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गुजरात मॉडल से समाज के केवल शीर्ष एक प्रतिशत को फ़ायदा हुआ: मनमोहन

गुजरात चुनाव राउंडअप: पूर्व पीएम ने कहा- गुजरात हर पैमाने पर हिमाचल, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों से पीछे, राहुल ने पूछा- आदिवासी कल्याण योजना के 55 हजार करोड़ रुपये कहां गए.

मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

अहमदाबाद/नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को राजकोट में कहा कि गुजरात के लोगों ने राज्य में 22 साल के भाजपा के शासनकाल के दौरान उसके झूठों को देखा है. उन्होंने विकास के गुजरात मॉडल को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर प्रहार करते हुए कहा कि इससे समाज के केवल शीर्ष एक प्रतिशत को फायदा हुआ.

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के अच्छे दिन के वादे कहीं नजर नहीं आए. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, 22 साल लंबा समय होता है और यहां अब परिणाम हम सबके सामने है. भाजपा के गुजरात मॉडल से समाज के केवल शीर्ष एक प्रतिशत को फायदा हुआ.

सिंह ने दावा किया कि गुजरातियों ने झूठ को देखा है और भाजपा के गुजरात मॉडल को राज्य में हर चौराहे पर खुलेआम चुनौती दी गई. उन्होंने कहा, कुछ अमीर कारोबारियों को छोड़कर हर समुदाय और वर्ग पिछले 22 साल में भाजपा द्वारा संचालित गुजरात मॉडल की असमानता और नाइंसाफी के खिलाफ अपनी आवाजें उठा रहा है.

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि मानव विकास के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गुजरात पिछले 22 साल में पीछे चला गया है. उन्होंने कहा, हरेक सामाजिक सूचकांक पर यह हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के पीछे है. साथ ही कहा कि अगर गुजरात में कांग्रेस की सरकार बनी तो यह बदल जाएगा.

सिंह ने कहा, कांग्रेस पार्टी के पास गुजरात के लोगों के लिए एक दृष्टिकोण है. सिंह ने नोटबंदी और जीएसटी के क्रियान्वयन पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा, गुजरात के लोगों ने मोदीजी में जो भरोसा जताया था उसे उन्होंने तोड़ दिया.

कांग्रेस नेता ने यह भी मांग की कि केंद्र को नोटबंदी से संबंधित दस्तावेज और फाइलें जारी करना चाहिए. अयोध्या मसले पर सिंह ने टिप्पणी करने से मना करते हुए कहा कि उनके लिए मुद्दे पर चर्चा करना अनुचित होगा क्योंकि मामला अदालत में है. केंद्र की जम्मू कश्मीर नीति पर सिंह ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि सरकार को मुद्दे पर कुछ हासिल हुआ है या नहीं.

गुजरात चुनाव के पहले चरण के लिए प्रचार खत्म

गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार गुरुवार शाम समाप्त हो गया. मुख्य प्रतिद्वंदी भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान जाति, धर्म जैसे भावनात्मक मुद्दों और विकास सहित तमाम विषयों पर एक दूसरे को घेरा.

चुनाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बताया जा रहा है जबकि जल्द ही कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने जा रहे राहुल गांधी के लिए यह एक अग्निपरीक्षा है. दोनों दलों के बीच वाकयुद्ध गुरुवार को देर शाम तक जारी रहा और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने मोदी को नीच आदमी बताकर एक नये विवाद को जन्म दे दिया, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करके बिगड़ी बात संभालने का प्रयास किया.

विधानसभा की 182 में से 82 सीटों के लिए पहले चरण का मतदान शनिवार को होगा. सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात क्षेत्रों में होने वाले चुनाव में 977 उम्मीदवार खड़े हैं जिनमें मुख्यमंत्री विजय रूपाणी शामिल हैं.

गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सीईओ बीबी स्वैन ने कहा कि शनिवार को राज्य के कुल 4.35 करोड़ मतदाताओं में से 2.12 करोड़ लोग मतदान की प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे.

मोदी और राहुल दोनों ने सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में अपने अपने दल के प्रचार का नेतृत्व किया और प्रचार में अकसर व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप का दौर चला. अयोध्या में बाबरी मस्जिद विवाद, राहुल का कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में आगामी पदोन्नयन और गुजरात के मंदिरों की उनकी यात्रा के साथ चुनाव के लिए लगातार मुद्दे बदल रहे हैं.

