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यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि जीडीपी की वृद्धि दर में गिरावट का दौर बीत चुका है: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के लिए यूपीए सरकार के दस साल के शासन की औसत वृद्धि दर की बराबरी कर पाना भी संभव नहीं होगा.

India’s Prime Minister Manmohan Singh smiles during a news conference in New Delhi January 3, 2014. Singh will hand over the top job to a new leader after general elections due by May, he said on Friday. REUTERS/Harish Tyagi/Pool (INDIA - Tags: POLITICS)

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

सूरत: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को दूसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही सावधान भी किया कि पिछली पांच तिमाहियों में देखा गया गिरावट का दौर पलट गया है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगा.

सिंह ने यह भी कहा इस दर पर नरेंद्र मोदी सरकार के लिए संप्रग सरकार के दस साल के शासन की औसत वृद्धि दर की बराबरी कर पाना भी संभव नहीं होगा.

यहां व्यापारियों के साथ एक बातचीत में सिंह ने कहा, ‘जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रही है. यह स्वागत योग्य है, लेकिन यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी कि पिछली पांच तिमाहियों में देखा गया गिरावट का दौर बीत गया है.’

उन्होंने कहा, ‘कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने नोटबंदी और जीएसटी के अनौपचारिक क्षेत्र पर पड़े प्रभाव का ठीक से आकलन नहीं किया है. यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा है.’

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रणव सेन और अर्थशास्त्री एम. गोविंद राव का हवाला देते हुए सिंह ने कहा, ‘जीडीपी की वृद्धि के बारे में अभी भी महत्वपूर्ण अनिश्चिताएं हैं. भारतीय रिजर्व बैंक का अनुमान है कि 2017-18 में अर्थव्यवस्था 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर से रफ्तार पकड़ेगी. यदि 2017-18 में यह दर 6.7 प्रतिशत होती भी है तो मोदी जी के चार साल के कार्यकाल की औसत वृद्धि दर मात्र 7.1 प्रतिशत रहेगी.’

सिंह ने दावा किया कि मोदी सरकार पिछली संप्रग सरकार के 10 साल के शासन की औसत वृद्धि दर की बराबरी करने में भी समर्थ नहीं होंगी. उन्होंने कहा कि बराबरी के लिए मोदी सरकार के अंतिम वर्ष में वृद्धि दर 10.6 प्रतिशत रहेगी. उन्होंने कहा, ‘ऐसा होता है तो मुझे खुशी होगी. पर स्पष्ट कहें तो मुझे नहीं लगता कि ऐसा हो सकेगा.’

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि जीडीपी में एक प्रतिशत का नुकसान देश का 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान है. जिस नौजवान की नौकरी जाती है, जिस दुकानदार का कारोबार बंद होता है. जो कंपनी बंद होती और जो उद्यमी कारोबार से बाहर हो जाता है उसके लिए वह भारी निराशा की बात होती है.

मनमोहन सिंह ने कहा कि 2017-18 की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत पर नोटबंदी के चलते गई थी. इसके सकल प्रभाव को अभी भी कम करके आंका  जा रहा है क्योंकि अभी भी अनौपचारिक क्षेत्र के दर्द को पकड़ा नहीं पकड़ा जा सका है.

उल्लेखनीय है कि जुलाई सितंबर तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत पर रही है. विनिर्माण क्षेत्र के फिर से  रफ्तार पकड़ने से जीडीपी के आंकड़े में सुधार हुआ है.जीएसटी लागू होने के बाद यह क्षेत्र मंद पड़ गया था.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिंह इन दिनों गुजरात में चल रहे चुनाव अभियान के बीच प्रदेश के व्यापारियों के साथ बैठकें कर रहे थे. चुनाव प्रचार में कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था में नरमी, नोटबंदी और जीएसटी को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया हुआ है. पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी अपने भाषणों में इसका जिक्र कर रहे हैं.