भारत

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला: पक्ष में फैसला देने के लिए सीबीआई जज को मिला था 100 करोड़ का ऑफर

सीबीआई कोर्ट में मामले को सुन रहे जज बृजगोपाल लोया के परिजनों का कहना है कि लोया को जल्दी और मनमुताबिक फैसला देने के एवज में पैसे और ज़मीन की पेशकश की गई थी.

सीबीआई जज बृजगोपाल लोया, सोहराबुद्दीन और कौसर बी, अमित शाह (फोटो साभार: द कारवां/फेसबुक/पीटीआई)

सीबीआई जज बृजगोपाल लोया, सोहराबुद्दीन और कौसर बी, अमित शाह (फोटो साभार: द कारवां/फेसबुक/पीटीआई)

गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख़ एनकाउंटर मामले की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सुनवाई कर रहे जज बृजगोपाल लोया की मौत पर उठे सवालों के बाद उनके परिवार ने मामले से जुड़े कुछ और खुलासे किए हैं.

द कारवां पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार लोया की बहन अनुराधा बियानी ने बताया कि उनके भाई बृजगोपाल लोया को उस समय बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह द्वारा सोहराबुद्दीन मामले में उनके कहे अनुसार फैसला देने के एवज में 100 करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी.

पत्रिका के रिपोर्टर से बात करते हुए अनुराधा ने बताया कि मौत से कुछ समय पहले जब वे लोग दिवाली पर अपने गांव में मिले थे तब लोया ने उन्हें यह बात बताई थी.

लोया के पिता हरकिशन लोया ने भी इस बात की पुष्टि की और बताया कि इस मामले में पक्ष में फैसला देने के लिए उनके बेटे को पैसे और मुंबई में घर का प्रस्ताव दिया गया था.

गौरतलब है कि 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई सीबीआई स्पेशल कोर्ट में करवाने का आदेश दिया था. उस समय मामले की सुनवाई जेटी उत्पत कर रहे थे.

6 जून 2014 को जज उत्पत ने अमित शाह को इस मामले की सुनवाई में उपस्थित न होने को लेकर फटकार लगाई और उन्हें 26 जून को पेश होने का आदेश दिया. लेकिन 25 जून को 2014 को उत्पत का तबादला पुणे सेशन कोर्ट में हो गया.

इसके बाद बृजगोपाल लोया आए, जिन्होंने भी अमित शाह के सुनवाई में मौजूद न होने पर सवाल उठाए.

आउटलुक पत्रिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, मामले की शुरुआत में लोया अमित शाह की सुनवाई की तारीख पर मौजूदगी को लेकर नरम ही थे, पर ये नरमी न्यायिक प्रक्रिया के चलते थी. इसी रिपोर्ट के मुताबिक लोया ने केस में दी गई कुछ आखिरी टिप्पणियों में कहा था कि शाह को सुनवाई में उपस्थित होने के मामले में यह छूट आरोप तय हो जाने तक दी जा रही थी. लोया के इस नरम रवैये का अर्थ यह नहीं था कि वे उनके ख़िलाफ़ आरोप हटाने के बारे में सोच भी रहे थे.

द कारवां पत्रिका की रिपोर्ट बताती है कि इस मामले में सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन के वकील मिहिर देसाई के मुताबिक लोया इस मामले की पूरी चार्जशीट (जो लगभग 10,000 पन्नों की थी) सबूत और गवाहों की बारीकी से जांच करना चाहते थे.

मिहिर देसाई ने बताया, ‘ये काफी संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामला था और इससे एक जज के बतौर लोया की प्रतिष्ठा का फैसला हो सकता था. लेकिन दबाव तो निश्चय ही बढ़ रहा था.’

देसाई के अनुसार, ‘कोर्ट रूम का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहता था. बचाव पक्ष के वकील शाह के ख़िलाफ़ आरोप हटा देने पर जोर दिया करते थे, जबकि हमारी मांग थी कि सीबीआई द्वारा सबूत के रूप में सौंपी गई कॉल्स के ट्रांसक्रिप्ट अंग्रेज़ी में दिए जाएं क्योंकि न हमें न लोया को गुजराती समझ में आती थी.’

देसाई ने 31 अक्टूबर 2014 को हुई सुनवाई के घटनाक्रम को याद करते हुए बताया कि लोया ने शाह के बारे में पूछा, जिस पर शाह के वकीलों ने जवाब दिया कि वे लोया के आदेशानुसार ही अनुपस्थित हैं. इस पर लोया ने कहा ये छूट केवल उस समय के लिए है जब शाह राज्य में मौजूद नहीं हों. उस समय नवनिर्वाचित महाराष्ट्र सरकार के शपथ ग्रहण के लिए वे मुंबई में ही थे.

लोया ने तब शाह के वकीलों को आदेश दिया कि अगली बार जब शाह राज्य में हो तब वे सुनवाई पर शाह की कोर्ट में मौजूदगी सुनिश्चित करें. इसके बाद अगली सुनवाई की तारीख 15 दिसंबर 2014 तय की गई, लेकिन 1 दिसंबर 2014 को ही उनकी मौत हो गई.

मालूम हो कि बृजगोपाल लोया के परिजनों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए सोमवार को द कारवां पत्रिका में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट में लोया की मौत की संदेहास्पद परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए हैं.

