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सोशल मीडिया पर अपने ‘मन की बात’ रखने वाले जवान को निलंबित कर गिरफ़्तार किया गया

जवान ने अधिकारियों जैसा भोजन, साप्ताहिक छुट्टी और शारीरिक दंड का रिवाज़ ख़त्म करने के साथ नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह की आलोचना की थी.

Pankaj Mishra Youtube

जवान पंकज मिश्रा.

नई दिल्ली: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जवान द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की आलोचना करने पर उसे निलंबित करने के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया है. जवान पंकज मिश्रा ने अप्रैल महीने में एक वीडियो जारी कर कहा था कि राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सही जानकारी नहीं दे रहे हैं. छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में पंकज का एक रिश्तेदार भी शामिल था.

15 अक्टूबर को पंकज मिश्रा का निलंबन हुआ है. अप्रैल की घटना के बाद विभाग ने आंतरिक जांच का आदेश दिया था. मिश्रा को असम पुलिस ने भारतीय दंड संहिता और आई अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है.

पंकज द्वारा जारी किए गए वीडियो के वायरल हो जाने के बाद, उसे सीआरपीएफ के दिल्ली मुख्यालय तलब किया गया था. उन्होंने इसे मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और सरेंडर करने के लिए सुरक्षा मांगी.

उच्च न्यायालय की सलाह पर उन्होंने 6 मई को सीआरपीएफ के महानिदेशक के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था. एक आंतरिक जांच लंबित होने के बाद उन्हें असम के जोरघाट शहर के रोहरीह इलाके में स्थित 119 बटालियन को स्थानांतरित कर दिया गया था.

पंकज को विभाग की तरफ से वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट न करने की चेतावनी दी गई और उनका फ़ोन भी वरिष्ठ अफसरों द्वारा ले लिया गया. 7 अक्टूबर को उन्होंने अपने दोस्त के फ़ोन से एक और वीडियो जारी किया.

वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अप्रैल में जारी वीडियो के बाद पीटा गया और जोरहाट कैंप से जारी किए गए वीडियो के बाद भी पीटा गया है. उन्होंने सिंह और मोदी पर सीआरपीएफ जवानों की सुरक्षा के मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था.

वीडियो में उन्होंने अपने विभाग के 22 लाख साथी जवानों से असमानता के खिलाफ़ आवाज़ उठाने का आग्रह किया था. उनकी मांगों में कामकाज का समय तय करना, अधिकारियों की तरह एक तरह का भोजन, साप्ताहिक छुट्टी और शारीरिक दंड देने के रिवाज़ का अंत होना चाहिए.

पंकज ने आगे कहा कि वो विरोध में 21 दिन की भूख हड़ताल शुरू कर रहे हैं और यदि भाजपा सैनिकों के अधिकारों का समर्थन नहीं करती है, तो कमल 2019 में नहीं खिलेगा.

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जोरहाट के उप-पुलिस अधीक्षक दिलीप बरुआ ने कहा, ‘कॉन्स्टेबल मिश्रा को रविवार को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर सीआरपीएफ के जोरहाट शिविर से गिरफ्तार किया गया है.’

बरुआ ने आगे कहा, कमांडेंट बलराम बेहरा की ओर से सीआरपीएफ के उप-निरीक्षक रुपाम सैकिया ने जोरहाट पुलिस स्टेशन में शिकायत दायर किया है.

अप्रैल महीने में पंकज द्वारा जारी वीडियो में उन्होंने राजनाथ सिंह की आलोचना करते हुए कहा था, ‘शर्म है तो शहीदों को श्रद्धांजलि नहीं देना.’

पंकज को स्थानीय अदालत में पेश किया गया. हालांकि संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘कुछ भी गलत नहीं किया है और भविष्य में विभाग और अन्य क्षेत्रों में समस्याओं को उजागर करना जारी रखेंगे, उन्हें फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

अप्रैल में ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सैनिक तेज बहादुर यादव, जिन्होंने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया गया था कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात सैनिकों को खराब मादक पदार्थों से युक्त भोजन परोसा जा रहा है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था जिसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था.

एक आंतरिक जांच के बाद बीएसएफ ने एक बयान जारी करते हुए कहा, ‘कार्यवाही के दौरान यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने बल के अच्छे आदेश और अनुशासन की अवहेलना की है. जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर झूठा आरोप लगाया था और भोजन की गुणवत्ता और बल की औपचारिक शिकायत निवारण तंत्र का इस्तेमाल भी नहीं किया.’

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