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छात्रों को मशीन बना रहे हैं कॉलेज, नेता आदर्श बन पाने में असमर्थ: चंद्रबाबू नायडू

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, राजनेता लोगों को प्रेरित नहीं कर पाते क्योंकि उन्होंने अपने मूल्यों को परिष्कृत नहीं किया है.

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू. (फोटो: पीटीआई)

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू. (फोटो: पीटीआई)

अमरावती: आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को टिप्पणी की कि राजनीतिक नेता लोगों को प्रेरित कर पाने में असमर्थ हैं, खासकर छात्रों को, और ऐसा इसलिए है क्योंकि नेताओं ने अपने मूल्यों को परिष्कृत नहीं किया है.

उन्होंने अफसोस जताया कि नेता अब तक आदर्श नहीं बन पाए हैं. नायडू ने राज्य विधानसभा में कहा, हमारे राजनीतिक नेताओं के मूल्य परिष्कृत नहीं हुए हैं, इसलिए हम अब तक आदर्श नहीं बन पाए हैं. हम लोगों को खासकर छात्रों को प्रेरित कर पाने में असमर्थ हैं. इसमें अभी और वक्त लगेगा.

वह छात्रों की आत्महत्या के मुद्दे पर एक संक्षिप्त चर्चा के दौरान यह बातें बोल रहे थे. उन्होंने सदन में भाजपा के नेता पी विष्णु कुमार राजू के आग्रह पर प्रतिक्रिया देते हुए यह टिप्पणी की जिसमें ऐसी घटनाओं को रोकने के वास्ते कॉलेजों का निरीक्षण करने के लिए विधायकों की एक समिति गठित करने की बात कही गई थी.

मुख्यमंत्री ने ऐसे पैनल के गठन का समर्थन नहीं किया. उन्होंने कहा, छात्रों को ऐसा लगता है कि विधानसभा केवल शोरगुल मचाने के लिए होती है. आजकल कोई भी छात्र विधायक नहीं बनना चाहता.

मुख्यमंत्री ने कहा, वह सिर्फ पुलिस उपनिरीक्षक, शिक्षक, आईएएस या आईपीएस अधिकारी बनना चाहते हैं. वह राजनीति की बातों पर हंसते हैं. अगर हम अनुकरणीय होंगे, तो हम छात्रों के लिए आदर्श बन सकते हैं.

शिक्षण संस्थाएं जीवन के साथ खिलवाड़ करने से बाज आएं

आंध्रप्रदेश में विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या करने की बड़ी संख्या में घटनाएं सामने आने के मद्देनजर राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थानों को चेताया कि वह छात्रों पर अनुचित दबाव बनाने और उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करने से बाज आएं.

मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में कहा कि विद्यार्थियों को मशीन और रोबोट के रूप में ढाला जा रहा है.

नायडू ने कहा, कई ऐसे कारण हैं जो विद्यार्थियों को आत्महत्या के लिए बाध्य कर रहे हैं. उनमें मुख्य रूप से उन पर बढ़ता दबाव है. अभिभावक भी बच्चों पर ज्यादा अंक लाने का दबाव डाल रहे हैं. कॉलेजों में विद्यार्थियों के कार्यनिष्पादन की ग्रेडिंग, स्वास्थ्य समस्याएं, पारिवारिक समस्याएं, प्रेम में विफलता, दबाव… कुछ कारण हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, कुछ विद्यार्थी अपनी जान दे रहे हैं क्योंकि वे छात्रावासों में रहने को इच्छुक नहीं हैं. कुछ अपने संस्थानों के उच्च मानकों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते.

छात्रों को रोबोट के रूप में ढाला जा रहा है

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के अलावा किसी तरह की गतिविधियों की गुंजाइश नहीं होती क्योंकि उन्हें सुबह पांच बजे से लेकर रात साढ़े दस बजे तक उन्हें पढ़ने के लिए बाध्य किया जाता है.

उन्होंने कहा, रविवार और अन्य छुट्टियों में भी विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने के लिए बाध्य किया जाता है. कोई खेल-कूद नहीं, कोई अतिरिक्त गतिविधियां नहीं, कोई टेलीविजन या अखबार नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी की बात नहीं. विद्यार्थियों को मशीन एवं रोबोट के रूप में ढाला जा रहा है. यह बहुत परेशान करने वाली बात है.

उन्होंने कहा, शिक्षण संस्थानों को नयी तकनीकें अपनानी चाहिए और दीर्घावधि के अध्यापन को नहीं अपनाना चाहिए. उन्हें विद्यार्थियों में नये कौशल डालना चाहिए और उनकी रचनात्मकता बढ़ानी चाहिए. शिक्षा मजेदार होनी चाहिए और विद्यार्थियों को उसका आनंद लेना चाहिए. विद्यार्थियों को मशीनों के रूप में ढालना सही नहीं है. हम ऐसे प्रबंधनों को कड़ाई से दंडित करेंगे.