भारत

अयोध्या में मस्जिद नहीं बचाते तो ठीक नहीं होता: मुलायम सिंह यादव

अपने जन्मदिन पर बोले मुलायम, मुख्यमंत्री रहते देश की एकता के लिए कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं, 28 लोग मारे गए. अगर और मारने होते तो हमारे सुरक्षाबल और मारते.

79वें जन्मदिन पर सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव भाषण देते हुए (फोटो: अखिलेश यादव फेसबुक)

79वें जन्मदिन पर सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव भाषण देते हुए (फोटो: अखिलेश यादव फेसबुक)

लखनऊ: समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को अपनी पार्टी को आज भी मुसलमानों का समर्थन हासिल होने का दावा करते हुए कहा कि अगर वह अयोध्या में मस्जिद नहीं बचाते तो ठीक नहीं होता क्योंकि उस दौर में कई नौजवानों ने हथियार उठा लिए थे.

मुलायम ने अपने 79वें जन्मदिन पर सपा मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि मुसलमानों ने सपा का साथ नहीं छोड़ा है. पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के नेता उनका वोट नहीं डलवा सके. अगर वोट डलवा दें तो मुसलमान सपा को उसी तरह का वोट दे रहा है, जितना पहले दे रहा था. जिन मुसलमानों ने वोट दिया उनमें से 90 प्रतिशत ने सपा को ही दिया. कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद थे.

‘अगर और मारने होते तो हमारे सुरक्षाबल और मारते’

उन्होंने कहा आमतौर पर मुसलमान आज भी सपा के साथ सहानुभूति रखता है, लेकिन मौजूदा हालात को आप कैसे ठीक करोगे, बूथ कैसे चलवाओगे, उनकी मुसीबत में साथ देकर.

सपा संस्थापक ने कहा, 1990 में अपने मुख्यमंत्री काल में देश की एकता के लिए कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं, उसमें 28 लोग मारे गए थे. अगर और मारने होते तो हमारे सुरक्षाबल और मारते.

उन्होंने दावा किया कि वे एक गोपनीय बात बता रहे हैं, ‘अगर हम मस्जिद नहीं बचाते तो उस दौर के कई मुस्लिम नौजवानों ने हथियार उठा लिए थे. उन्होंने आगे कहा कि जब हमारा पूजास्थल नहीं रहेगा तो देश हमारा कैसे है, इन सवालों को आपको जानना होगा.

पिछले विधानसभा चुनाव में सपा को महज 47 सीटें मिलने को शर्म की बात करार देते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में गोली चलवाने के बाद भी 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा 105 सीटें जीत गई थी और फिर सरकार बन गई थी. उस वक्त सपा के नौजवान कार्यकर्ता जैसे थे, आज वैसे नौजवानों की कमी है. कई तो अपने गांव के बूथ नहीं जिता सकते.

मुलायम ने कहा, ‘एक बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकसभा में कहा था कि अयोध्या में गोली चलने से 56 लोगों की मौत हुई थी. हमने कहा कि अगर आप 56 की सूची हमें दे दे तो मैं पैर छूकर माफी मागूंगा. उनके पास सूची नहीं थी. सचाई यह थी कि 28 लोग मरे थे, उनमें से जो 12 उपेक्षित रह गए थे, उनके परिजन की मैंने चुपचाप मदद कर दी थी.

सपा संस्थापक ने कहा कि उनका जन्मदिन भव्य तरीके से मनाया जा रहा है, लेकिन आज भी 35 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो दिन में दो बार अरहर की दाल के साथ खाना नहीं खा सकते.

उन्होंने कार्यकर्ताओं को ताकीद की, ‘हमारा जन्मदिन मनाना तब सफल होगा, जब संकल्प करके जाना कि जहां पर जो भी व्यक्ति अभाव में हो, उसका साथ दो. चुपचाप मदद करो ताकि उसे हासिल करने वाले व्यक्ति की बदनामी ना हो.’

भाजपा झूठ बोलकर सत्ता में आई

मुलायम ने कहा, आज भी 65 प्रतिशत किसान अपने हाथ से खेती करते हैं. इसके अलावा 35 प्रतिशत ऐसे हैं जिनके पास खेती तो है लेकिन ना बैल है और ना हल. हम बार-बार कहते हैं कि जब तक किसान संपन्न नहीं होगा, देश संपन्न नहीं होगा.

