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घृणा की राजनीति सबसे बड़ा ख़तरा, इसे बढ़ावा देने वाले कश्मीर से दूर रहें: फ़ारूक़ अब्दुल्ला

भाजपा ने पाकिस्तान से वार्ता की वकालत पर की अब्दुल्ला की आलोचना, कहा- आतंकवाद तथा बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला. (फोटो: पीटीआई)

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला. (फोटो: पीटीआई)

जम्मू/श्रीनगर: जम्मू कश्मीर में विपक्षी पार्टी नेशनल कांन्फ्रेंस के प्रमुख फ़ारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि घृणा की राजनीति देश की एकता के लिए सबसे बड़ा खतरा है. उन्होंने इसे बढ़ावा देने वालों को जम्मू कश्मीर से दूर रहने के लिए कहा.

अब्दुल्ला ने राज्य में पंचायत चुनाव से पहले लोगों को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के खिलाफ आगाह किया. उन्होंने पार्टी के नेताओं की एनसी मुख्यालय में हुई बैठक में कहा, किसी धर्म को कोई खतरा नहीं है. और अगर कोई खतरा है तो वह है घृणा की राजनीति से जो कि सांप्रदायिक तत्वों की ढाल का काम करता है.

दूसरी ओर भाजपा ने पाकिस्तान से वार्ता की वकालत करने पर नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की आलोचना की और कहा कि आतंकवाद तथा बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते.

जम्मू कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता ब्रिगेडियर सेवानिवृत्त अनिल गुप्ता ने एक बयान में कहा कि फारूक ने कश्मीर घाटी में शांति के लिए आवश्यकता के रूप में पाकिस्तान से बातचीत की बार-बार वकालत की है, पूरी तरह यह जानते हुए भी कि यह भारत नहीं, पाकिस्तान है जो वार्ता से बच रहा है.
वह बडगाम जिले में शनिवार को एक जनसभा में फारूक द्वारा दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे.

तिहाड़ में बंद कश्मीरियों को कश्मीर की जेल भेजने की मांग

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कश्मीरियों के साथ कथित रूप से मारपीट किए जाने के बाद उनके परिजन ने रविवार को श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन किया और सूबे की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से उन कैदियों को राज्य की जेलों में तत्काल स्थानांतरित करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की.

यह विरोध प्रदर्शन प्रेस एन्क्लेव में हुआ. तिहाड़ में बंद घाटी के कैदियों के परिजन ने दावा किया कि उनके साथ तमिलनाडु विशेष बल के जवानों ने 21 नंवबर को जेल में मारपीट की थी. उन्होंने मुख्यमंत्री से जेल का दौरा करके परिजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की.

जेल में कश्मीरी कैदियों के साथ मारपीट होने और अनेक के घायल होने की रिपोर्टें सामने आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तिहाड़ जेल के महा निदेशक से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है. महबूबा ने 28 नवंबर को केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा से बात कर उनसे मामले में हस्तक्षेप करने को कहा था.