भारत

देश के हालात आपातकाल से ज़्यादा ख़राब, भाजपा ने सोच नहीं बदली तो ​बौद्ध धर्म अपना लूंगी: मायावती

बसपा प्रमुख का आरोप, भाजपा ने राजनीतिक स्वार्थ में संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र को कमज़ोर किया, तानाशाही और मनमानी चल रही है.

Mayawati Reuters

बसपा प्रमुख मायावती. (फोटो: रॉयटर्स)

आजमगढ़: बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने मंगलवार को आरोप लगाया कि देश के हालात 1975 में लागू आपातकाल से ज्यादा खराब हैं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ की वजह से संवैधानिक संस्थाओं और मीडिया को कमजोर कर दिया गया है. मायावती ने भाजपा को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के प्रति अपनी सोच नहीं बदली तो वह हिंदू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लेंगी. साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज करते हुए कहा कि उन्हें मंदिरों में पूजा-पाठ करने से फुर्सत मिले तब तो वे प्रदेश का ध्यान रखें.

मायावती ने आजमगढ़, गोरखपुर और वाराणसी मंडल के कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा, भाजपा ने अब तो राजनीतिक स्वार्थ में मीडिया तथा संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर दिया है. इन्होंने लोकतंत्र को ही काफी हद तक कमजोर कर दिया है. तानाशाही और मनमानी का राज चल रहा है. हालात 1975 की इमर्जेंसी से काफी आगे निकल चुके हैं.

बसपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि देश में अब लोकसभा चुनाव और उससे पहले कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से भाजपा ने वर्ष 2014 की तरह ही देश के गरीब, असहाय और मध्यम वर्ग को गुमराह करना शुरू कर दिया है, लेकिन उनकी सरकार के अनुभवों को देखते हुए भाजपा के अच्छे दिन अब नहीं आने वाले हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पूरे देश को ही विपक्ष मुक्त बनाने के लिए सभी विरोधी पार्टियों को कमजोर करने, खत्म करने और तोड़ने के लिए सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय तथा आयकर विभाग जैसी सरकारी मशीनरी का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर रही है.

उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने एक चौथाई वादे भी पूरे नहीं कर सकी. नोटबंदी और जीएसटी के फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था काफी कमजोर होती जा रही है. पूरे देश में गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई तथा अन्य गम्भीर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं. जनता प्रदेश में जल्द होने वाले शहरी निकाय के चुनाव में और उसके बाद लोकसभा आम चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवारों को हराकर इसका जवाब देगी.

नाकाम भाजपा मंदिर निर्माण शुरू करा सकती है

इस बार लोकसभा के चुनाव समय से पहले होने की संभावना व्यक्त करते हुए मायावती ने कहा कि वादे पूरे करने में नाकाम रही भाजपा वोट लेने के लिए लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू करा सकती है.

मायावती ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू कराने का श्रेय अपनी पार्टी को देते हुए कहा कि वर्ष 1989 में बसपा का समर्थन लेने के एवज में रखी गई शर्त पर ही तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशों को अमली जामा पहनाया था. इसके अलावा बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न से नवाजा था.

बसपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उस वक्त भाजपा को यह सब अच्छा नहीं लगा और उसने समय से पहले ही वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया. जब मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू हुई तो भाजपा और संघ ने उसके खिलाफ हिंसक आंदोलन किया.

मायावती ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने और पिछड़े वर्गों के लिए आयोग गठित करने की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक हथकंडे के सिवा कुछ नहीं है.

‘…तो समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म अपना लूंगी’

मायावती ने भाजपा को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के प्रति अपनी सोच नहीं बदली तो वे हिंदू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लेंगी.

मायावती ने आजमगढ़ में पार्टी की एक रैली में कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने हिंदू धर्म की वर्ण व्यवस्था के तहत दलितों और दबे-कुचलों के साथ भेदभाव की परिपाटी को देखकर तत्कालीन शंकराचार्यों और संतों से मजहबी व्यवस्था की इन कमियों को दूर करने का आग्रह किया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसी कारण अंबेडकर ने अपने निधन से कुछ समय पहले नागपुर में अपने अनुयायियों के साथ हिंदू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लिया था. इसके बावजूद हिंदू धर्म की कमियों को दूर नहीं किया गया है.

