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उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव: योगी सरकार की पहली चुनावी परीक्षा

यूपी में 16 नगर निगमों, 198 नगर पालिका परिषद और 438 नगर पंचायतों के लिए नवंबर में तीन चरणों में होंगे चुनाव. अपने चुनाव चिह्न पर उतरेंगे सभी प्रमुख दल.

Yogi Mayawati Akhilesh (PTI)

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, बसपा नेता मायावती और सपा नेता अखिलेश यादव. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सभी राजनीतिक पार्टियां अगले महीने होने वाले नगर निकाय चुनाव को बेहद गम्भीरता से ले रही हैं, मगर ये चुनाव खासकर भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल हैं. पिछले चुनाव में भाजपा ने अन्य दलों पर अपना वर्चस्व कायम किया था और इस बार उसके सामने इसे दोहराने की कड़ी चुनौती है.

उत्तर प्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव की अधिसूचना शुक्रवार को जारी हो गई है. मतदान तीन चरणों में संपन्न होगा. सभी प्रमुख दलों के अपने चिन्ह पर लड़ने के एलान के कारण बेहद महत्वपूर्ण हो चुके ये चुनाव अगले महीने के दूसरे पखवाड़े में तीन चरणों में होंगे.

राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने बताया कि नगरीय निकाय चुनावों की अधिसूचना के तहत तय कार्यक्रम के मुताबिक 22 नवंबर को 24 जिलों में, 26 नवंबर को 25 और 29 नवंबर को 26 जिलों में मतदान होगा.

अग्रवाल के मुताबिक, 16 नगर निगमों, 198 नगर पालिका परिषद और 438 नगर पंचायतों के चुनाव की मतगणना एक दिसंबर को होगी. कुल 36,269 मतदान बूथ और 11,389 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे. कुल 3.32 करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे.

निकाय क्षेत्रों में योगी करेंगे रैलियां

वर्ष 2012 में हुए नगर निकाय के चुनाव में राज्य में महापौर के 12 में से 10 पदों पर भाजपा ने कब्जा किया था और नगर पालिका परिषदों तथा नगर पंचायतों में भी वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. भाजपा इस साल मार्च में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई. ऐसे में आगामी नगर निकाय चुनाव प्रदेश की योगी सरकार की पहली चुनावी परीक्षा होंगे.

इन चुनाव को लेकर भाजपा की गम्भीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुख्यमंत्री योगी द्वारा प्रमुख निकाय क्षेत्रों में रैलियां करने की तैयारी है. इससे पहले शायद ही किसी मुख्यमंत्री ने निकाय चुनावों को इतनी गंभीरता से लिया है.

निकाय चुनाव में भी मोदी का सहारा

भाजपा के प्रांतीय महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने नगर निकाय चुनावों में एक बार फिर भाजपा की जीत का विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह सही है कि नगर निगमों और नगर पालिकाओं के पिछले चुनाव में भाजपा का दबदबा रहा है लेकिन एंटी इंकम्बेंसी जैसी कोई बात नहीं है. भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास कार्यों के बलबूते निकायों में फिर सरकार बनाएगी.

उन्होंने कहा कि पार्टी का प्रयास है कि योगी के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा और अन्य वरिष्ठ नेता भी निकाय चुनाव प्रचार में उतरें. पार्टी राज्य सरकार की पिछले छह माह की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाएगी. अधिकांश सीटें हम जीत रहे हैं.

राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012 में हुए नगर निकाय चुनाव में 12 में से 10 नगर निगमों मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा, कानपुर नगर, झांसी, लखनऊ, गोरखपुर और वाराणसी में भाजपा के महापौर जीते थे.

दो अन्य सीटों बरेली तथा इलाहाबाद पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुए थे. इस बार मथुरा, फिरोजाबाद, फैजाबाद और सहारनपुर के रूप में चार और नगर निगम क्षेत्र बनाए गए हैं, जो पहली बार निकाय चुनाव के दौर से गुजरेंगे.

इसके अलावा नगर पालिका अध्यक्ष के 194 पदों में से 42 पर भाजपा ने और 15 पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था. सपा का खाता भी नहीं खुला था, जबकि 130 सीटों पर निर्दलीय अथवा अन्य दलों द्वारा समर्थित प्रत्याशी जीते थे. पांच सीटें अन्य के खाते में गई थीं. इसके अलावा 423 नगर पंचायतों में से 36 में अध्यक्ष के पद पर भाजपा ने जीत हासिल की थी, जबकि 21 पर कांग्रेस ने कब्जा किया था.

