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अपनी चमक फीकी नहीं पड़ने देने वाले तारे का पता चला

वैज्ञानिकों ने एक तारे आश्चर्यजनक तारे की खोज की है जिसने अपनी चमक फीकी नहीं पड़ने दी, जबकि 50 साल से भी अधिक समय तक इसमें कई बार विस्फोट हुआ.

Artist’s impression of dust formation around a supernova explosion

सुपरनोवा (फोटो: विकीमीडिया कॉमन्स)

लॉस एंजिलिस: वैज्ञानिकों ने एक तारे के बारे में आश्चर्यजनक खोज की है और उनके मुताबिक इस तारे ने अपनी चमक फीकी नहीं पड़ने दी, जबकि 50 साल से भी अधिक समय तक कई बार इसमें विस्फोट हुआ.

किसी तारे में जब विस्फोट की घटनाएं होती हैं तो उसमें ऊर्जा पैदा होती है, इस ऊर्जा अथवा चमक को सुपरनोवा कहते हैं. कई बार एक तारे के विस्फोट से जितनी ऊर्जा निकलती है, वह सौरमंडल के सबसे ताकतवर ग्रह सूर्य के पूरे जीवन से निकलने वाली ऊर्जा से भी ज्यादा होती है.

ज्यादातर सुपरनोवा एक विस्फोट के बाद ही मृत हो जाते हैं यानी कुछ महीनों या हफ्तों में उनकी चमक फीकी पड़ती जाती है. लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसे तारे का पता लगाया है जिसमें पांच विस्फोट होने के बाद भी वह वैसे ही चमकदार बना हुआ है. पिछले दो साल से इसमें विस्फोट की घटना बरकरार है. यह समय सामान्य सुपरनोवा के समय से छह गुना ज्यादा है.

तारों के विस्फोट की घटना (सुपरनोवा) को तारों की चमक फीकी पड़ने के लिए एक वजह माना जाता है. अमेरिका स्थित लॉरेंस बर्कले नेशनल लैबोरेट्री के वरिष्ठ वैज्ञानिक पीटर नुगेंट ने बताया कि उन्होंने पाया कि यह सुपरनोवा ऐसा नहीं दिखता जैसा कि उन्होंने पहले कभी देखा हो. पिछले दो दशकों में करीब 5,000 सुपरनोवा का पता लगाने के बाद यह तथ्य सामने आया है.

इस सुपरनोवा का नाम आईपीटीएफ14 एचएलएस है. इसका पता सितंबर 2014 में चला. उस वक्त यह एक साधारण सुपरनोवा की तरह दिखता था. कई महीनों बाद अमेरिका की लास कंबर्स वेधशाला एलसीओ के खगोल वैज्ञानिकों ने पाया कि सुपरनोवा फिर से चमकीला होता जा रहा है.

एलसीओ में फेलो लायर अरकावी ने कहा कि इस सुपरनोवा ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए. तारों में होने वाले विस्फोट की पिछले एक दशक से अपने अध्ययन के दौरान यह सबसे बड़ी पहेली है, जिसका मैंने सामना किया.