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हिंदुस्तान में पैदा होने से हर व्यक्ति हिंदू नहीं होता: शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल में अपने एक बयान में कहा था कि हिंदुस्तान में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है.

शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती. (फोटो: पीटीआई)

शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती. (फोटो: पीटीआई)

मथुरा: द्वारिका स्थित शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यहां रामायण एवं महाभारत की शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि हिंदुस्तान में पैदा होने से हर व्यक्ति हिंदू नहीं हो जाता है.

बुधवार को हुए कार्यक्रम में शंकराचार्य ने कहा, ‘केवल हिंदुस्तान में पैदा होने से ही कोई हिंदू नहीं हो जाता. हमें केवल संस्कृति से ही नहीं, बल्कि धर्म से हिंदू होना चाहिए. कोई व्यक्ति यदि वेदों एवं हिंदू धर्म के शास्त्रों को न माने तो वह हिंदू नहीं होता है.

हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को आगरा में हुए एक कार्यक्रम में भाजपा पर हमला करते हुए स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, ‘जिस राम नाम के सहारे भाजपा सत्ता में आई आज उस राम को ही भुला रही है. केंद्र में तीन वर्ष से अधिक हो गए, उत्तर प्रदेश में भी एक वर्ष होने को आ गए लेकिन राम मंदिर का कोई रास्ता नहीं निकल सका. सरकार विवाद को सुलझाने की जगह बढ़ा रही है. ऐसे में राम मंदिर बनने का प्रश्न नहीं उठता.’

गौरतलब है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल में अपने एक बयान में कहा था कि हिंदुस्तान में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है.

बीते रविवार को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित स्वामी विवेकानंद मैदान में एक जन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, ‘भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं और भारत में मुस्लिम भी हिंदू हैं.’

संघ प्रमुख के अनुसार, ‘हिंदुत्व का अर्थ सभी समुदायों को संगठित करना है. हम हिंदुत्व की बात करते हैं जो हिंदूवाद से अलग है.’

संघ प्रमुख के अलावा उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने बीते शनिवार को कहा था कि कुछ ऐसे लोग हैं जो हिंदुत्व को जीवन पद्धति की बजाय संकीर्णी धार्मिक अवधारणा के तौर पर देखते हैं.

नायडू ने कहा था, ‘यह हिंदू इस देश के लोगों की वर्षों से जीवन पद्धति की पहचान है. प्राचीन काल से हमें जो मिला है वो भारतीयता है. जिसको कुछ लोग हिंदुत्व कहते हैं, इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.’

बहरहाल मथुरा में हुए कार्यक्रम में शंकराचार्य ने कहा कि रामायण और महाभारत को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए. यदि आधुनिक शिक्षा के साथ पौराणिक कथाओं का ज्ञान भी कराया जाएगा तो युवाओं को पता चलेगा कि बुरा कर्म करने से उसका नतीजा भी बुरा ही निकलेगा.

उन्होंने कहा, ‘अगर रामायण को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा तो युवाओं को एक बड़ी शिक्षा मिलेगी.’

उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित कथाकारों एवं धर्मप्रचारकों को सलाह दी कि वे राधा-कृष्ण की लीलाओं के साथ पापकर्म करने पर मिलने वाली नर्क की यातनाओं का भी वर्णन करें जिससे लोग बुरे विचार भी अपने मन में न लाएं.

ज्योतिष्पीठ पर चल रहे विवाद के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा, ‘सत्ता से जुड़ी कुछ शक्तियां हमारे ख़िलाफ़ षडयंत्र रच रही हैं. वे हमारी पीठों पर अपने समान विचार मानने वाले लोगों को बैठाना चाहती हैं. हमें अदालत से दूर रहकर अपनी सनातन परंपरा का पालन करना होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से सहयोग के साथ)

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