सत्ता विरोधी लहर भाजपा के लिए चुनौती

जहां भाजपा सत्ता विरोधी लहर से लड़ रही और नोटबंदी एवं जीएसटी जैसे मुद्दों को लेकर एक तरह से बने नकारात्मक दृष्टिकोण को बदलने में संघर्ष कर रही है, वहीं राहुल गांधी के ज्यादा आक्रामक होने से नई उर्जा से भरी कांग्रेस ने मोदी को घेरने के लिए मुख्य रूप से गुजरात के खोखले विकास मॉडल को निशाना बनाया है.

सौराष्ट्र और कच्छ सत्तारूढ़ भाजपा के लिए अहम हैं क्योंकि पहले चरण में इन दोनों क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सीटें हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन दोनों क्षेत्रों से अधिकतम सीटें जीतने से पार्टी राज्य में अगली सरकार के गठन के लिहाज से बेहतर स्थिति में होगी.

शनिवार को होने वाले चुनाव में खड़े प्रमुख उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री रूपाणी राजकोट पश्चिम से, कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल मांडवी से एवं परेश धनानी अमरेली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

चुनाव प्रचार कई विवादों से भी प्रभावित हुआ है जिनमें सबसे ताजा विवाद अय्यर की मोदी के लिए की गई टिप्पणी से जुड़ा है. मोदी ने अपने खिलाफ की गई टिप्पणी को सूरत में एक रैली के दौरान गुजरात का अपमान करार दिया. विधानसभा के लिए दूसरे चरण का चुनाव 14 दिसंबर को होगा. मतगणना 18 दिसंबर को होगी.

मोदीजी, आदिवासी कल्याण योजना के 55 हजार करोड़ रुपये कहां गए: राहुल

गुजरात चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमला करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को आदिवासी कल्याण के लिए स्वीकृत की गई करीब 55 हजार करोड़ रुपये की राशि को लेकर मोदी से जवाब मांगा.

सवालों की श्रंखला में अपने दसवें सवाल में राहुल ने राज्य में आदिवासी समुदाय की दयनीय स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधा. राहुल ने ट्विटर पर कहा, विस्थापन ने आदिवासी समाज को तोड़ दिया है. मोदीजी, वनबंधु योजना के 55 हजार करोड़ रुपये कहां गए?

उन्होंने कहा आदिवासियों की जमीन हथिया ली गई, जंगलों पर उन्हें अधिकार नहीं दिया गया और भूमि की मिल्कियत के लाखों अनुबंध बाधित किए गए. न स्कूल ठीक से काम करते हैं और न ही उन्हें कोई अस्पताल मिला, जिनसे जमीन छीनी गई उन्हें बेघरों के लिए घर नहीं मिला, न ही युवाओं को रोजगार मिला.

गांधी अपने इन सवालों के लिए 22 साल का हिसाब, गुजरात मांगे जवाब टैगलाइन का इस्तेमाल कर रहे हैं. राहुल गुजरात में भाजपा के पिछले 22 सालों के शासन पर हर दिन ट्विटर पर एक सवाल पूछ रहे हैं.

किसानों की दुर्दशा पर राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोला

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने दिन का सवाल अभियान को आगे बढ़ाते हुए गुरुवार को कृषि क्षेत्र एवं किसानों की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा.

अपनी सवाल श्रृंखला के तहत नौवां सवाल करते हुए उन्होंने पूछा, प्रधानमंत्री जी नौवां सवाल: न की कर्ज़ माफ़ी, न दिया फसल का सही दाम, मिली नहीं फसल बीमा राशि, न हुआ ट्यूबवेल का इंतजाम.

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर तंज करते हुए गब्बर शब्द का भी इस्तेमाल किया. उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट किया, खेती पर गब्बर सिंह की मार, छीनी जमीन, अन्नदाता को किया बेकार. पीएम साहब बताएं, खेतिहरों के साथ क्यों इतना सौतेला व्यवहार.

