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रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना है तो जमा करो 50,000 रुपये

उत्तर दिल्ली नगर निगम 2794 रुपये के बजट घाटे से जूझ रहा है. इस संस्था ने इस साल रामलीला मैदान से 21 लाख रुपये कमाए हैं और 10 लाख और कमाने की उम्मीद है.

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश के बाद पुलिस जंतर मंतर से प्रदर्शनकारियों को हटाने में लगी है. सोमवार को पुलिस और निकाय अधिकारियों ने 18 प्रदर्शनकारियों के समूह को जंतर मंतर से खदेड़ा, वहीं एमसीडी ने रामलीला मैदान प्रदर्शनकारियों को देने के बदले में 50,000 रुपये मांगे हैं. साथ ही एक समय पर एक पार्टी को ही रामलीला मैदान में जगह देने की बात कही है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) में एक अपील दायर करने की बात कही है, क्योंकि एमसीडी रामलीला मैदान से रोज़ 50,000 रुपये का मुनाफ़ा कमाती है और प्रदर्शनकारियों को मुफ़्त में इस जगह को नहीं देगी.

एमसीडी ने किसी विरोध प्रदर्शन के एवज में 50,000 रुपये की मांग की है. उत्तर दिल्ली नगर निगम में बागवानी विभाग के निदेशक रणबीर सिंह ने कहा, ‘अभी तक हमें जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों की तरफ़ से कोई भी अनुरोध नहीं मिला है कि वे लोग यहां प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन हम नियमों के अनुसार एक समय में एक पार्टी को ये जगह दे सकते हैं और इसके एवज में हम 50,000 रुपये लेंगे.’

उन्होंने ये भी कहा, ‘इस जगह से हमें बहुत मुनाफ़ा होता है इसके अलावा इस जगह पर बहुत सारे प्रदर्शन नहीं किए जा सकते हैं क्योंकि ये जगह छोटी है और पार्किंग का भी पर्याप्त स्थान नहीं है. इस समय हम 2794 रुपये के बजट घाटे में उलझे हैं. साथ ही इस संस्था ने इस साल रामलीला मैदान से 21 लाख रुपये कमाए हैं और 10 लाख और कमाने की उम्मीद है, पार्किंग से भी 8 लाख रुपये का मुनाफ़ा होता है ऐसे में हम मुफ़्त में ये जगह किसी को नहीं दे सकते.’

एनजीटी ने 5 अक्टूबर को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में सभी प्रदर्शनों और लोगों के इकट्ठा होने को तत्काल रोकने का निर्देश दिल्ली सरकार को दिया था.

न्यायमूर्ति आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को कनॉट प्लेस के निकट स्थित जंतर-मंतर रोड से सभी अस्थायी ढांचों, लाउडस्पीकरों और जन उद्घोषणा प्रणालियों को हटाने का भी निर्देश दिया है.

पीठ ने कहा, प्रतिवादी दिल्ली सरकार, एनडीएमसी और दिल्ली के पुलिस आयुक्त जंतर-मंतर पर धरना, प्रदर्शन, आंदोलनों, लोगों के इकट्ठा होने, लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल आदि को तुरंत रोकें.

एनजीटी ने प्रदर्शनकारियों, आंदोलनकारियों और धरने पर बैठे लोगों को वैकल्पिक स्थल के रूप में अजमेरी गेट स्थित रामलीला मैदान में तुरंत स्थानांतरित करने का अधिकारियों को निर्देश दिया है.

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक़ सोमवार को एनजीटी ने दिल्ली पुलिस से अपने उस आदेश पर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा जिसमें उसने राष्ट्रीय राजधानी के बीचो-बीच स्थित जंतर-मंतर इलाके में सभी तरह के प्रदर्शनों और लोगों के जुटने पर रोक लगा दी थी.

अधिकरण ने हाल ही में यहां ऐतिहासिक जंतर-मंतर के आस पास सभी तरह के प्रदर्शनों और धरनों पर पाबंदी लगाते हुए कहा था कि ऐसी गतिविधियों से पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन होता है. पिछले कई दशकों से जंतर-मंतर कई प्रदर्शनों और धरनों का गवाह बनता रहा है.

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ को दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए वकील ने सूचित किया कि इस स्थल को पहले ही खाली करा लिया गया है और वहां बने सामयिक और अस्थायी ढांचों को सड़क के उस हिस्से से हटा दिया गया है. इसके बाद अधिकरण ने पुलिस से अपने आदेश पर अनुपालन रिपोर्ट तलब की.

अधिकरण दिल्ली निवासी हरिसिमरन सिंह, जयवीर सिंह और जोरावर सिंह द्वारा याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उन्होंने एनजीटी के आदेश को लागू कराए जाने की मांग की थी.

उत्तर निगम की मेयर प्रीति अग्रवाल ने भी इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से कहा, ‘हमें इस केस में पार्टी भी नहीं बनाया गया, कोर्ट ने दिल्ली सरकार, उत्तर दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाने का आदेश दिया और हमें किसी भी प्रकार के कोई आदेश नहीं दिए गए हैं. हम कोर्ट से अपील करेंगे कि हमारा पक्ष भी सुना जाए.’

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अगर हमें पूरा भुगतान दिया जाए तो हमें कोई भी समस्या नहीं है. लेकिन अगर हमें इस जगह को मुफ़्त में देने को कहा जाएगा तो हम कोर्ट से कोई दूसरा विकल्प प्रदान कराने की मांग करेंगे, जिससे हम अपने घाटे की भरपाई कर पाएं. साथ ही हम एक समय पर एक पार्टी को ही जगह प्रयोग करने देते हैं बल्कि जंतर-मंतर पर बहुत सारे प्रदर्शन एक साथ होते हैं.’

रामलीला मैदान में एक सभा आयोजित करने के लिए किसी को नागरिक निकाय के साथ उपलब्धता की जांच करने की जरूरत होती है, जिसके बाद उन्हें दिल्ली पुलिस से कोई भी आपत्ति न होने का प्रमाण पत्र प्राप्त करना होता है और फिर भुगतान कर के स्थान बुक करना होता है.

बहराल सोमवार को जंतर-मंतर से पुलिस और स्थानीय निकाय अधिकारियों ने उन तंबुओं तथा अस्थायी ढांचों को हटा दिया जिन्हें पूर्व सैन्यकर्मियों ने वन रैंक-वन पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर यहां प्रदर्शन के लिए स्थापित किया था. सैन्यकर्मियों समेत 18 प्रदर्शनकारी समूहों को जंतर-मंतर से खदेड़ा गया.