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झारखंड: हांसदा सोवेंद्र शेखर की किताब ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं

झारखंड सरकार जल्द हटाएगी प्रतिबंध, किताब को अश्लील बताते हुए चार महीने पहले लगा दिया था बैन.

हांसदा सोवेंद्र शेखर 'द आदिवासी विल नॉट डांस' (फोटो: फेसबुक/स्पीकिंग टाइगर)

हांसदा सोवेंद्र शेखर, ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ (फोटो: फेसबुक/स्पीकिंग टाइगर)

नई दिल्ली: साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित हांसदा सोवेद्र शेखर की किताब ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ पर चार महीने पहले लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी है.

यह किताब संथाल समुदाय पर आधारित है. आरोप था कि किताब में समुदाय की महिलाओं को गलत रूप में दर्शाया गया है. यह किताब 2015 में प्रकाशित हुई थी और सरकार ने विरोध के चलते इस साल अगस्त महीने में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था.

स्क्रॉल के अनुसार पेशे से डॉक्टर हांसदा अभी डॉक्टर के पद से निलंबित चल रहे हैं, क्योंकि उन्होंने राज्य सरकार से किताब लिखने के लिए अनुमति नहीं ली थी. उनका कहना है कि वह अपनी किताब में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं करेंगे. इसके लिए उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला दिया है.

प्रतिबंध के बाद झारखंड सरकार ने आदिवासी समाज के जानकारों और लेखकों की एक टीम बनाई थी, जिसनें किताब में लिखी सामग्रियों की जांच की. टीम ने जांच के बाद रिपोर्ट बनाई जिसे 12 दिसंबर, 2017 को विधानसभा में पेश की गई.

राज्य सरकार ने सदन में बताया कि उन्हें इस किताब में किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक कुछ नहीं मिला है. संसदीय कार्य मंत्री सरयू रॉय ने कहा कि इस किताब से जल्द प्रतिबंध हटेगा.

इससे पहले अगस्त महीने में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने किताब की सारी प्रतियां जब्त कर लेखक पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही थी.

लेखक हांसदा के खिलाफ मुहिम चलाने वालों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी किताब में संथाल समुदाय की महिलाओं को गलत दिखाया है, हालांकि राज्य सरकार ने सदन में साफ कर दिया है कि लेखक ने आदिवासी समाज और संथाल समुदाय की महिलाओं के खिलाफ कुछ गलत या अश्लील नहीं लिखा है.

टेलीग्राफ के अनुसार संसदीय कार्य मंत्री रॉय ने कहा, ‘वह एक प्रसिद्ध लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता हैं. हमने अनुचित विवादों को बंद करने के लिए एक जांच का आदेश दिया है. लेखकों और कलाकारों को अपने स्वयं के तरीकों से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अधिकार है. पूछताछ के दौरान यह पाया गया कि उनके अभिव्यक्ति का उद्देश्य किसी को चोट पहुंचाना नहीं था और उनकी लिखित सामाग्री पोर्नोग्राफी नहीं कही जा सकती थी. किताब पर प्रतिबंध जल्द वापस ले लिया जा सकता है.’

शेखर ने 2015 में ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ में अंग्रेजी में लिखी थी, जिसे बाद में हिंदी, मराठी और तमिल में अनूदित किया गया.