राजनीति

बुर्क़ानशीं मतदाताओं की जांच की व्यवस्था पहले से: चुनाव आयोग

आगामी चरणों के चुनाव में वोटिंग से पहले भाजपा ने चुनाव आयोग से मांग की कि बुर्क़ानशीं महिलाओं की पहचान के लिए महिला सुरक्षाकर्मी की तैनाती हो. आयोग ने भाजपा की मांग को नकार दिया है.

बुर्के में महिलाएं (फोटो: पीटीआई)

बुर्के में महिलाएं (फोटो: पीटीआई)

पोलिंग बूथ पर बुर्क़ा पहन कर आने वाली महिलाओं की पहचान के लिए महिला सुरक्षाकर्मी तैनात करने संबंधी भाजपा की मांग को चुनाव आयोग ने नकार दिया है. इसके पहले उत्तर प्रदेश में छठवें और सातवें चरण के मतदान के पहले भाजपा ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर यह मांग उठाई थी.

बीबीसी हिंदी की ख़बर के मुताबिक, भाजपा की इस मांग पर ‘चुनाव आयोग का कहना है कि बुर्क़ा या घूंघट में मतदान केंद्रों पर आने वाली महिलाओं की पहचान की व्यवस्था पहले से ही चली आ रही है, इसलिए भाजपा के इस पत्र का कोई औचित्य नहीं है. उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी प्रमोद कुमार पांडेय ने कहा कि इस बारे में क़ानूनी प्रावधान पहले ही किया जा चुका है. इसके तहत बूथ के अंदर महिला मतदाताओं की संख्या के हिसाब से एक महिला मतदानकर्मी को तैनात किया जाता है.’

भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई की ओर से एक मार्च को जारी प्रेस रिलीज में मांग की गई थी कि ‘विधानसभा चुनाव में महिला मतदाता बुर्क़ा पहनकर मतदान करने आती हैं. इस वजह से उनकी सही पहचान करने के लिए पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मी तैनात करना आवश्यक है. जिससे ऐसे मतदाताओं के पहचान पत्र की ठीक ढंग से जांच हो सके फ़र्ज़ी मतदान की आशंका समाप्त की जा सके.’

उत्तर प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनाव में अब आख़िरी दो चरण बाक़ी है, जिसकी वोटिंग 4 और 8 मार्च को होनी है. भाजपा ने आयोग को लिखे पत्र में बलिया, मऊ के संवेदनशील बूथों की सूची जारी करते हुए महिला सुरक्षाकर्मियां के साथ-साथ पोलिंग बूथों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की भी मांग की थी. भाजपा के अनुसार आगामी चरणों में बहुत सारी सीटें बेहद संवेदनशील है. अर्धसैनिक बलों की तैनाती से चुनाव निष्पक्ष रूप से हो पाएगा. आख़िरी 2 चरण सभी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण है. 4 मार्च को छठवें चरण में कुल 49 सीट पर वोटिंग होने वाली है. इसमें महाराजगंज, देवरिया, आजमगढ़ और मऊ जैसे महत्वपूर्ण ज़िले शामिल हैं.