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आतंकवादियों को मार गिराने से आतंकवाद ख़त्म नहीं किया जा सकता: महबूबा मुफ़्ती

मुख्यमंत्री ने चरमपंथ से निपटने के लिए नरम रवैया अपनाने की वक़ालत करते हुए करीब चार हज़ार युवाओं के ख़िलाफ़ दर्ज पत्थरबाज़ी के मुक़दमे वापस लेने का आदेश दिया है.

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (फोटो: रायटर्स)

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (फोटो: रायटर्स)

श्रीनगर/नई दिल्ली: महबूबा ने बुधवार को कठुआ में कहा था कि केवल आतंकवादियों को मार गिराने से आतंकवाद को खत्म नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए ज्यादा मानवीय नजरिए की जरूरत है.

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मादक पदार्थों का खतरा और महिलाओं के खिलाफ हिंसा का बढ़ता स्तर, आतंकवाद के बाद घाटी की सबसे बड़ी समस्याएं हैं.

पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में 947 सैनिकों की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए पीडीपी नेता ने कहा, ‘हमें कश्मीर से आतंकवाद को खत्म करना है. लेकिन केवल आतंकवादियों को मार कर आतंकवाद खत्म नहीं किया जा सकता.’

कश्मीर में सुरक्षा बलों ने इस वर्ष सबसे ज्यादा करीब 200 आतंकवादियों को मार गिराया है.

महबूबा ने कहा, ‘हमें आतंकवाद के पीछे के कारणों और वास्तविक समस्या को समझाना होगा.’

राज्य में चरमपंथ से निपटने के लिए एक नरम रवैया अपनाने की वकालत करते हुए उन्होंने सरकार के हालिया फैसले का हवाला दिया जिसमें घाटी में पहली बार पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ मामला वापस लेने को कहा गया था.

उन्होंने कहा, ‘पुलिस को इन बच्चों की काउंसलिंग करनी होगी. मैंने पैलेट पीड़ितों को हाल ही में अपने घर बुलाया था. मैं यह जानकर हैरान थी कि उनमें से ज्यादातर नाबालिग 14, 15 और 15 साल की उम्र थे.’

महबूबा ने उकसावे की गंभीर स्थितियों में भी अनुशासन और नियंत्रण प्रदर्शित करने के लिए राज्य पुलिस की भी तारीफ की.

दिया पथराव के मामले वापस लेने का आदेश

फोटो: पीटीआई

फाइल फोटो: पीटीआई

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने 4,327 युवकों के खिलाफ दर्ज पथराव के मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है.

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस महानिदेशक एसपी वैद्य के नेतृत्व वाली विशेषाधिकार प्राप्त समिति की अनुशंसा के बाद यह कदम उठाया गया है. समिति ने बुधवार को महबूबा को रिपोर्ट सौंपी.

उन्होंने कहा, ‘आज के फैसले से मामलों को वापस लेने की वह प्रक्रिया बहाल हो गई है जो पिछले साल सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शुरू की थी.’

अधिकारी ने कहा कि महबूबा 2008 से 2014 के बीच युवकों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की थी और दो महीने के भीतर ही 634 युवाओं से संबंधित 104 मामलों को वापस लिया था.

घाटी में हिंसा और अशांति जारी रहने की वजह से मामले वापस लेने की प्रक्रिया बाधित हो गई. उन्होंने कहा कि कुल 744 मामलों से जुड़े 4,327 युवकों के खिलाफ पथराव के मामले वापिस लिए गए हैं.

प्रवक्ता ने कहा, ‘इसके साथ ही मुख्यमंत्री के आदेश पर वापस लिए गए मामलों की संख्या 848 हो गई और इनसे कुल 4,957 युवकों को लाभ पहुंचा.’

मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि उन युवकों के खिलाफ मामले वापस लिए गए जाएंगे जो जघन्य अपराधों में शामिल नहीं हैं.

प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में आदेश दिया था कि 2015 के बाद के मामलों को वापस लिया जाए और विशेषधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट मिलने में इस संदर्भ में फैसला किया जाएगा.

युवकों के खिलाफ मामलों को वापस लेने की मांग समाज के कई तबकों से आती रही है.

प्रवक्ता ने कहा, ‘मुख्यमंत्री के फैसले को युवकों के लिए उम्मीद की किरण करार दिया और कहा कि यह उनके लिए अपनी जिंदगी को फिर से संवारने का मौका है.

महबूबा ने उम्मीद जताई कि इस फैसले से राज्य में सकारात्मक माहौल पैदा होने में मदद मिलेगी.

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