पिछले चुनाव में बड़ी संख्या में जीते थे भाजपा समर्थित उम्मीदवार

वर्ष 2012 के चुनाव में प्रदेश के 12 नगर निगमों में पार्षद के 980 पदों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने 304 सीटें जबकि कांग्रेस ने 100 सीटें जीती थीं. इसी तरह नगर पालिका परिषद सभासद के कुल 5077 पदों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने 506 जबकि कांग्रेस ने 179 सीटों पर कब्जा जमाया था. साथ ही 4323 सीटें निर्दलीय अथवा समर्थित प्रत्याशियों ने जीती थीं.

विजय बहादुर पाठक ने बताया कि भाजपा हमेशा से अपने चिन्ह पर निकाय चुनाव लड़ती रही है. हालांकि अनेक स्थानों पर दल के प्रत्याशी कुछ कारणों से पार्टी का चुनाव निशान नहीं लेते थे, तो उन्हें पार्टी केवल समर्थन दे देती थी. पिछले चुनावों में जो भी निर्दलीय प्रत्याशी जीते उनमें से बड़ी संख्या में भाजपा समर्थित थे.

अखिलेश को अपने विकास से आस

निकाय चुनाव को लेकर अन्य दल भी कमर कस रहे हैं. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कह चुके हैं कि अगर लखनऊ मेट्रो, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, समाजवादी पेंशन योजना, समाजवादी आवास योजना समेत उनकी पिछली सरकार के तमाम विकास कार्यों को देखते हुए वोट पड़े तो ज्यादातर नगर निकायों में पार्टी के प्रत्याशी चुने जाएंगे.

सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी ने कहा कि एक-दो दिन में प्रत्याशी घोषित हो जाएंगे. फिलहाल अखिलेश के चुनाव प्रचार मैदान में उतरने का कोई कार्यक्रम नहीं है. जहां तक मुद्दों का सवाल है तो हर व्यक्ति परेशान है और सरकार ने खुद ही उन्हें मुद्दे उपलब्ध करा दिए हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र मदान ने बताया कि उनकी पार्टी नगर निगमों, नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों में अपने प्रत्याशी खड़े करती रही है. इस बार यह चुनाव बेहद अहमियत रखते हैं क्योंकि इसके बाद सीधे 2019 का लोकसभा चुनाव होगा, लिहाजा निकाय चुनाव से पार्टी का आधार मजबूत होगा. चुनाव में पार्टी के राज्य स्तरीय नेता प्रचार करेंगे. जहां जरूरत पड़ेगी वहां केंद्रीय नेताओं से मदद ली जाएगी.

बसपा पहली बार अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी

प्रदेश में चार बार सत्तारूढ़ हो चुकी बसपा पहली बार अपने चुनाव चिन्ह पर नगरीय निकाय चुनाव लड़ रही है. गत विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद बसपा के लिए नगरीय निकाय चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं.

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में पहली बार नगर निकाय चुनाव में ताल ठोंक रही है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली यह पार्टी इन स्थानीय चुनावों को राज्य में अपनी सियासी पारी की औपचारिक शुरुआत मान रही है.

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह का कहना है कि उनका दल नगर निगमों नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भाजपा के भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाएगा.

पहली बार मतदाताओं को सभी सूचनाएं मोबाइल पर

चुनाव के चरणों का ब्यौरा देते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने बताया कि पहले चरण में 24 जिलों में मतदान होगा. इसमें पांच नगर निगम, 71 नगर पालिका परिषद और 154 नगर पंचायतें शामिल हैं. दूसरे चरण में 25 जिलों में मतदान होगा. इसमें छह नगर निगम, 51 नगर पालिका परिषद और 132 नगर पंचायत शामिल हैं. तीसरे चरण में 26 जिलों में मतदान होगा. इसमें पांच नगर निगम, 76 नगर पालिका परिषद और 152 नगर पंचायत शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि अधिसूचना जारी हो चुकी है. इस बार मतदाताओं को आयोग की वेबसाइट पर मोबाइल नंबर पंजीकृत करने का विकल्प दिया गया है. सभी सूचनाएं और परिणाम मोबाइल नंबर पर तत्काल उपलब्ध करा दी जाएंगी. ऐसा देश में पहली बार हो रहा है.

अग्रवाल ने बताया कि दस प्रतिशत पोलिंग बूथ अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में रखे गए हैं. वहां चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी और सीसीटीवी लगाए जाएंगे.

उन्होंने बताया कि नगर निगम के मेयर और पार्षद पदों के चुनाव इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से होंगे, जबकि नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत अध्यक्षों एवं सदस्यों का निर्वाचन बैलेट पेपर के माध्यम से होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)