पूर्व रक्षा मंत्री ने भाजपा पर निशान साधते हुए कहा भाजपा झूठ बोलकर सत्ता में आ गई है. उसने हर नागरिक को 15 लाख रुपये देने की बात कही थी. कई बार खजाने में कमी पड़ती है. अगर एक साथ नहीं दे सकते तो तीन-चार बार में दे दो. पांच साल में 15 लाख दे दो. एक साल में तीन लाख, दो साल में तीन लाख. कम से कम वादा तो पूरा होगा. वादाखिलाफी भ्रष्टाचार होता है. जो काम कर सकते हो, सिर्फ वही बोलना चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आज के दिन वह किसी को बुरा-भला नहीं कहेंगे.

mulayam yadav

मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के मौके पर अखिलेश यादव, परिवार और पार्टी के नेता. (फोटो: अखिलेश यादव फेसबुक)

अखिलेश को आशीर्वाद दिया है, आगे भी देता रहूंगा

मुलायम ने पार्टी में खींचतान के लंबे चले दौर के बाद कार्यकर्ताओं को आल इज वेल का संदेश देते हुए कहा कि उन्होंने अपने बेटे सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आशीर्वाद दिया है और आगे भी देते रहेंगे.

मुलायम ने अपने 79वें जन्मदिन पर सपा राज्य मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘हम अखिलेश को तो आशीर्वाद देते हैं और देते रहेंगे. इस सवाल को लेकर देश भर में चर्चाएं हैं कि हमने अखिलेश को आशीर्वाद दिया. मैंने कहा कि वह मेरा लड़का भी है और राजनीति भी करता है. मेरे लिए वह लड़का पहले है, और नेता बाद में.’

मुलायम ने इस मौके पर केक काटा और सबसे पहले अखिलेश को खिलाया. मुलायम के मंच पर पहुंचते ही अखिलेश ने उनके पैर छूकर और शाल ओढ़ाकर उनका स्वागत किया. उसके बाद अन्य नेताओं ने भी उन्हें बधाई दी. इस मौके पर मुलायम के छोटे भाई और अखिलेश के प्रतिद्वंद्वी शिवपाल सिंह यादव मौजूद नहीं रहे.

सपा में सत्ता को लेकर खींच-तान और तल्खी के लंबे चले दौर के बाद अखिलेश और मुलायम ने पहली बार पार्टी मुख्यालय पर मंच साझा किया और खुशनुमा माहौल में एक-दूसरे से बात करते दिखायी दिए.

शिवपाल के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री और गत विधानसभा चुनाव से पहले बसपा में शामिल हुए नारद राय भी मंच पर नजर आए.

मालूम हो कि पिछले साल सितंबर में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश को सपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल को नियुक्त किए जाने के बाद से सपा में दो फाड़ हो गए थे.

उस वक्त मुलायम शिवपाल के साथ खड़े नजर आ रहे थे. यह लड़ाई चुनाव आयोग तक पहुंची थी, जिसमें अखिलेश की जीत हुई थी. उसके फौरन बाद हुए विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस से समझौता किया था, जिसका मुलायम ने विरोध किया था.

मुलायम और अखिलेश के बीच तल्खी इतनी ज्यादा नजर आई थी कि सपा संस्थापक द्वारा शिवपाल के साथ मिलकर नई पार्टी गठित किए जाने की नौबत तक आ गई थी. हालांकि मुलायम ने उस वक्त इरादा बदल दिया था. उसके बाद से मुलायम और अखिलेश कुछ मौकों पर साथ तो दिखाई दिए, लेकिन रिश्तों में वह गर्मजोशी नहीं देखी गई, जो आज नजर आई.

6 दिसंबर को वामदल मनाएंगे काला दिन.

छह वाम दल छह दिसंबर को काला दिन मनाएंगे जिस दिन 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाया गया था. माकपा, भाकपा, आरएसपी, एआईएफबी, भाकपा माले और एसयूसीआईसी ने देश में अपनी इकाइयों से बाबरी मस्जिद को जानबूझकर गिराए जाने का विरोध करने का आह्वान किया है.

वाम दलों ने एक बयान में कहा, ‘वाम दल देश में अपनी सभी इकाइयों से छह दिसंबर को काला दिन मनाने और वर्तमान परिदृश्य में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के खिलाफ संघर्ष मजबूत करने का आह्वान करते हैं. जिसे केंद्रीय और भाजपा की कई राज्य सरकारों द्वारा संरक्षण तथा प्रोत्साहन दिया जा रहा है.

इन दलों ने आरएसएस तथा भाजपा पर निजी सेनाओं के संरक्षण का भी आरोप लगाया और कहा कि आज के गौरक्षक गोहत्या के मनगढ़ंत आरोपों में दलितों और मुसलमानों पर हमले कर रहे हैं.