नॉर्थ ईस्ट

त्रिपुरा: पत्रकार की हत्या के विरोध में अख़बारों ने ख़ाली छोड़े संपादकीय

हत्या के विरोध में भाजपा, कांग्रेस ने किया त्रिपुरा बंद का ऐलान, सत्तारूढ़ माकपा ने कहा सरकार की उचित कार्रवाई के बावजूद हत्या का राजनीतिकरण कर रही हैं पार्टियां.

त्रिपुरा टाइम्स/दैनिक संबाद/त्रिपुरा आब्ज़र्वर के खाली संपादकीय (साभार: संबंधित ईपेपर)

त्रिपुरा टाइम्स/दैनिक संबाद/त्रिपुरा आब्ज़र्वर के खाली संपादकीय (साभार: संबंधित ईपेपर)

अगरतला: त्रिपुरा में वरिष्ठ पत्रकार सुदीप दत्ता भौमिक की हत्या के बाद कई प्रतिष्ठित अख़बारों ने गुरुवार को संपादकीय ख़ाली छोड़ अपना विरोध दर्ज किया.  बंगाली समाचार पत्र स्यंदन पत्रिका में काम करने वाले पत्रकार सुदीप दत्ता भौमिक की कथित रूप से त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) के कॉन्स्टेबल नंदगोपाल रिआंग ने बहस के बाद मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी थी.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार अंग्रेज़ी अख़बार त्रिपुरा आब्ज़र्वर और त्रिपुरा टाइम्स, बंगाली अख़बार दैनिक संबाद, स्यंदन पत्रिका और त्रिपुरा दर्पण ने अपना संपादकीय ख़ाली छोड़ वरिष्ठ पत्रकार की हत्या पर अपना विरोध दर्ज किया.

त्रिपुरा टाइम्स के संपादक मानस पॉल ने एएनआई से अपनी बातचीत में कहा, ‘जहां तक संस्थागत विरोध का सवाल है हमने अपना संपादकीय ख़ाली छोड़ा है. आख़िर दो महीने में दो पत्रकारों की हत्या एक गंभीर मुद्दा है.’

भाजपा और यूथ कांग्रेस ने पत्रकार की हत्या पर राज्य में बंद घोषित किया है.

त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) की दूसरी बटालियन के कमांडेंट तपन देबबर्मा को त्रिपुरा के पत्रकार की हत्या के संबंध में गिरफ्तार किया गया और स्थानीय अदालत ने उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

पत्रकार को कथित तौर पर गोली मारने वाले टीएसआर के कॉन्स्टेबल नंदलाल रेंग को भी मंगलवार रात गिरफ्तार किया गया और 10 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. उसे और देबबर्मा को बुधवार सुबह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शर्मिष्ठा मुखर्जी के समक्ष पेश किया गया जिन्होंने यह आदेश दिया है.

स्यंदन पत्रिका के संपादक सुबल कुमार डे ने आरोप लगाया कि भौमिक की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने कमांडेंट के कई अवैध कार्यों और भ्रष्टाचार का खुलासा किया था.

उन्होंने कहा, यह एक निर्मम हत्या थी और सुदीप की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने कमांडेंट का पर्दाफाश करने के लिए 11 समाचार लिखे थे.

बीते 20 सितंबर को इंडीजिनस पीपुल्स फोरम ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के कार्यकर्ताओं द्वारा मंडई में प्रदर्शन को कवर करने गए  शांतनु भौमिक की हत्या कर दी गई थी.

भाजपा ने इस हत्या की कड़ी निंदा करते हुए इस मामले को वामपंथी सरकार के अंतर्गत जंगलराज होने का उदाहरण बताया है और मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े की भी मांग की है. भारतीय प्रेस परिषद ने त्रिपुरा स्टेट राइफल के एक कांस्टेबल द्वारा कथित रुप से 48 वर्षीय एक पत्रकार की हत्या के सिलसिले में बुधवार को राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है.

पीसीआई ने यहां जारी एक विज्ञप्ति  में बताया कि इस मुद्दे का स्वत: संग्यान लेते हुए परिषद अध्यक्ष ने त्रिपुरा सरकार के मुख्य सचिव, सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक और टीएसआर की दूसरी बटालियन के कमांडेंट से तत्काल रिपोर्ट एवं जवाब मांगा है.

इससे पहले भाजपा युवा मोर्चा के कथित कार्यकर्ताओं द्वारा एक अख़बार की प्रतियां जलाए जाने के विरोध में मणिपुर की राजधानी इम्फाल से प्रकाशित होने वाले प्रमुख समाचार पत्रों ने अपने अख़बारों के संपादकीय कॉलम खाली रखे थे.

राजस्थान में भी राजस्थान के प्रमुख हिंदी दैनिक राजस्थान पत्रिका ने वसुंधरा सरकार की नीतियों के प्रति अपना विरोध दिखाते हुए राष्ट्रीय प्रेस दिवस (16 नवंबर) के मौके पर अपना संपादकीय कॉलम खाली छोड़ दिया था.

हत्या के विरोध में भाजपा, कांग्रेस का त्रिपुरा बंद

त्रिपुरा में हुई एक पत्रकार की हत्या के विरोध में आज विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस ने राज्य में बंद का ऐलान किया जिससे यहां सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ.

भाजपा ने जहां एक ओर सीबीआई जांच की मांग करते हुए सुबह से शाम तक बंद करने को कहा और मुख्यमंत्री माणिक सरकार के इस्तीफे की मांग की, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने 24 घंटे के बंद का ऐलान किया और सीबीआई जांच की मांग की.

बंद के चलते राज्य में दुकानें और बाजार बंद रहे और वाहन सड़क से नदारद दिखे. स्कूल, कॉलेज, बैंक और वित्तीय संस्थान भी बंद रहे और सरकारी दफ्तरों में कर्मियों की उपस्थिति कम दर्ज की गई.

पुलिस ने बताया कि राज्य में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और अबतक कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.

गौरतलब है कि सत्तारूढ़ पार्टी का मुखपत्र डेली देशेर कथा  के अलावा अन्य सभी समाचार पत्रों ने हत्या की घटना के विरोध में अपने संपादकीय कॉलम को खाली छोड़ दिया.

त्रिपुरा पत्रकार संघ के सचिव प्रणब सरकार ने बताया कि विरोध जताने के लिए टीवी चैनल प्रत्येक घंटे भौमिक की तस्वीर प्रसारित करेंगे.

भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष बिप्लब देब ने कहा,  ‘हालांकि हम बंद की राजनीति के खिलाफ हैं लेकिन इस बार हम मजबूर हैं क्योंकि दो महीने के भीतर दो पत्रकारों की हत्या हुई है.’

सत्तारूढ़ माकपा ने इस बंद का विरोध किया और कहा कि पार्टियां पत्रकारों की हत्या का राजनीतिकरण कर रही हैं जबकि राज्य सरकार ने उचित कार्रवाई की है.

राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान में बताया गया कि हत्या की जांच के लिए पुलिस उप महानिरीक्षक डीआईजी, सदर्न रेंज अरिंदम नाथ की अध्यक्षता में तीन सदस्यों वाले एक विशेष जांच दल एसआईटी का कल गठन किया गया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)