उन्होंने कहा, मैं भाजपा को खुली चेतावनी देती हूं कि अगर उन्होंने दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों तथा धर्मांतरण करने वाले लोगों के प्रति अपनी हीन, जातिवादी और सांप्रदायिक सोच नहीं बदली तो मुझे भी हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला लेना पड़ेगा.

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा करने से पहले वह शंकराचार्यों, धर्माचार्यों तथा भाजपा के लोगों को अपनी सोच बदलने का मौका दे रही हैं. नहीं तो अंत में और उचित समय पर वह भी अपने करोड़ों अनुयायियों के साथ हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म की दीक्षा ले लेंगी.

हत्या की साजिश रचने का इल्जाम लगाया

मायावती ने भाजपा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जातिवादी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए हैदराबाद में रोहित वेमुला कांड और गुजरात में ऊना कांड कराने का आरोप लगाया.

बसपा अध्यक्ष ने भाजपा पर हाल में जातीय संघर्ष का शिकार हुए सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर गांव में पहुंचने पर उनकी हत्या की साजिश रचने का भी इल्जाम लगाते हुए कहा कि इस जातीय संघर्ष के पीछे भाजपा का राजनीतिक मकसद था.

मायावती ने कहा कि जब उन्होंने इस मामले को राज्यसभा में उठाने की कोशिश की तो उन्हें बोलने नहीं दिया गया. जिसके बाद उन्होंने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नक्शेकदम पर चलते हुए राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा के लोगों ने दलित वोट में अपनी पैठ बनाने के लिए संघ से जुड़े एक दलित को राष्ट्रपति बना दिया.

ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश का विकास नहीं हो सकता

बसपा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया पर तंज करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ को मंदिरों में पूजा-पाठ करने से फुरसत मिले तो वह प्रदेश का ध्यान रखें. मायावती ने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्यमंत्री योगी पिछड़ेपन से गुजर रहे पूर्वांचल का प्रतिनिधि होने के बावजूद इस क्षेत्र को विकसित करने की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं.

उन्होंने कटाक्ष किया, वह ध्यान क्या रखें, उनको मंदिरों में पूजा-पाठ से फुरसत तो मिले…. कभी अपने गोरखनाथ मंदिर में, कभी अयोध्या में तो कभी चित्रकूट में. ऐसी स्थिति में पूर्वांचल तो छोड़ो पूरे प्रदेश का विकास नहीं हो सकता.

भाजपा राज में नया भारत नहीं बन सकता

मायावती ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार अपने वादों के सापेक्ष अभी तक कुछ खास नहीं कर सकी है. यह पिछली सपा सरकार से बुरी तरह पिट चुकी है. पिछली सरकार बेहतरीन नहीं थी, लेकिन यह सरकार उससे भी पिछड़ चुकी है.

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एंड कंपनी अपनी कमियों पर पर्दा डालने के लिए अयोध्या, काशी और मथुरा में चाहे जितनी पूजा-पाठ क्यों ना करते रहें, लेकिन जनता उनकी धार्मिक भावना के बहकावे में नहीं आने वाली. यह सच है कि भाजपा के राज में कभी भी नया भारत नहीं बन सकता.

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग तरह-तरह की नाटकबाजी कर रहे हैं. हर तरफ धर्म और संस्कृति के नाम पर भय, दहशत, आतंक और अफरातफरी का माहौल बनाया जा रहा है. मुस्लिम तथा अल्पसंख्यकों को जीवन गुजारना मुश्किल हो गया है. तथाकथित गोरक्षकों के कारण मुस्लिमों ने गाय पालना छोड़ ही दिया है, हिंदुओं ने भी इससे परहेज शुरू कर दिया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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