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प्रॉक्सिमा सेंचुरी का हो सकता है अपना ग्रह मंडल: अध्ययन

प्रॉक्सिमा सेंचुरी सूर्य का सबसे करीबी तारा है. यह एक छोटा लाल बौना ग्रह है जो हमसे चार प्रकाश वर्ष की दूरी पर है.

Proxima centauri

बाईं तरफ चमकीला तारा अल्फा सेंचुरी है. दरअसल इसमें दो चमकदार तारे एक साथ हैं अल्फा सेंचुरी ए और बी. दाएं तरफ चमकदार तारा बीटा सेंचुरी है जिसे अलग तारामंडल माना जाता है. लाल घेरे में धुंधला सा तारा प्रॉक्सिमा सेंचुरी है. फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स

लंदन: वैज्ञानिकों को प्रॉक्सिमा सेंचुरी के आसपास धूल की परत मिली है. इस नतीजे से संकेत मिलता है कि हमारे सौर मंडल का सबसे करीबी तारा व्यापक रूप से ग्रह मंडल की मेजबानी करता है.

चिली स्थित अटाकामा लार्ज मिलीमीटर अरे (एएलएमए) प्रेक्षणशाला के नये आकलन से खुलासा हुआ कि क्षेत्र में ठंडी धूल से आने वाली रोशनी प्रॉक्सिमा सेंचुरी से उस दूरी की तुलना में एक से चार गुना है जितनी कि धरती से सूर्य की दूरी है.

आंकड़े ज्यादा ठंडी बाहरी धूल की परत की मौजूदगी का भी संकेत देते हैं, इनसे ग्रह मंडल की मौजूदगी का संकेत भी मिल सकता है. यह ढांचे सौर मंडल के ज्यादा बृहत परत की तरह हैं और इनके चट्टानों और बर्फ के कणों से बने होने की भी उम्मीद है.

प्रॉक्सिमा सेंचुरी सूर्य का सबसे करीबी तारा है. यह एक छोटा लाल बौना ग्रह है जो हमसे चार प्रकाश वर्ष की दूरी पर है. धरती के आकार का प्रॉक्सिमा बी इसकी परिक्रमा करता है और इसकी खोज 2016 में हुई थी. यह सौर मंडल के इतर सबसे करीबी ग्रह है और इस ग्रह मंडल में एक ग्रह के अलावा भी चीजें हैं.

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(फोटो साभार: sciencenews.org)

एएलएमए के नये आकलन से इस तारे के आसपास ठंडी ब्रमांडीय धूल के प्रसार का खुलासा हुआ है. स्पेन में इंस्टीट्यूटो डी एस्ट्रोफिसिका डी एंडालुका (सीएसआईसी) के ग्यूलीम आंगलाडा ने कहा, प्रॉक्सिमा के आसपास की धूल महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थलीय ग्रह प्रॉक्सिमा बी की खोज के बाद यह व्यापक ग्रह मंडल की मौजूदगी का पहला संकेत है और हमारे सूर्य के सबसे करीबी तारे के पास सिर्फ एक ग्रह नहीं है.

धूल की परत उस सामग्री की होती है जो ग्रह जैसी बड़ी संरचना नहीं बनातीं. इस परत में चट्टान और बर्फ के कण आकार में भिन्न-भिन्न होते हैं. सबसे छोटा कण एक मिलीमीटर से भी छोटा होता है तो बड़ा होकर धूमकेतू की तरह कई किलोमीटर व्यास का भी है.

इस परत का कुल द्रव्यमान धरती के द्रव्यमान का करीब 100वां हिस्सा है. इस परत का तापमान करीब माइनस 230 डिग्री सेल्सियस है जो हमारे बाहरी सौर मंडल की क्यूपर परत जितनी ठंडी है.