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एनजीटी ने स्पष्ट किया कि अमरनाथ गुफा में भजन-मंत्रोच्चार पर प्रतिबंध नहीं

एनजीटी ने कहा कि केवल इतना प्रतिबंध लगाया था कि किसी भी श्रद्धालु या किसी भी व्यक्ति को अमरनाथ महाशिवलिंग के समक्ष खड़े होने के दौरान शांति बनाए रखनी चाहिए.

(फोटो साभार: विकिपीडिया कॉमन्स)

(फोटो साभार: विकिपीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि उसने दक्षिण कश्मीर में स्थित अमरनाथ गुफा के अंदर मंत्रोच्चार और भजन गाने पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है.

इस निर्णय के बाद हुए प्रदर्शनों को देखते हुए एनजीटी ने कहा कि उसने पूरे इलाके को न तो ध्वनि निषेध क्षेत्र (साइलेंट ज़ोन) घोषित किया है न ही उसकी ऐसी कोई मंशा है.

संस्था ने कहा कि केवल इतना प्रतिबंध लगाया था कि किसी भी श्रद्धालु या किसी भी व्यक्ति को अमरनाथ महाशिवलिंग के समक्ष खड़े होने के दौरान शांति बनाए रखनी चाहिए.

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पवित्र गुफा की तरफ जाने वाली मुख्य सीढ़ियों सहित किसी भी अन्य हिस्से में प्रतिबंध लागू नहीं है.

एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि पवित्र गुफा की तरफ जाने वाली करीब 30 सीढ़ियों पर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई श्रद्धालु कोई सामान लेकर नहीं जाए क्योंकि यह परंपरा बोर्ड की ही है.

इसने कहा कि सीढ़ियों के नीचे कोई प्रतिबंध नहीं है. पीठ ने कहा, गुफा में दर्शकों-श्रद्धालुओं के लिए एक ही कतार होगी. ये निर्देश सभी संबंधित लोगों को मानना होगा.

इसने कहा, यह निर्देश इन बातों को ध्यान में रखते हुए दिए गए हैं कि पवित्र गुफा की पवित्रता और मौलिकता बरक़रार रहे, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि शोर, गर्मी, कंपन आदि का विपरीत असर महाशिवलिंग पर न पड़े ताकि बाद के दिनों में आने वाले श्रद्धालु भी अमरनाथ जी महा शिवलिंग के दर्शन कर सकें.

एनजीटी ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस आदेश की प्रति पर्यावरण और वन मंत्रालय के सचिव, जम्मू कश्मीर सरकार के मुख्य सचिव, अमरनाथ गुफा बोर्ड के सीईओ और उस इलाके के स्थानीय अधिकारियों को भेजी जाए.

एनजीटी ने बुधवार को गुफा को ध्वनि रहित क्षेत्र घोषित किया था और प्रवेश बिंदु से आगे धार्मिक रस्मों पर रोक लगा दी थी.

एनजीटी ने बुधवार के अपने आदेश में कहा था, सीढ़ियों के अंतिम बिंदु और पवित्र गुफा के इलाके को ध्वनि रहित क्षेत्र के तौर पर माना जाना चाहिए.

गौरतलब है कि अमरनाथ गुफा मंदिर को हिंदुओं के बड़े पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है. साल में ज़्यादातर समय यह गुफा बर्फ से ढंकी रहती है. केवल गर्मी में कुछ ही दिन के लिए यहां बर्फ नहीं होती.

एनजीटी के इस स्पष्टीकरण से पहले, दक्षिणपंथी हिंदू समूह विश्व हिंदू परिषद ने एनजीटी के आदेश का विरोध करते हुए इसे तुगलकी फतवा क़रार दिया था. विहिप ने कहा था कि पृथ्वी पर पारिस्थितिकी संबंधी हर समस्या के लिए हिंदू जिम्मेदार नहीं हैं.

विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कहा था, ‘हम भारत सरकार से हर बार एक या अन्य कारण से हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाने की अपील करते है. एनजीटी को इस तरह का तुगलकी फतवा वापस लेना चाहिए.’

बहरहाल, पर्यावरणविद गौरी मौलेखी ने एनजीटी के आदेश का स्वागत करते हुए इसे अच्छा एवं प्रगतिशील बताया. गौरी की ही याचिका पर एनजीटी ने यह आदेश दिया है.

बुधवार को गौरी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘अमरनाथ गुफा जिस स्थान पर है वहां की पारिस्थितिकी बहुत ही संवेदनशील है. एनजीटी के आदेशों से न केवल अमरनाथ यात्रा सुरक्षित होगी बल्कि श्रद्धालुओं को भी सुविधा होगी.’

उन्होंने कहा कि इससे पवित्र गुफा का क्षरण होने से बचेगा और यह सुनिश्चित होगा कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे. यह बहुत ही अच्छा और प्रगतिशील फैसला है.

अमरनाथ गुफा दक्षिण कश्मीर हिमालय में 12,756 फुट की ऊंचाई पर स्थित है और इसे हिंदुओं का एक पवित्र स्थान समझा जाता है.

एनजीटी ने पर्यावरण और वन मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की समिति को तीर्थयात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं के संबंध में तीन सप्ताह के भीतर एक कार्ययोजना सौंपने के भी निर्देश दिए थे.

मामले की अगली सुनवाई अगले वर्ष 18 जनवरी को होगी.

उल्लेखनीय है कि नवंबर में एनजीटी ने पवित्र गुफा के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों को समुचित आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के लिए अमरनाथ श्राइन बोर्ड की खिंचाई करते हुए कहा था कि वह समुचित ढंग से दर्शन करने से लोगों को वंचित नहीं कर सकता है.

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