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राजस्थान में लोकतंत्र का गला घोंटने वाले बिल का विरोध करूंगा: भाजपा विधायक

एडिटर्स गिल्ड ने कहा, यह विधेयक मीडिया को परेशान करने का एक घातक साधन है, जो सरकारी कर्मियों के ग़लत कृत्यों को छुपाता है और प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगाता है.

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वसुंधरा राजे, मुख्यमंत्री, राजस्थान. (फोटो: पीटीआई)

जयपुर/नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने अपनी पार्टी की सरकार की ओर से लोक सेवक के खिलाफ मुकदमे के लिए सरकार की मंजूरी के लिए लाए गए अध्यादेश का विरोध करते हुए इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है. उन्होंने सरकार को एक पत्र लिखकर कहा है कि अगर यह विधेयक लाया गया तो जिस प्रकार मैंने आपातकाल का विरोध किया था उसी प्रकार राजस्थान में लोकतंत्र का गला घोंटने वाले इस बिल का भी विरोध करूंगा.

दूसरी तरफ, द एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने राजस्थान सरकार से इस हानिकारक अध्यादेश को वापस लेने की मांग की है जो लोकसेवकों, न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों के खिलाफ आरोपों पर उसकी मंजूरी के बिना रिपोर्टिंग करने से मीडिया को रोकता है.

राजस्थान सरकार ने पिछले महीने आपराधिक कानून राजस्थान संशोधन अध्यादेश, 2017 जारी किया था जिसमें राज्य के सेवानिवृत्त एवं सेवारत न्यायाधीशों, मजिस्ट्रेटों और लोकसेवकों के खिलाफ ड्यूटी के दौरान किसी कार्रवाई को लेकर सरकार की पूर्व अनुमति के बिना जांच से उन्हें संरक्षण देने की बात की गई है. यह विधेयक बिना अनुमति के ऐसे मामलों की मीडिया रिपोर्टिंग पर भी रोक लगाता है.

पूर्व मंत्री तिवाड़ी ने गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया को रविवार को लिखे एक पत्र में कहा है, इस पत्र को आप मेरी ओर से एक राजनीतिक प्रतिरोध के रूप में लें. इस पत्र के माध्यम से मेरा सबसे प्रमुख प्रतिरोध उस बिल से है जिसे गृहमंत्री के रूप में आप अगले कुछ दिनों में विधानसभा में प्रस्तुत करने वाले हैं. आप एक ऐसा क़ानून बनाने वाले हैं, जो राजस्थान को खुले आम लूटने वाले मुख्यमंत्री, मंत्री और अधिकारियों की लूट को कवच और कुंडल पहना देगा.

भाजपा के वरिष्ठ विधायक तिवाड़ी ने कहा है कि इस बिल के प्रस्तुत होने के बाद राजस्थान के इतिहास में यह दिन लोकतंत्र के अंधकार दिवस के रूप में याद रखा जाएगा. चूंकि यह बिल आपके विभाग से संबंधित है, इस पत्र के माध्यम से मेरा आपसे निवेदन है कि आप मंत्रिमंडल में इस पर पुनर्विचार करे और इसे विधानसभा में नहीं लाया जाए. अगर यह लाया गया तो जिस प्रकार मैंने आपातकाल का विरोध किया था उसी प्रकार राजस्थान में लोकतंत्र का गला घोंटने वाले इस बिल का भी विरोध करूंगा.

हानिकारक अध्यादेश वापस लिया लाए

द एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा है कि गिल्ड ने रविवार रात एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह अध्यादेश मीडिया को परेशान करने वाला एक खतरनाक यंत्र है.

गिल्ड ने राजस्थान सरकार से इस हानिकारक अध्यादेश को वापस लेने की मांग की जो लोकसेवकों, न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों के खिलाफ आरोपों पर उसकी मंजूरी के बिना रिपोर्टिंग करने से मीडिया को रोकता है.

एडिटर्स गिल्ड के बयान में कहा गया है कि ऐसा दिख रहा है कि राज्य सरकार का पिछले महीने जारी अध्यादेश बजाहिर फर्जी प्राथमिकी से न्यायपालिका और नौकरशाही की रक्षा करने के लिए लाया गया है.

बयान के मुताबिक, लेकिन वास्तव में यह मीडिया को परेशान करने का एक घातक साधन है, जो सरकारी कर्मियों के गलत कृत्यों को छुपाता है और भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त प्रेस की स्वतंत्रता पर नाटकीय ढंग से रोक लगाता है.

इसमें मीडिया पर प्रतिबंध लगाया गया है कि वह जांच को लेकर सरकार की मंजूरी मिलने तक इस प्रकार के आरोपों पर रिपोर्ट प्रकाशित या प्रसारित नहीं कर सकती.

गिल्ड ने कहा, गिल्ड कानून की अदालतों में दायर प्राथमिकियों की निष्पक्ष, संतुलित एवं जिम्मेदार रिपोर्टिंग का पक्षधर रहा है, लेकिन उसका मानना है कि सरकार ने जो समाधान खोजा है, वह सख्त है और लोकहित के मामलों की रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों को जेल तक में बंद करने की निरंकुश ताकत देता है.

इसमें कहा गया है, गिल्ड मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से अनुरोध करता है कि वह इस हानिकारक अध्यादेश को वापस लें और प्रेस की स्वतंत्रता को संकट में डालने वाले किसी भी कानून को पारित होने से रोकें.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)