यह भी पढ़ें: सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई जज की मौत पर परिजनों ने उठाए सवाल

इस रिपोर्ट के मंगलवार को प्रकाशित किए गए हिस्से में रिपोर्टर से बात करते हुए लोया की बहन ने बताया कि उस समय बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह ने उनके भाई बृजगोपाल लोया को पक्ष में फैसला देने के लिए 100 करोड़ रुपये का दिया था.

लोया की बहन अनुराधा बियानी के मुताबिक, मोहित शाह बृजगोपाल लोया को देर रात में कॉल करके सादे कपड़ों में मिलने के लिए कहते, साथ ही जल्दी और पॉजिटिव फैसला देने का दबाव बनाते थे. अनुराधा के अनुसार मोहित शाह ने उनके मनमुताबिक फैसला देने के एवज में खुद 100 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव लोया के सामने रखा था.

अनुराधा ने यह भी बताया कि मोहित शाह ने लोया से कहा था कि अगर (इस मामले में) फैसला 30 दिसंबर से पहले आता है तो इस पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा क्योंकि उस समय कोई और ऐसी सनसनीखेज स्टोरी होगी, जो सुनिश्चित करेगी कि इस बात पर लोगों का ध्यान न जाए.

अनुराधा की इस बात का समर्थन बृजगोपाल लोया के पिता ने भी किया है. उन्होंने रिपोर्टर को बताया कि उनके बेटे को पैसों का ऑफर मिला था. उन्होंने बताया, ‘तुम्हें मुंबई में घर चाहिए, कितनी ज़मीन चाहिए, कितना पैसा चाहिए, उसने बताया था कि इस तरह के प्रस्ताव मिलते थे.’

लेकिन लोया के पिता स्पष्ट करते हैं कि उनका बेटा ऐसे किसी प्रस्ताव के सामने नहीं झुका. उन्होंने कहा, ‘उसने मुझे बताया कि मैं या तो इस्तीफ़ा दे दूंगा या ट्रांसफर ले लूंगा. फिर गांव चला जाऊंगा और खेती करूंगा.’

द कारवां की यह रिपोर्ट बताती है कि रिपोर्टर द्वारा मोहित शाह और अमित शाह दोनों को सवाल भेजे गए थे, लेकिन रिपोर्ट के प्रकाशन के समय तक दोनों ही पक्षों से कोई जवाब नहीं दिया गया.

लोया की मौत के बाद एमबी गोसवी को इस केस की ज़िम्मेदारी दी गई, जिन्होंने 15 दिसंबर को सुनवाई शुरू की.

मिहिर देसाई के मुताबिक, गोसवी ने बचाव पक्ष के वकीलों की अमित शाह से आरोप हटाने की दलील 3 दिन सुनीं, जबकि सीबीआई जो कि मुख्य जांच एजेंसी थी, उसकी बहस 15 मिनट में ही खत्म हो गई.

सुनवाई 17 दिसंबर को खत्म हुई, जिसके बाद गोसवी ने अपना आदेश सुरक्षित रखा. और फिर 30 दिसंबर 2014 को गोसवी ने बचाव पक्ष के वकीलों की बात को सही मानते हुए फैसला सुनाया कि सीबीआई राजनीतिक उद्देश्यों के चलते आरोपी को फंसा रहा है.

इसके बाद अमित शाह इस मामले से बरी हो गए.

उस दिन को याद करते हुए अनुराधा बियानी ने बताया है कि उस रोज़ क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की ख़बर ही टीवी चैनलों पर बनी रही. उन्होंने कहा, ‘केवल नीचे टिकर में ‘अमित शाह दोषी नहीं’ लिखकर आ रहा था.’

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मोहित शाह लोया के गुज़रने के लगभग दो महीने बाद उनके परिवार से मिलने पहुंचे थे.

जिस रोज़ वे उनके परिवार से मिले, बृजगोपाल लोया के बेटे अनुज ने अपने परिवार को एक ख़त लिखा, जिसमें उन्होंने कहा, ‘मुझे डर है कि ये नेता मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं और मैं इतना ताकतवर नहीं हूं कि इनसे लड़ सकूं.’

अनुज ने मोहित शाह से मुलाकात के बारे में लिखा, ‘मैंने पापा की मौत की जांच के लिए उनसे जांच आयोग बनाने की मांग की है. मुझे डर है कि हमें उनके ख़िलाफ़ कुछ भी करने से रोकने के लिए वे हमारे परिवार के किसी भी सदस्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं.’

इस रिपोर्ट के मुताबिक अनुज के इस पत्र में दो बार यह बात कही गई है कि ‘अगर मेरे या मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को कुछ होता है, तो चीफ जस्टिस मोहित शाह और इस साजिश में शामिल अन्य लोग ज़िम्मेदार होंगे.’

  • manikchand ojha

    YEH TO PAHELE DIN SE HI MALUM THA KI MODI AUR SHAH DONO AUR INKE RSS WALE YEAR 2002 RIOT KE DOSI HAI AUR ISEE LIYE 2014 ME INHONE EDI CHOTI KE JOR LAGA KAR PURE BHARAT KI JANTA KO BEWAKUF BANAKAR SATTA HASIL KI TAKI APNE UPER LAGE SABHI AAROPPO SE CHUTKARA PA SAKE AUR YEHI KAAM KAR RAHE HAI.

  • Shashi Kumar Nigam

    is mamle ki janch hona jaruri hai per kiske dwara ho yah nyayalaya tai kare tatha janch ki nigrani kare.