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विरोध के स्वर दबाने की कोशिशों का कलाकारों को प्रतिकार करना चाहिए: प्रकाश राज

पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता प्रकाश राज ने कहा कि अगर एक आवाज़ दबाई जाएगी तो और ज़्यादा मज़बूत आवाज़ें सामने आएंगी.

अभिनेता प्रकाश राज. (फोटो साभार: फेसबुक/प्रकाश राज)

अभिनेता प्रकाश राज. (फोटो साभार: फेसबुक/प्रकाश राज)

तिरुवनंतपुरम: मशहूर दक्षिण भारतीय अभिनेता प्रकाश राज ने कहा है कि कलाकारों को विरोध के स्वर दबाने की हर कोशिश का प्रतिकार करना चाहिए.

यहां चल रहे 22वें केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफके) में हिस्सा ले रहे अभिनेता ने कहा कि रचनात्मक लोगों को इस मुश्किल दौर में साथ खड़ा होने और सहअस्तित्व की दिशा में काम करने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, हमारे जैसे लोगों को घबराना नहीं चाहिए और मानवता एवं सहअस्तित्व के लिए काम करना चाहिए.

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता प्रकाश राज ने फिल्म पद्मावती, एस. दुर्गा और न्यूड जैसी फिल्मों के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों को लेकर कहा कि किसी भी कला रचना के ख़िलाफ़ आंदोलन गलत है.

उन्होंने कहा कि फिल्मों का विरोध करना और फिल्मों के संवादों को राजनीतिक रंग देना सही नहीं है.

प्रकाश ने कहा कि विरोध के स्वर को दबाने की कोशिशें कोई नई चीज़ नहीं है और देश आज़ादी के बाद से इसका सामना करता रहा है.

उन्होंने हालांकि मौजूदा परिदृश्य को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस समय लोग अपने विचारों को हम पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं और कोई उसके विरोध में उतरे तो उसे रोक दिया जाता है.

अभिनेता ने कहा, जिसे भी यह लगता है कि वह सबसे बड़ा है, उसे उसकी जगह दिखा दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि अगर एक आवाज़ दबाई जाएगी तो और ज़्यादा मजबूत आवाजें सामने आएंगी.

इससे पहले बीते सात दिसंबर को राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को एक बराबर बताने पर अभिनेता प्रकाश राज ने केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े को आड़े हाथों लिया.

ट्विटर पर पोस्ट के ज़रिये प्रकाश राज ने कर्नाटक के भाजपा नेता से यह साफ करने को कहा था कि जब वह कहते हैं कि राष्ट्रवाद और हिंदुत्व एक है और उसका अर्थ समान है तो वह क्या कहना चाहते हैं.

सात दिसंबर को अभिनेता ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा था, ‘आपने कहा, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व दो अलग-अलग चीजें नहीं हैं बल्कि एक ही हैं और उनका मतलब एक ही है.

उन्होंने आगे कहा था, ‘और मेरे जैसे लोगों का क्या जिनका कोई धर्म नहीं हैं, लेकिन जो मानवता में विश्वास रखते हैं क्या हम सब अपने देश के नागरिक नहीं हैं आप लोग कौन हैं… आपका एजेंडा क्या है… चूंकि आप जन्मों में विश्वास रखते हैं… क्या आप लोग जर्मन हिटलर का अवतार हैं?’

प्रकाश राज को पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है. सबसे पहले 1997 में मणिरत्नम की फिल्म ईरुवर के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला.

1999 में ही तेलुगू फिल्म अंत:पुरम के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का स्पेशल जूरी अवॉर्ड मिला. 2003 में अलग-अलग फिल्मों में बेहतरीन अभिनय करने के लिए उन्हें स्पेशल जूरी अवॉर्ड मिला.

इसके बाद साल 2007 में प्रियदर्शन की तमिल फिल्म कांचीवरम के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. 2010 में बतौर निर्माता कन्नड़ भाषा की उनकी फिल्म पुट्टाक्कना हाईवे को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला.

वह हिंदी फिल्म लिटिल जॉन, बुड्ढा होगा तेरा बाप, सिंहम, दंबग 2, मुंबई मिरर, भाग मिल्खा भाग, जंज़ीर, हीरोपंती, एंटरटेनमेंट में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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