा करते निर्वाचन आयोग के मुख्य आयुक्त व अन्य सदस्य. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: माकपा ने हिमाचल प्रदेश और गुजरात के विधानसभा चुनावों का एक साथ ऐलान नहीं करने के निर्वाचन आयोग के फैसले पर शुक्रवार को सवाल किया. माकपा पोलित ब्यूरो ने कहा कि यह अटपटा है. अगर गुजरात में चुनावों को 18 दिसंबर से पहले करा लिया जाना है तो इस राज्य में भी आदर्श आचार संहिता लागू होनी चाहिए.

आयोग ने गुरुवार को ऐलान किया था कि हिमाचल प्रदेश में एक ही चरण में नौ नवंबर को चुनाव हैं और 18 दिसंबर को नतीजों का ऐलान किया जाएगा, जबकि गुजरात विधानसभा चुनावों की घोषणा बाद में अलग से की जाएगी.

माकपा पोलित ब्यूरो ने एक बयान में कहा, यह अजीब है कि निर्वाचन आयोग ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया जबकि गुजरात विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा नहीं की.

वाम पार्टी ने कहा कि आमतौर पर जब कई राज्यों में छह महीने के अंदर चुनाव होने होते हैं तो निर्वाचन आयोग इन राज्यों की तारीखों को मिला देता है और एक संयुक्त बयान में तिथियों का ऐलान करता है. यह चलन लंबे वक्त से है.

बयान में कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि 18 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश के नतीजों के आने से पहले ही गुजरात के चुनाव करा लिए जाएंगे.

‘भाजपा निवार्चन आयोग को प्रभावित कर रही है’

गुजरात विधानसभा चुनाव की घोषणा हिमाचल प्रदेश के साथ नहीं करने के चुनाव आयोग के कदम को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को सत्तारूढ़ भाजपा पर बरसते हुए आरोप लगाया कि वह निवार्चन आयोग के कामकाज को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है तथा गुजरात में भाजपा की डूबती नाव को चुनाव आयोग के तिनके का सहारा लेना पड़ रहा है.

कांग्रेस ने यह भी कहा कि वह चुनाव आयोग द्वारा हिमाचल प्रदेश एवं गुजरात के चुनाव एकसाथ नहीं करवाने के फैसले के विरोध में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजकर उसके समक्ष विरोध जताने, अदालत में इस फैसले को चुनौती देने सहित विभिन्न विकल्पों पर विचार करेगी.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, भाजपा समय की सही कसौटी पर खरी उतरी परंपरा को तोड़ने की दोषी है. दोनों राज्यों के चुनाव साथ में कराने की परंपरा को भाजपा तोड़ रही है. इस बदलाव के लिए हताश एवं घबराई हुई भाजपा द्वारा अंतिम समय में यह प्रयास इसलिए किया गया ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 अक्टूबर को गुजरात में सांता क्लाज की तरह विभिन्न घोषणाएं कर सकें.

उन्होंने कहा कि 2002-03 को यदि छोड़ दें तो 1998 से दोनों राज्यों में एक साथ ही चुनाव करवाए गए हैं. उन्होंने कहा कि 2002-03 में गुजरात दंगों के कारण साथ में चुनाव नहीं हुए. सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय के अप्रैल 2001 के एक कार्यालय परिपत्र का उल्लेख किया है. इसके अनुसार चुनाव आयोग को राज्य में 46 दिनों के भीतर चुनाव करवाना चाहिए. किन्तु इस नियम को पूर्व में कई बार तोड़ा गया.

कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर अंगुली नहीं उठानी चाहिए: भाजपा

हिमाचल प्रदेश के साथ गुजरात विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा नहीं किए जाने की कांग्रेस की आलोचनाओं को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा ने कहा कि 2007 और 2012 में भी इन दोनों राज्यों के चुनाव की तिथियों के बीच अंतर था जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, ऐसे में कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर अंगुली नहीं उठानी चाहिए.

केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकार प्रसाद ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि साल 2007 में हिमाचल प्रदेश में 20 अक्टूबर को चुनाव हुए और गुजरात में 21 नवंबर 2007 को चुनाव हुए. साल 2012 में हिमाचल प्रदेश में 10 अक्टूबर को चुनाव हुए और गुजरात में 17 नवंबर 2012 को चुनाव हुए.

उन्होंने कहा, अब 2007 और 2012 में किसकी सरकार थी, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है. प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस को उपयुक्त तरीके से गुजरात में चुनाव लड़ना चाहिए और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर अंगुली नहीं उठानी चाहिए.

‘सरकार ने आयोग पर दबाव बनाया’

हिमाचल प्रदेश के साथ गुजरात विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित नहीं करने पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया था कि सरकार ने आयोग पर दबाव बनाया है.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि गुजरात चुनाव के कार्यक्रम घोषित करने में देरी इसलिए की गई ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 अक्टूबर को अपने गृह राज्य के दौरे के दौरान लोकलुभावन घोषणाएं कर फर्जी सांता क्लॉज के तौर पर पेश आएं और जुमलों का इस्तेमाल करें.

कांग्रेस ने कहा था कि यदि गुजरात चुनाव के कार्यक्रम अभी घोषित कर दिए गए होते तो राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई होती.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)