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तेजस एक्सप्रेस में आईआरसीटीसी का खाना खाने के बाद 26 लोग बीमार

ट्रेन को महाराष्ट्र के चिपलुन स्टेशन पर रोककर यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के बाद सभी यात्री ख़तरे से बाहर हैं.

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मुंबई: गोवा से मुंबई जा रही तेजस एक्सप्रेस में रविवार को रेलवे की जलपान इकाई आईआरसीटीसी का खाना खाने के बाद कम से कम 26 यात्री बीमार पड़ गए.

कोंकण रेलवे के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय गुप्ता ने बताया कि तेजस एक्सप्रेस में भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) का खाना खाने के बाद यात्रियों ने अस्वस्थ होने की शिकायत की.

उन्होंने बताया कि ट्रेन को महाराष्ट्र के चिपलुन स्टेशन पर रोका गया और सभी 26 अस्वस्थ यात्रियों को शहर के लाइफ केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने सभी यात्रियों को ख़तरे के बाहर बताया है.

घटना के बाद आईआरसीटीसी एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं. इसमें से एक ट्वीट में आईआरसीटीसी ने कहा है, ‘गाड़ी संख्या 22120 तेजस एक्सप्रेस में विषाक्त भोजन की शिकायत मिली है. ट्रेन को चिपलुन स्टेशन पर रोका गया है और रेलवे के डॉक्टर पीड़ित यात्रियों का इलाज कर रहे हैं.’

रेलवे ने घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं. साथ ही ट्रेन में यात्रियों को दिए गए खाने के पैकेटों को जांच के लिए भेज दिया गया है. इसके अलावा कैटरिंग सेवा के निदेशक को मामले की रिपोर्ट लेने के लिए मुंबई भेजा गया है.

आईआरटीसी के मुताबिक, नाश्ते के कुल 300 पैकेट बांटे गए थे. इनमें से 170 शाकाहारी थे और 130 पैकेटों में मांसाहारी नाश्ता था.

भारत की पहली मध्यम तेज़ गति की पूरी तरह से वातानुकूलित तेजस एक्सप्रेस को मुंबई-गोवा रूट पर इस साल जून में लॉन्च किया गया था. भारत की प्रीमियम ट्रेनों में से एक तेजस एक्सप्रेस मुंबई को गोवा के करमाली से जोड़ता है.

इंडिएन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक तेजस अपनी लॉन्चिंग के बाद से ही विवाद की वजह से ख़बरों में है. रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले भी यात्री तेजस में ख़राब खाने की शिकायत कर चुके हैं. जिसके बाद आईआरसीटीसी ने खाने की सूची में बदलाव किया था.

बीते जुलाई महीने में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने अपनी आॅडिट रिपोर्ट में रेलवे के खाने को यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया था.

कैग की रिपोर्ट में पाया गया था कि ट्रेन और स्टेशन पर दूषित खाद्य पदार्थों, रिसाइकिल किया हुआ खाद्य पदार्थ और डिब्बाबंद भोजन एक्सपायरी डेट के बाद भी परोसा जा रहा है. अनधिकृत पानी के ब्रांड भी स्टेशन और ट्रेनों में बेचा जा रहा है. रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि बहुत सारे खाद्य पदार्थ रिसायकल करके भी बेचे जा रहे हैं.

आॅडिट रिपोर्ट में यह माना गया था कि पेय पदार्थ बनाने के लिए नल का पानी बिना संशोधित किए इस्तेमाल किया जा रहा है. ट्रेनों में कचरे के डिब्बों को ढका नहीं जाता. नियमित रूप से खाली नहीं किया जाता, उन्हें धोया नहीं जाता. खाने के सामानों को मक्खियों, कीड़े और धूल से बचाने के लिए ढका नहीं जाता और चूहे और तिलचट्टे आदि गाड़ियों में खुलेआम घूमते पाए गए हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)