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अपूर्व असरानी का अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की ज्यूरी से इस्तीफा

वहीं फिल्म एस दुर्गा के निर्देशक ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के अधिकारियों के ख़िलाफ़ दायर की केरल हाईकोर्ट में याचिका.

अपूर्व असरानी, (फोटो साभार: फेसबुक)

अपूर्व असरानी, (फोटो साभार: फेसबुक)

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) की पैनोरमा श्रेणी से दो फिल्मों को हटाने के फैसले के बाद उठे विवाद के बाद पटकथा लेखक अपूर्व असरानी ने बुधवार को घोषणा की कि वे निर्णायक समिति के सदस्य पद से इस्तीफा दे रहे हैं.


इससे पहले, मंगलवार को फिल्मकार सुजॉय घोष ने कहा था कि वह इंडियन पैनोरमा की निर्णायक समिति का अध्यक्ष पद छोड़ रहे हैं. असरानी ने कहा कि उनकी अंतरात्मा उन्हें इस महोत्सव में शामिल होने की इजाजत नहीं दे रही है. यह फिल्म महोत्सव 20 से 28 नवंबर को गोवा में आयोजित होने वाला है.

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘मैं निर्णायक समिति के अध्यक्ष के साथ हूं. कुछ बेहद खरी और ईमानदार फिल्मों के प्रति हमारी भी कुछ जिम्मेदारी है और कहीं न कहीं उसे निभाने में हम असफल हुए हैं. मेरा ज़मीर गोवा में होने वाले महोत्सव में शामिल होने की मुझे इजाजत नहीं देगा.’

अलीगढ़ के पटकथा लेखक ने पुष्टि की है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और वह इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहते.

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 13 सदस्यीय निर्णायक समिति की सिफारिशों को खारिज करते हुए मलयालम फिल्म एस दुर्गा और मराठी फिल्म न्यूड को भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 48वें संस्करण से हटा दिया था.

मंगलवार को एस दुर्गा के निर्देशक सनल कुमार शशिधरन ने मंत्रालय और आईएफएफआई के अधिकारियों के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की.

शशिधरन ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि मंत्रालय नियमों का पालन करे और निर्णायक मंडल के फैसले की अनदेखी न करे. वे एक लोकतंत्र की तरफ व्यवहार करें ना कि तानाशाही की तरह.’

उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि मंत्रालय निर्णायक मंडल के फैसले का कार्यान्वयन करे और फिल्मों को अंतिम सूची में शामिल करे.

याचिका में भारत संघ, जिसका प्रतिनिधित्व सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव करेंगे, फिल्म महोत्सव निदेशालय, 48वें आईएफएफआई, गोवा के ज्यूरी फॉर फीचर फिल्म एंड द इंडियन पैनोरमा के प्रमुख को प्रतिवादी बनाया गया है.

याचिका के अनुसार मंत्रालय ने कानून के अधिकार के बिना निर्णायक मंडल के फैसले को मनमाने तरीके से खारिज किया और याचिकाकर्ता को नोटिस दिए बिना तथा साथ ही बिना कोई कारण बताए, उनकी फिल्म को भारतीय पैनोरमा खंड से हटा दिया.

फिल्म को रोटरडैम 2017 अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव में हिवोस टाइगर अवार्ड दिया गया था. याचिका में कहा गया कि कुछ उपद्रवी तत्वों ने फिल्म के मूल शीर्षक सेक्सी दुर्गा को देवी दुर्गा की तरफ संकेत के तौर पर लेते हुए फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया था. बाद में फिल्म का शीर्षक बदलकर एस दुर्गा कर दिया गया.

याचिका के अनुसार, फिल्म के संदर्भ एवं पृष्ठभूमि को समझे बिना, इस तरह के कट्टरपंथी तत्वों ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आधारहीन नजरिये के आधार पर परोक्ष मकसद के साथ फिल्म का विरोध किया और याचिकाकर्ता को धमकी भी दी.

इसमें कहा गया कि फिल्म में देवी दुर्गा या किसी भी दूसरी धार्मिक छवियों के खिलाफ कुछ भी नहीं है. इसमें कोई अश्लीलता नहीं है और फिल्म का विरोध करने वालों ने इसे देखने या समझाने की कोई कोशिश नहीं की.