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यूपी में बेरोज़गारों के लिए कमाई का भी मौक़ा है विधानसभा चुनाव!

विधानसभा चुनाव में बेरोज़गारी मुद्दा नहीं है. लेकिन राजनीतिक दल बेरोज़गार युवाओं का इस्तेमाल करने में पीछे नहीं हैं. कहीं 500 रुपये दिहाड़ी पर तो कहीं मोटरसाइकिल में फुल टंकी तेल भराने के नाम पर रैलियों के लिए भीड़ जुटाई जा रही है.

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उत्तर प्रदेश में एक चुनावी रैली (फाइल फोटो: पीटीआई)

पूर्वी उत्तर प्रदेश का ज़िला मुख्यालय गोंडा. शुक्रवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली थी. रैली से लौट रही भीड़ में दो बच्चे मेरे साथ-साथ चल रहे थे. उम्र 12-14 के आसपास रही होगी, आपस में बातें कर रहे थे कि भूख लगी है, चलो कुछ खाया जाए. दोनों के कपड़े घिसकर पुराने हो गए थे और हद से ज़्यादा गंदे थे. एक के पांव में हवाई चप्पल थी. दूसरा नंगे पांव था.

मैंने पूछा, कहां से आए हो?
जवाब मिला, मोती नगर से.

-अकेले आए हो?
-नहीं, बस से आए हैं. बहुत लोग हैं.

-कुछ खाने को नहीं मिला?
-मिला.

-क्या?
-सबको 50-50 रुपया मिला है.

-कितने लोग है साथ में?
-30 लोग…

इतनी बात होने तक लड़के शर्मा गए और आगे की तरफ दौड़ गए. इन बातों में कुछ भी नया नहीं है. हर पार्टी की रैली में कुछ समर्पित कार्यकर्ता होते हैं, कुछ नेता होते हैं और बहुत सारे लोग पैसे देकर लाए जाते हैं. उसमें बूढ़े, जवान, बच्चे, सयाने सब होते हैं. वैसी ही भीड़ उस रैली में भी थी. रैलियों में शामिल युवाओं से बात करने पर रैली में आई भीड़ का अंदाज़ा लगता है.

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फाइल फोटो: पीटीआई

गोंडा के ही रहने वाले बीए के छात्र धीरज ने बताया, ‘सब पार्टियों की तरफ़ से पैसा दिया जाता है. सबसे ज़्यादा पैसा भाजपा की रैली में मिल रहा है. आज मुझसे एक जानने वाले ने बोला है कि एक बाइक पर 500 मिलेंगे. जितनी बाइक ला सको, उतने 500 ले लेना. हमने 15 बाइक के लिए कह दिया है.’

ऐसा नहीं है कि धीरज भाजपा के वोटर हैं. वे किसको वोट करेंगे अभी दुविधा में हैं. लड़ाई त्रिकोणीय है. वे कहते हैं, ‘अभी कौन जीतेगा, यह एक दो दिन पहले पता चलेगा.’ लेकिन वे पहली रैली में नहीं आए हैं. वे इससे पहले दो और पार्टियों की रैली में जा चुके हैं.’

गोंडा में ही परसपुर गांव के रहने वाले रवि पांडेय ने बताया, ‘सपा की रैली में बाइक के लिए फुल टंकी तेल दे रहे थे. रैली में शामिल हो गए और जब तेल भरा लिया तो वापस आ गए.’

गोंडा के तरबगंज के इलाके में सपा का रोड शो हो रहा था. भारी संख्या में युवा मोटरसाइकिल पर सवार होकर पूरी सड़क घेर कर चल रहे थे. वे कर्नलगंज में होने वाली अखिलेश की रैली में जा रहे थे. हमारे साथ चल रहे ड्राइवर ने कहा, ये जो लड़के रैली में हैं, ये सब ज़रूरी नहीं कि सपा के सपोर्टर हों. कल को दूसरी पार्टी के कार्यकर्ता 100-200 रुपये दे देंगे तो उधर चले जाएंगे.

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उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार करता बसपा समर्थक (फोटो: पीटीआई)

स्थानीय पत्रकार रमेश पांडेय का कहना है, ‘किसी भी पार्टी की रैली में 60-70 प्रतिशत लोग ऐसे ही आते हैं. वे लाये जाते हैं। किसी को पैसे देकर, किसी को खाने देकर लाया जाता है. नेता को भीड़ चाहिए, बेरोज़गारों को पैसा, जो भी मिल गया, वे आ जाते हैं.’

गोंडा में आंबेडकर चौराहे पर ठेला लगाने वाले एक वर्मा जी रैली को लेकर बहुत उत्साहित दिखे. हमने पूछा, क्या माहौल है? बोले, भाजपा जीतेगी. हालांकि, कुछ देर की बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैं जहां खड़ा हूं वह जगह उन्हीं के दायरे में है, इसलिए अभी यहां तो उन्हीं की हवा है, बाकी अभी चुनाव दूर है. देखा जाएगा.’

प्रधानमंत्री मोदी समेत किसी पार्टी की रैली में बेरोज़गारी मुद्दा नहीं है, शिक्षा मुद्दा नहीं है, भीड़ और वोट दोनों की खरीद में जो पार्टी अव्वल निकलेगी, जातीय गणित में जो पार्टी माहिर निकलेगी, यूपी में उसी की सरकार बनेगी.