भारत

मू​डीज़ ने भारत की रेटिंग बढ़ाई, कांग्रेस ने कहा, मोदी-मूडी की जोड़ी देश का मूड समझने में नाकाम

कांग्रेस ने पूछा, अगर इन रेटिंग रिपोर्टों को सही मान भी लिया जाए तो आर्थिक विकास दर और सकल घरेलू उत्पाद में लगातार गिरावट क्यों आ रही है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भारत की रेटिंग एक पायदान ऊपर उठाते हुए ‘बीएए2’ कर दी है. रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि भारत में लगातार आर्थिक और संस्थागत सुधारों से वृद्धि संभावनाएं बेहतर हुई हैं.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने मूडीज़ और नरेंद्र मोदी सरकार दोनों पर हमला बोला है. भारत की वित्तीय साख में सुधार को देश की जमीनी सच्चाई से दूर बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार विदेशी रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट की आड़ में देश का मूड नहीं समझ पा रही है.

कांग्रेस प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने संवाददाताओं से कहा कि देश में चुनावों से पहले किसी विदेशी एजेंसी की क्रेटिड रेटिंग जारी हो जाती है, लेकिन अब तक किसी भारतीय एजेंसी की कोई रेटिंग नहीं आई है जो देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को उजागर कर सके. अगर इन रेटिंग रिपोर्टों को सही मान भी लिया जाए तो आर्थिक विकास दर और सकल घरेलू उत्पाद में लगातार गिरावट क्यों आ रही है.

अमेरिका स्थित इस एजेंसी ने भारत की रेटिंग को ‘बीएए3’ से एक पायदान ऊपर उठाते हुए ‘बीएए2’ कर दिया. हालांकि, इसके साथ ही भारत के बारे में परिदृश्य को जो कि पहले ‘सकरात्मक’ था उसे ‘स्थिर’ कर दिया. एजेंसी ने कहा कि भारत में ऋण के बढ़ते स्तर को सुधारों से स्थिर करने में मदद मिलेगी.

देश की रेटिंग में सुधार से सरकार, सरकारी संगठनों और बैंकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से अपेक्षाकृत कम ब्याज और अधिक अनुकूल शर्तों पर कर्ज मिलने की संभावना बढ़ जाती है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मूडीज़ के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे भारत सरकार द्वारा किए गए सुधारों को ‘देरी से दी गई मान्यता’ बताया. उन्होंने कहा कि सरकार सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ती रहेगी और ग्रामीण क्षेत्रों तथा ढांचागत परियोजनाओं में खर्च बढ़ाने पर उसका जोर रहेगा.

सरकारी अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इसके बाद एस एंड पी और फिच जैसी अन्य रेटिंग एजेंसियां भी इसी तरह के कदम उठाएंगी.

भारत की रेटिंग में सुधार करते हुए मूडीज़ ने हाल ही में लागू माल एवं सेवाकर (जीएसटी), मौद्रिक नीति की रूपरेखा, बैंकों की गैर-निष्पादित राशि का निपटान करने के उपायों और अर्थव्यवस्था के ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों को औपचारिक तंत्र के दायरे में लाने के प्रयासों पर गौर किया.

भारत की रैंकिंग को निवेश ग्रेड के सबसे निचले पायदान से एक पायदान ऊपर उठाने से भारत अब फिलीपीन और इटली के साथ पहुंच गया है.

मूडीज़ ने इससे पहले 2004 में भारत की रेटिंग को ‘बीए1’ से सुधारकर निवेश की सबसे निचली श्रेणी ‘बीएए3’ में रखा था. यह श्रेणी कबाड़ मानी जाने वाली श्रेणी से एक पायदान ऊपर थी. अब भारत को बीएए2 श्रेणी में लाया गया है जो कि निवेश की कबाड़ श्रेणी से दो पायदान ऊपर है.

मूडीज़ ने इससे पहले 2015 में भारत के रेटिंग परिदृश्य को स्थिर से सकारात्मक किया था. मूडीज़ द्वारा भारत की रेटिंग में सुधार का यह कदम विश्व बैंक द्वारा भारत को कारोबार सुगमता के मामले में 30 पायदान ऊपर उठाकर शीर्ष 100 देशों में शामिल करने के कुछ ही सप्ताह बाद आया है.

‘देश की जमीनी हकीकत बहुत खराब है’

कांग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज़ द्वारा भारत की वित्तीय साख में सुधार को देश की जमीनी सच्चाई से दूर बताते हुए कहा है कि मोदी सरकार विदेशी रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट की आड़ में देश का मूड नहीं समझ पा रही है.

कांग्रेस प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने कहा कि देश में विभिन्न चुनावों से पहले किसी विदेशी एजेंसी की क्रेटिड रेटिंग जारी हो जाती है, लेकिन अब तक किसी भारतीय एजेंसी की कोई रेटिंग नहीं आई है जो देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को उजागर कर सके. शुक्ला ने कहा कि अगर इन रेटिंग रिपोर्टों को सही मान भी लिया जाए तो आर्थिक विकास दर और सकल घरेलू उत्पाद में लगातार गिरावट क्यों आ रही है.

उन्होंने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर देश की जमीनी हकीकत बहुत खराब है. शुक्ला ने कहा कि मोदी जी बताएं कि क्या वह वाशिंगटन से चुनाव लड़ना चाहते हैं.

इससे पहले कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को नष्ट करने के बाद मोदी सरकार अपनी खोई साख को छुपाने के लिए इस तरह की रिपोर्टों को तिनके की तरह बटोर रही है.

उन्होंने कहा मोदी जी और मूडी की जोड़ी, दोनों देश का मूड भांपने में पूरी तरह से नाकाम रही है. सुरजेवाला ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें यह याद रखना चाहिए कि मूडी, एस एंड पी और अन्य रेटिंग एजेंसियां अमेरिका में आर्थिक मंदी से पहले हालात का अंदाजा लगाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई थीं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)