राहुल ने इससे पहले सरकार पर हमला बोलते हुए माल एवं सेवाकर जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताया था. गुजरात में भाजपा के प्रदर्शन और राज्य में 22 साल के अपने शासन के दौरान वादों को पूरा नहीं करने के मुद्दे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर हर दिन प्रधानमंत्री से एक सवाल करते हैं.

गुजरात में बच्चों की मौत, कुपोषण पर भी सवाल

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुजरात में नवजात शिशुओं की मौत और बच्चों में कुपोषण को लेकर निशाना साधा. राहुल ट्विटर पर हर दिन एक सवाल श्रृंखला के तहत विभिन्न मुद्दे उठाकर मोदी से उनकी पार्टी द्वारा किए गए अधूरे वादों पर जवाब मांग रहे हैं.

आठवां सवाल रखते हुए उन्होंने पूछा, 39 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. हर एक हजार में से 33 बच्चों की कुपोषण के कारण मौत हो जाती हैं. डाक्टरों की गंभीर कमी के बीच इलाज का खर्चा बढ रहा है. भुज में एक सरकारी अस्पताल को एक दोस्त को 99 साल के लिए सौंपा गया. क्या यह आपके स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन का उदाहरण है.

घोषणापत्र जारी न करना गुजरात के लोगों का अनादर: राहुल

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को यह कहते हुए भाजपा पर प्रहार किया कि विधानसभा चुनाव वाले राज्य गुजरात के लिए घोषणापत्र के साथ सामने नहीं आकर उसने राज्य के लोगों के प्रति अविश्वसनीय अनादर दर्शाया है.

गांधी ने ट्वीट किया, भाजपा ने गुजरात के लोगों के प्रति अविसनीय अनादर दर्शाया है. प्रचार अभियान खत्म हो गया लेकिन लोगों के लिए अब तक घोषणापत्र का उल्लेख नहीं है. गुजरात के भविष्य के प्रति कोई दृष्टि या विचार सामने नहीं रखे गए. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, जुमले का इस्तेमाल करना ही भाजपा का घोषणापत्र है.

कांग्रेस ने गुजरात सरकार पर सांठगांठ वाले पूंजीवाद का आरोप लगाया

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य की सरकार ने सांठगांठ वाले पूंजीवादियों को फायदा और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को नुकसान पहुंचाया. विपक्षी पार्टी ने इसे विकास का गुजरात मॉडल करार दिया.

कांग्रेस प्रवक्ता अजय कुमार ने केजी बेसिन गैस उत्खनन को लेकर गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कारपोरेशन का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि राज्य सरकार को 19,576 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. उन्होंने कहा कि इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सफाई देनी चाहिए.

अहमद पटेल को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बताने वाले पोस्टरों पर विवाद

गुजरात में अहमद पटेल को मुख्यमंत्री बनाने के लिए मुसलमानों से कांग्रेस को वोट देने की अपील वाले पोस्टरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया, हालांकि पटेल ने इसे भाजपा का हथकंडा करार देते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री की दौड़ में नहीं हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि वह कभी भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं रहे और कभी होंगे भी नहीं.

इन पोस्टरों को सूरत-पूर्व विधानसभा क्षेत्र में लगाया गया. पोस्टरों पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और अहमद पटेल की तस्वीरें लगी थीं. पोस्टरों पर लिखा गया था, मुसलमानों से आग्रह किया जाता है कि समुदाय की एकता को बरकरार रखने और अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस को वोट करें.

पटेल ने ट्वीट किया, फर्जी पोस्टर लगाना और अफवाह फैलाना यह दिखाता है कि भाजपा परेशान है. हार की डर से अब वे हथकंडों का सहारा ले रहे हैं. मैं कभी भी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं रहा और आगे भी कभी नहीं रहूंगा.

उन्होंने कहा कि भाजपा अपने कामकाम से लोगों का ध्यान भटकाकर विभाजनकारी एजेंडे की ओर ले जाने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह ने कहा कि पार्टी के सत्ता में आने पर अहमद पटेल गुजरात में कोई पद ग्रहण नहीं करेंगे.

