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कोलकाता के सत्यजित रे फिल्म संस्थान से 14 छात्राएं निष्काषित

कई हफ्तों से धरने पर बैठे सत्यजित रे फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान के छात्र-छात्राओं ने प्रबंधन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया.

सत्यजित रे फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (एसआरएफटीआई), कोलकाता (फोटो: पीटीआई)

सत्यजित रे फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (एसआरएफटीआई), कोलकाता (फोटो: पीटीआई)

कोलकाता के सत्यजित रे फिल्म एवं टेलीविज़न इंस्टिट्यूट (एसआरएफटीआई) से 14 छात्राओं को निष्काषित कर दिया है. संस्थान प्रबंधन ने छात्राओं का हॉस्टल, छात्राओं के हॉस्टल से अलग करने का निर्णय लिया है जिसका ये छात्राएं विरोध कर रही थीं.

संस्थान प्रबंधन ने सुरक्षा का हवाला देकर छात्र और छात्राओं के हॉस्टल अलग करने का निर्णय लिया है. इसे लेकर तकरीबन एक हफ्ते से छात्राओं और संस्थान प्रबंधन के बीच विवाद चल रहा था. साथ ही पिछले कई हफ्तों से संस्थान के मेन गेट पर छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन भी जारी था.

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संस्थान के गेट पर छात्र छात्राएं एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं. (फोटो साभार: फेसबुक)

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के अनुसार, जहां संस्थान प्रबंधन ने दावा किया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लड़के और लड़कियों का हॉस्टल अलग किया जा रहा है, वहीं विद्यार्थियों का दावा है कि यह एक तरह की मोरल पुलिसिंग है.

कई हफ्तों से धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं ने प्रबंधन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. छात्र-छात्राओं का कहना है कि यह संस्थान प्रबंधन की छोटी सोच को दर्शाता है.

छात्राओं ने इसे लैंगिक भेदभाव वाला फैसला बताया है. छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने संस्थान प्रबंधन से इस बारे में बात करने की कोशिश की लेकिन प्रबंधन ने अनुमति नहीं दी. उनका कहना है कि हर मुद्दे पर प्रबंधन का रवैया ऐसा ही रहता है.

 

उधर, एसआरएफटीआई निदेशक देबमित्रा मित्रा का कहना है, ‘विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थान के संचालक परिषद और शैक्षणिक परिषद ने हॉस्टल अलग करने का फैसला लिया है. कई बार कहने के बाद भी 14 छात्राएं बॉयज़ हॉस्टल खाली नहीं कर रही थीं. हमने उन्हें 48 घंटों की मोहलत दी थी और कहा था कि उन्हें कोर्स पूरा करने से रोक दिया जाएगा.’

मित्रा आगे बताती हैं, ‘प्रबंधन के इस फैसले के विरोध स्वरूप प्रदर्शन कर रही 12वें बैच की 14 में से तीन छात्राओं ने अपनी डिप्लोमा फिल्में जमा नहीं की. इनके साथ एकजुटता दिखाने के लिए छह और विद्यार्थियों ने भी ऐसा ही किया.’

12वें बैच की इन तीन छात्राओं में से एक ने बताया, ‘हॉस्टल अलग करने के नाम पर प्रबंधन हर दिन नए नियमों के साथ सामने आ रहा है, जो कि एक तरह की मोरल पुलिसिंग है. एक फिल्म संस्थान में हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते. प्रबंधन सुरक्षा का हवाला देते हुए हॉस्टल अलग करने का दावा कर रहा है लेकिन हम वास्तव में जिन समस्याओं से जूझ रहे हैं वे उनसे बिल्कुल अनजान हैं.’

मित्रा ने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘हमारी बात पर ध्यान देने के बजाय वे ईमेल से हमें धमकी दे रहे हैं. ईमेल में उन्होंने लिखा है कि विद्यार्थियों को निष्कासित किया गया तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘बीते शनिवार की रात को पता चला कि कुछ छात्र ताला तोड़कर कथित तौर पर छात्राओं के कमरे में घुसने की कोशिश कर रहे थे. उनमें से कुछ छात्राओं के साथ रहना शुरू कर दिया था.’

मित्रा ने कहा, ‘इस तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जा सकती. कुछ विद्यार्थियों के सहयोग से तकरीबन 10 विद्यार्थियों ने कानून अपने हाथ में ले लिया था. इसलिए हमने विद्यार्थियों के इस समूह के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराने का फैसला किया है.’