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गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए योजना बनाए केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

स्वयंभू कथावाचक आसाराम बापू की संलिप्तता वाले बलात्कार मामलों में गवाहों की सुरक्षा को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान उठे इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों से भी जवाब मांगा है.

(फोटो: पीटीआई)

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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को  केंद्र से सवाल किया कि देश में गवाहों की सुरक्षा के लिये एक योजना का मसौदा तैयार क्यों नहीं हो सकता जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी कानून में पहले से ही इस बारे में स्पष्ट प्रावधान हैं.

न्यायालय ने कहा कि गृह मंत्रालय कम से कम गवाह सुरक्षा कार्यक्रम का मसौदा तो तैयार कर ही सकता है. साथ ही शीर्ष अदालत ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा कि वह इस मुद्दे पर अपने सुझाव दें.

न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा, ‘राष्ट्रीय जांच एजेंसी कानून में पहले से ही गवाह सुरक्षा के स्पष्ट प्रावधान हैं. सभी के लिये ऐसा क्यों नहीं हो सकता.’

शीर्ष अदालत में यह मामला स्वयंभू कथावाचक आसाराम बापू की संलिप्तता वाले बलात्कार मामलों में गवाहों की सुरक्षा के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा.

पीठ ने कहा, ‘हम समझते हैं कि लाखों मुकदमे हैं परंतु संवेदनशील मामलों के लिये तो ऐसा किया ही जा सकता है. गृह मंत्रालय क्यों नहीं गवाहों की सुरक्षा के बारे में कार्यक्रम का मसौदा तैयार करता.’

शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों को भी अपने अपने गवाह संरक्षण कार्यक्रम पर अमल के बारे में छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

इस मामले में न्यायालय की मदद के लिये न्याय मित्र नियुक्त अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने पीठ से कहा कि उन्होंने केंद्र और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और गृह सचिवों को इस विषय पर पत्र लिखे हैं.

पीठ ने राज्यों से उनके गवाह सुरक्षा कार्यक्रम और इस संबंध में उठाये गये कदमों के बारे में भी जानकारी मांगी है.

आसाराम बापू की संलिप्तता वाले बलात्कार मामलों में न्यायालय ने याचिककर्ताओं से, जो आसाराम से संबंधित बलात्कार के मामले में गवाह हैं, कहा था कि गवाह सुरक्षा कार्यक्रम के मामले में सभी राज्यों को प्रतिवादी बनाएं.

याचिकाकर्ताओं ने आसाराम के खिलाफ मामलों में गवाहों पर हमले और उनके लापता होने की घटनाओं की जांच कराने का भी अनुरोध किया है.

न्यायालय ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा से कहा था कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में गवाहों को सुरक्षा प्रदान करें. इस मामले में तीन गवाह उत्तर प्रदेश में हैं जबकि एक गवाह हरियाणा में है.