विशेष

गुज़रे ज़माने के सुपरस्टार शशि कपूर का निधन

पिछले कई महीनों से लगातार बीमार थे. मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

Shashi Kapoor Twitter

गुज़रे ज़माने के सुपरस्टार शशि कपूर. (फोटो साभार: ट्विटर)

मुंबई: पिछले कई महीनों से लगातार बीमार चल रहे गुज़रे जमाने के सुपरस्टार शशि कपूर का सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 79 वर्ष के थे.

शशि कपूर को रविवार रात मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बताया जा रहा है कि उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत थी.

उनके भतीजे रणधीर कपूर ने बताया, हां, उनका निधन हो गया. उन्हें किडनी से जुड़ी समस्या थी और वह कई वर्षों से डायलिसिस पर थे. रणधीर ने बताया कि अभिनेता का अंतिम संस्कार मंगलवार सुबह किया जाएगा.

अस्पताल के डॉक्टर रामनारायण ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, शशि कपूर का सोमवार शाम 5:20 बजे मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया.

पृथ्वीराज कपूर के सबसे छोटे बेटे और राज कपूर और शम्मी कपूर के भाई शशि का जन्म 18 मार्च 1938 को ब्रिटिश भारत के कलकत्ता में हुआ था. उन्होंने 1970 और 1980 के दशक में रोमांटिक आइकन के रूप में पहचान बनाई थी.

शशि कपूर ने अपने करिअर की शुरुआत बाल कलाकार के तौर पर की थी. वह अपने पिता के निर्देशन में बने नाटकों में अभिनय किया करते थे. उन्होंने चार वर्ष की आयु से अपने पिता द्वारा निर्मित और निर्देशित नाटकों में काम करना शुरू कर दिया था.

1940 के दशक में उन्होंने फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम करना शुरू कर दिया था. बाल कलाकार के रूप में उन्होंने अपने अभिनय का बेहतरीन प्रदर्शन 1948 में आई फिल्म आग और 1951 में आई फिल्म आवारा में किया था.

इन दोनों ही फिल्मों में वह अपने बड़े भाई राज कपूर के बचपन की भूमिका में नज़र आए थे. 1950 में आई फिल्म संग्राम में उन्होंने अशोक कुमार के बचपन का किरदार निभाया था.

साल 1961 में बतौर शीर्ष भूमिका में शशि कपूर की पहली फिल्म आई, जिसका नाम धर्मपुत्र था. 60, 70 और 80 के दशक के इस प्रख्यात कलाकार ने तकरीबन 116 फिल्में कीं.

इनमें से 61 फिल्मों में वह लीड रोल में थे, 55 फिल्में मल्टीस्टारर थीं. 21 फिल्मों में उन्होंने सहयोगी कलाकार की भूमिका निभाई है और सात फिल्मों में वह विशेष भूमिकाओं में नज़र आए थे.

1961 में धर्मपुत्र में नज़र आने से पहले शशि कुछ फिल्मों के असिस्टेंट डायरेक्टर भी रहे. इसमें सुनील दत्त की पहली फिल्म पोस्ट बॉक्स 999 प्रमुख है.

वह भारत के उन पहले कलाकारों में से एक हैं जो अंतरराष्ट्रीय फिल्मों का भी हिस्सा बने. उसी ज़माने में वह ब्रिटिश और अमेरिकी फिल्मों में नज़र आने लगे थे.

शशि कपूर ने द हाउसहोल्डर (1963) और शेक्सपीयरवाला (1965) जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में काम किया. शेक्सपीयरवाला में वह अपनी पत्नी की बहन फेलिसिटी कैंडल के साथ नज़र आए थे.

इसके अलावा बॉम्बे टॉकिज़ (1970) और हीट एंड डस्ट (1982) में वह अपनी पत्नी जेनिफर केंडल (अब जेनिफर कपूर) के साथ नज़र आए थे.

अभिनेत्री नंदा के साथ उनकी जोड़ी को पसंद किया जाता था. नंदा ने उनकी साथ आठ फिल्में साइन की थीं. इसमें से चार दिवारी (1961), मेहंदी लगी मेरे हाथ (1962), मोहब्बत इसको कहते हैं (1965), जब जब फूल खिले (1965), नींद हमारी ख़्वाब तुम्हारे (1966), राजा साब (1969) और रूठा ना करो (1970) प्रमुख हैं.

साल 2011 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था. इसके बाद साल 2015 में उन्हें सिनेमा के क्षेत्र में दिया जाने वाले सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार दादा साहेब फाल्के सम्मान से नवाज़ा गया.

पृथ्वीराज कपूर और राज कपूर के बाद कपूर खानदान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार पाने वाले शशि कपूर तीसरे व्यक्ति हैं. शशि कपूर के परिवार में उनकी पत्नी जेनिफर कपूर और तीन बच्चे कुणाल कपूर, संजना कपूर व करण कपूर हैं.

उनकी प्रमुख फिल्में- जानवर और इंसान (1972), पिघलता आसमां (1985), तृष्णा (1978), वक़्त (1965), पतंगा (1971), पाप और पुण्य (1974), न्यू डेल्ही टाइम्स (1985) प्रमुख हैं.

न्यू डेल्ही टाइम्स फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था.

इसके अलावा चोरी मेरा काम (1975), हीरालाल पन्नालाल (1978), भवानी जंक्शन (1985), सत्यम शिवम सुंदरम (1978), क्रोधी (1981), विजेता (1982) जैसी फिल्मों में वे नज़र आए.

हेमा मालिनी के साथ उन्होंने 10 फिल्में की थीं. इसके अलावा वह राखी, शर्मिला टैगोर, ज़ीनत अमान, परवीन बॉबी, बबीता, आशा पारेख, मुमताज़ और मौसमी चटर्जी के साथ भी वे काम कर चुके हैं.

अभिनेताओं में उनकी जोड़ी अमिताभ बच्चन के साथ दर्शक काफी पसंद करते थे. फिल्म दीवार का डायलॉग मेरे पास मां है… आज भी लोगों की ज़बान पर है.

शशि कपूर ने अमिताभ के साथ 12 फिल्में- रोटी कपड़ा और मकान (1974), दीवार (1975), कभी कभी (1976), इमान धरम (1977), त्रिशूल (1978), काला पत्थर (1979), सुहाग (1979), दो और दो पांच (1980), शान (1980), सिलसिला (1981), नमक हलाल (1982) अकेला (1991) की हैं.