कैंपस

भोपाल: लॉ यूनिवर्सिटी में निदेशक के इस्तीफे की मांग को लेकर दो दिन से धरने पर बैठे विद्यार्थी

भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने निदेशक पर छात्राओं के साथ ग़लत व्यवहार और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाये हैं. निदेशक का कहना है कि छात्रों को भड़काया जा रहा है.

फोटो: NLIU Protest/twitter

फोटो: NLIU Protest/twitter

भोपाल: नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) के छात्र-छात्राओं ने यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर प्रोफेसर एसएस सिंह पर बेवजह परेशान करने के आरोप लगाते हुए उन्हें पद से तत्काल हटाने की मांग की है.

यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्रायें गुरुवार सुबह से सिंह को हटाए जाने समेत अपनी 50 मांगों के लिए विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठे हुए हैं.

धरना स्थल पर बैठे बीए-एलएलबी के अंतिम वर्ष के एक छात्र ने नाम न बताने की शर्त पर शनिवार को बताया, ‘एनएलआईयू की छात्र-छात्राएं पिछले दो दिनों से यूनिवर्सिटी परिसर में धरने पर बैठे हुए हैं. हमारा धरना रात में भी जारी रहता है. जब तक यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर सिंह को पद से हटाया नहीं जाता है, तब तक हमारा धरना जारी रहेगा.’

छात्र ने बताया, ‘सिंह हमें बेवजह परेशान करते रहते हैं. वह छात्राओं को अपने कक्ष में बुलाकर चार-पांच अन्य पुरूषों के सामने उनके पहने हुए कपड़ों पर भद्दी एवं लज्जित करने वाली टिप्पणियां करते हैं. छात्राओं को कहते हैं कि तुम यहां पर अपनी इज्जत एवं शर्म बेच कर आई हो. वह छात्राओं से यह भी कहते हैं कि अच्छा लोशन लगाकर आई हो,अच्छी महक रही हो,बहुत सुंदर लग रही हो.’

उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा वह विद्यार्थियों के साथ की जा रही जातिगत भेदभाव, लैंगिक भेदभाव एवं भ्रष्टाचार के आरोपों में कोई कार्रवाई नहीं करते हैं.’

छात्रों की शिकायत परीक्षा और कॉपी जांचने को लेकर भी है. एक छात्र ने बताया, ‘हमारी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं भी ठीक तरह से नहीं जांची जाती हैं, जिसके कारण इस सेमेस्टर में 100 में से 85 विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया है.’

उन्होंने कहा, ‘हमारी इन सारी समस्याओं की जड़ डायरेक्टर सिंह ही हैं. अब हमारे सब्र का बांध टूट चुका है इसलिए जब तक उन्हें हटाया नहीं जाता है, जब तक हमारा धरना जारी रहेगा.’

फोटो: NLIU Protest/twitter

फोटो: NLIU Protest/twitter

वहीं इन आरोपों को डायरेक्टर सिंह ने निराधार एवं आधारहीन बताया है.

सिंह ने कहा, ‘डायरेक्टर के पद पर मुझे 10 साल होने वाले हैं. विद्यार्थी कह रहे हैं कि साढ़े नौ साल तक तो मैं बहुत अच्छा था लेकिन अब अचानक बुरा हो गया हूं. मैं विश्वविद्यालय में अनुशासन में रहने की बात करता हूं, विद्यार्थियों को आज़ादी चाहिए इसलिए वे यह बेबुनियाद आरोप मुझ पर लगा रहे हैं.’

उन्होंने बताया इसके अलावा विश्वविद्यालय में नए डायरेक्टर के चयन के लिए भी बात चल रही है. नए डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर भी छात्रों को भड़काया जा रहा है. कुछ फैकल्टी वाले अपने फायदे के लिए विद्यार्थियों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

NLIU Protest4

विरोध के लिए बनाए गये ट्विटर पेज पर छात्रों ने अपनी मांगे कुछ इस तरह ज़ाहिर की हैं (फोटो: NLIU Protest/twitter )

सिंह ने कहा, विद्यार्थी किसी से बात करने के लिए तैयार नहीं है. वहीं दूसरी ओर छात्र कैंपस में जातीय भेदभाव का भी आरोप लगा रहे हैं.

लाइव लॉ वेबसाइट की ख़बर के अनुसार एक अनुसूचित जाति के छात्र जिसकी बहन कैंसर से जूझ रही है और मां की मृत्यु भी कैंसर से हुई है और अब वह परिवार का अकेला कमाने वाला है. इस कारण से उसने कक्षा में उपस्थिति में मानवीय आधार पर छूट मांगी, जिस पर डायरेक्टर ने जवाब दिया कि विद्यालय मानवीय आधार पर नहीं चलता.

बाद में जब उसके एक मित्र ने डायरेक्टर से जाकर अपील की तो उसको जवाब मिला कि वह तो सामान्य जाति का है तो उसको उस अनुसूचित जाति के लड़के की सहायता नहीं  करनी चाहिए.

इस छात्र के अनुसार ही डायरेक्टर ने यह कहा, ‘इन लोगों (अनुसूचित जाति) की वजह से तुम्हारी(सामान्य जाति) नौकरियां जा रही हैं.’ अनुसूचित जाति का छात्र डर के कारण इस घटना की शिकायत तक नहीं कर सका है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के आधार पर)