मंदिर मुद्दे पर लालू बोले, डूबते को राम का सहारा

चुनावी मौसम में भाजपा द्वारा राम मंदिर की बात फिर से किए जाने पर चुटकी लेते हुए राजद प्रमुख लालू यादव ने कहा है कि तिनका पुरानी बात हो गई, अब तो डूबते को राम का सहारा कहावत चरितार्थ हो रही है.

राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने ट्वीट किया है, डूबते को राम का सहारा, तिनका पुराना हो गया. लालू ने चुनाव के मौसम में राम को याद करने पर कटाक्ष करते हुए यह भी कहा है कि भगवान मन में रहते हैं, उन्हें खोजने के लिए मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारे जाने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने लिखा है, मेरे राम मेरे हृदय में सदैव मेरे अंग-संग रहते हैं. मैं उन्हें मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारे और चर्च में नहीं खोजता. राजद प्रमुख ने लिखा है, मैं मेरे परम प्यारे राम से वोट नहीं मांगता बल्कि उस पालनहार से वतन में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करता हूं. गौरतलब है कि गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री समेत भाजपा नेताओं ने अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा उठाने की कोशिश की है.

गुजरात चुनावों को लेकर लालू, सुशील मोदी के बीच तकरार

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को चुनौती दी कि अगर साहस है तो गुजरात में प्रचार करके दिखाएं. इससे पहले लालू ने दावा किया था कि गुजरात में विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा के शासन का अंत हो जाएगा.

सुशील मोदी ने गुजरात में कांग्रेस की जीत के लालू प्रसाद के दावे को खारिज करते हुए सवाल उठाया कि वह अपने सहयोगी के लिए प्रचार क्यों नहीं कर रहे.

एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में लालू ने कहा, 22 सालों से गुजरात में सत्ता में बैठी भाजपा नाकाम रही है. उन्होंने दावा किया, आगामी विधानसभा चुनाव राज्य में भाजपा के शासन पर विराम लगाएंगे. नतीजे विपक्ष की वापसी और सत्तारूढ़ भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाएंगे.

राजद गुजरात में चुनाव नहीं लड़ रही लेकिन प्रसाद वहां मतदाताओं से कांग्रेस का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं. प्रसाद के बयान पर जवाब देते हुए बिहार के उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने संवाददाताओं से कहा, वह प्रसाद यहां पटना में बैठे हैं और गुजरात के यादवों से भाजपा के खिलाफ वोट देने की अपील कर रहे हैं. अगर उनमें साहस है तो उन्हें खुद वहां जाना चाहिए और चुनाव प्रचार में भाग लेना चाहिए.

सुशील मोदी ने कहा, उनकी सहयोगी कांग्रेस चुनाव लड़ रही है लेकिन प्रचार में शामिल नहीं हुए. यादव हों, पटेल हों या अन्य कोई जाति के समूह हों, गुजरात में सब भाजपा के साथ हैं. पार्टी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी.

प्रसाद ने टीवी कार्यक्रम में राजद के खिलाफ वंशवाद की राजनीति को बढ़ावा देने के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि नेताओं के लिए इस तरह की बात क्यों की जाती है जबकि किसी वकील, डॉक्टर या किसी अन्य पेशे के व्यक्ति के बच्चे के लिए उसके पिता के पदचिन्हों पर चलना सामान्य माना जाता है.

सरकार चुनाव तक जीएसटी दर में कटौती के विज्ञापन जारी न करे: चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने सरकार को चुनावी राज्य गुजरात में कुछ वस्तुओं पर जीएसटी की दर कम करने का प्रचार नहीं करने की सलाह दी है क्योंकि इससे राज्य के मतदाता प्रभावित हो सकते हैं जहां नौ दिसंबर को पहले चरण का मतदान होना है.

हालांकि आयोग ने उत्पादों का उल्लेख किए बिना सरल की गई कर प्रक्रिया का विज्ञापन करने की अनुमति दे दी है. यह जानकारी गुरुवार को चुनाव आयोग के अधिकारियों ने दी.

एक अधिकारी ने कहा, पहले मसौदे पर चुनाव आयोग ने सलाह दी है कि ऐसा कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाए जो मतदाताओं को प्रभावित करने वाला हो. जाहिर तौर पर लोगों को प्रक्रियाओं से अवगत कराना होगा, इसलिए आयोग ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया है.

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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