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त्रिपुरा: दो महीने में दो पत्रकारों की हत्या को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने निंदा की

बंद के दौरान झड़पों में 11 घायल, एडिटर्स गिल्ड ने कहा, दो पत्रकारों की हत्या यह संकेत है कि त्रिपुरा में पत्रकारों पर गंभीर खतरा है, सरकार सुरक्षा दे.

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पत्रकार सुदीप दत्ता भौमिक और शांतनु भौमिक

अगरतला/नई दिल्ली: त्रिपुरा राज्य राइफल्स (टीएसआर) के बटालियन मुख्यालय में एक पत्रकार की हत्या के खिलाफ विपक्षी भाजपा और कांग्रेस द्वारा गुरुवार को किए गए बंद के आह्वान के दौरान झड़पें हुईं, जिसमें प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के 11 कार्यकर्ता घायल हो गए. वहीं, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने हत्या की निंदा की है.

बंगाली अखबार स्यंदन पत्रिका के पत्रकार सुदीप दत्ता भौमिक की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इसके विरोध में डेली देशेर कथा को छोड़ कर सभी अखबारों ने गुरुवार को अपना संपादकीय खाली छोड़ दिया. डेली देशेर कथा राज्य की सत्तारूढ़ माकपा का मुखपत्र है.

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मुख्यमंत्री मानिक सरकार के आवास पर प्रदर्शन करते पत्रकार. (फोटो: एएनआई)

त्रिपुरा पत्रकार संघ के सचिव प्रणब सरकार ने बताया कि टीवी चैनलों ने हर घंटे पत्रकार की तस्वीर दिखाई. भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए सुबह से लेकर शाम तक के बंद का आह्वान किया था और मुख्यमंत्री माणिक सरकार के इस्तीफे की मांग की, जबकि कांग्रेस ने हत्या की सीबीआई जांच के लिए 24 घंटे के बंद का आह्वान किया था.

बंद के मद्देनजर दुकानें और बाजार बंद रहे तथा राज्य में सड़कों से वाहन नदारद रहे. स्कूल, कॉलेज, बैंक और वित्तीय संस्थान बंद रहे और सरकारी कार्यालय में उपस्थिति कम रही.

भ्रष्टाचार पर लिखा इसलिए हत्या हुई

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने त्रिपुरा में 48 साल के इस पत्रकार की हत्या की कड़ी निंदा की और मांग की है कि मुख्यमंत्री माणिक सरकार दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें.

बंगाली अखबार स्यंदन पत्रिका के पत्रकार सुदीप दत्ता भौमिक की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. त्रिपुरा स्टेट राइफल के एक कांस्टेबल पर आरोप है कि कहासुनी के बाद उसने सुदीप की हत्या कर दी. एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक विज्ञप्ति में कहा कि वह भौमिक की हत्या की कड़ी निंदा करता है.

संस्था ने कहा कि स्यंदन पत्रिका के संपादक ने आरोप लगाया है कि सुदीप की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने कई ऐसी खबरें लिखी थीं जिनमें वित्तीय अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार के मामलों में टीएसआर के एक कमांडर की कथित संलिप्तता का पर्दाफाश किया गया था.

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गुरुवार को बंद के दौरान हिंसा की घटनाएं भी सामने आई हैं. (फोटो: रॉयटर्स)

इसकी एक विज्ञप्ति के मुताबिक, गिल्ड मांग करता है कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार हमलावरों पर जल्द से जल्द कानूनी कार्रवाई करें. संस्था ने कहा, गिल्ड अपनी गहरी चिंता जाहिर करता है कि सुदीप भौमिक की हत्या त्रिपुरा में कोई अकेली ऐसी घटना नहीं है.

गौरतलब है कि 20 सितंबर को पश्चिम त्रिपुरा जिले के मंडय में शांतनु भौमिक नाम के पत्रकार की हत्या कर दी गई थी. यह घटना उस वक्त हुई थी जब वह इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के एक प्रदर्शन को कवर करने गए थे.

एडिटर्स गिल्ड ने कहा, कुछ ही महीनों के भीतर एक और ऐसी घटना इस बात का संकेत है कि त्रिपुरा में पत्रकारों पर कितना गंभीर खतरा है और राज्य सरकार को तत्काल ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जिससे पत्रकारों को सुरक्षा मिल सके.

प्रेस परिषद ने मांगी रिपोर्ट

वहीं, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने हत्या पर त्रिपुरा सरकार से एक रिपोर्ट मांगी है. पुलिस अधीक्षक पुलिस नियंत्रण हकरकुमार देबवर्मा ने कहा कि 11 घायल लोग राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, इनमें से छह भाजपा से जबकि तीन कांग्रेस से और दो सत्तारूढ़ माकपा से हैं.

उन्होंने बताया कि कथित तौर पर भाजपा समर्थकों ने दक्षिण त्रिपुरा जिले में एक रोगी को लेकर जा रहे एक वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया. प्रदेश भाजपा प्रमुख विप्लव देव ने कहा कि हालांकि पार्टी बंद की राजनीति के खिलाफ है लेकिन इस बार वे लोग असहाय हैं क्योंकि पिछले कुछ महीनों में दो पत्रकार मारे गए हैं.

वहीं, सत्तारूढ़ माकपा ने बंद का विरोध करते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियां पत्रकारों की हत्या को राजनीतिक रंग दे रही है जबकि राज्य सरकार ने शीघ्र कार्रवाई की है.

प्रेस काउंसिल आॅफ इंडिया (पीसीआई) अध्यक्ष ने घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, त्रिपुरा सरकार और टीएसआर के द्वितीय बटालियन से एक रिपोर्ट मांगी है.

राज्य सरकार ने एक बयान में कहा कि हत्या की जांच के लिए डीआईजी दक्षिणी रेंज अरिंदम नाथ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है.

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